E20 पेट्रोल को लेकर सरकारी खुलासा: कितने गाड़ियों के लिए है ये सेफ? जानें क्या है लेटेस्ट अपडेट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
E20 पेट्रोल को लेकर सरकारी खुलासा: कितने गाड़ियों के लिए है ये सेफ? जानें क्या है लेटेस्ट अपडेट

भारत सरकार ने माना है कि E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के लिए पूरी तरह से कम्पेटिबल (compatible) गाड़ियों की गिनती का कोई पुख्ता ऑडिट नहीं हुआ है। हालांकि, सरकार का कहना है कि नए और पुराने दोनों तरह के मॉडल्स के लिए यह फ्यूल सुरक्षित है, जिसकी पुष्टि ऑटोमेकर्स के साथ हुई टेस्टिंग में हुई है।

Detailed Coverage

E20 पेट्रोल: क्या है पूरा मामला?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देशव्यापी E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि भारत में ऐसी कितनी गाड़ियां हैं जो E20 फ्यूल के लिए पूरी तरह से कम्पेटिबल (compatible) हैं, इसका कोई खास असेसमेंट (assessment) नहीं किया गया है। यह जानकारी उन सवालों के बाद सामने आई है जिनमें पूछा गया था कि यह फ्यूल मौजूदा पुरानी गाड़ियों को कैसे प्रभावित करेगा।

इंडस्ट्री की टेस्टिंग का दावा

हालांकि, कम्पेटिबल गाड़ियों की सटीक गिनती भले ही उपलब्ध न हो, लेकिन भारी उद्योग मंत्रालय ने बताया है कि EBP (Ethanol Blending Programme) प्रोग्राम साइंटिफिक रिसर्च (scientific research) और टेस्टिंग पर आधारित है। यह टेस्टिंग सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) जैसी इंडस्ट्री बॉडीज के साथ मिलकर की गई है। इन असेसमेंट्स (assessments) के अनुसार, E20 फ्यूल को इंजन की ड्यूरेबिलिटी (durability), कोरोज़न रेसिस्टेंस (corrosion resistance) और एमीशन्स (emissions) के लिए कड़ी जांच से गुजारा गया है। इन स्टडीज (studies) में ऑयल मार्केटिंग कंपनीज़ (Oil Marketing Companies) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (Indian Institute of Petroleum) का भी इनपुट लिया गया था ताकि फ्यूल के बड़े पैमाने पर डिस्ट्रीब्यूशन (distribution) से पहले यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सेफ्टी स्टैंडर्ड्स (safety standards) पर खरा उतरता है।

पुरानी गाड़ियों और माइलेज पर असर

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, E20 ब्लेंड्स पर चलने वाली पुरानी गाड़ियों में अब तक किसी असामान्य टूट-फूट या बार-बार फेल होने की समस्या नहीं देखी गई है। फिलहाल, भारत में करीब 20 करोड़ टू-व्हीलर्स (two-wheelers) और 3 करोड़ पैसेंजर व्हीकल्स (passenger vehicles) अलग-अलग इथेनॉल ब्लेंड्स पर चल रहे हैं। प्रमुख ऑटोमेकर्स (automakers) के ऑब्जर्वेशन्स (observations), जिन्होंने हाल के वर्षों में लाखों गाड़ियों को ट्रैक किया है, उनमें इथेनॉल के कारण होने वाले कोरोज़न (corrosion) या इंजन कंपोनेंट (engine component) के जल्दी खराब होने के कोई खास सबूत नहीं मिले हैं।

लेकिन, फ्यूल एफिशिएंसी (fuel efficiency) को लेकर एक समझौता साफ है। वाहन निर्माताओं ने बताया है कि जो गाड़ियां खास तौर पर E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं, उनमें E20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 3% से 5% की कमी आ सकती है। जहां E20 एक हाई ऑक्टेन रेटिंग (octane rating) और क्लीनर कम्बशन (cleaner combustion) जैसे फायदे देता है, वहीं फ्यूल इकोनॉमी (fuel economy) में यह मामूली गिरावट पुरानी इंजन डिज़ाइन्स (engine designs) के लिए एक ज्ञात एडजस्टमेंट (adjustment) है।

वाहन मालिकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?

आम कंज्यूमर (consumer) के लिए, E20 की ओर यह बदलाव पंप पर फ्यूल की केमिकल कम्पोजीशन (chemical composition) में एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। सरकार का कहना है कि यह ट्रांजीशन (transition) सुरक्षित है और फ्यूल बदलने के बावजूद मैन्युफैक्चरर्स (manufacturers) द्वारा वारंटी (warranties) का सम्मान किया जा रहा है। निवेशकों (investors) और कंज्यूमर्स (consumers) के लिए मुख्य चिंता उन नॉन-सर्टिफाइड (non-certified) गाड़ियों के लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस (long-term performance) को लेकर बनी हुई है।

बाजार और वाहन मालिकों के लिए अगला मॉनिटर करने योग्य (monitorable) चीज सर्विस सेंटर्स (service centers) से मिलने वाला ऑनगोइंग परफॉर्मेंस डेटा (ongoing performance data) होगा, क्योंकि E20 का इस्तेमाल करके ज्यादा गाड़ियां हाई माइलेज तक पहुंचेंगी। इसके अतिरिक्त, ऑटोमोटिव (automotive) और ऑयल मार्केटिंग सेक्टर्स (oil marketing sectors) के इन्वेस्टर्स (investors) इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि ब्लेंडिंग टारगेट्स (blending targets) में और बदलाव फ्यूल प्राइसिंग (fuel pricing), नए E20-कम्पलाइंट इंजन्स (E20-compliant engines) की कंज्यूमर डिमांड (consumer demand) और फ्यूल यूज को लेकर मैन्युफैक्चरर सर्विस गाइडलाइन्स (manufacturer service guidelines) में संभावित अपडेट्स को कैसे प्रभावित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.