E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग पेट्रोल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दल 2021 की NITI Aayog की एक रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं, जिसमें चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया था। उन पर आरोप है कि सरकार ने इन बातों को नजरअंदाज किया, जिससे पुराने वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी और इंजन पर असर पड़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं।
E20 पेट्रोल पर क्यों मचा है बवाल?
केंद्र सरकार की 20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) को पूरे देश में लागू करने की कवायद पर अब सियासी घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी दल 2021 की NITI Aayog की एक रिपोर्ट 'Roadmap for Ethanol Blending in India 2025' का ज़िक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट में सुझाए गए फेज्ड रोलआउट (Phased Rollout) और कंज्यूमर सेफगार्ड्स (Consumer Safeguards) को पूरी तरह से लागू किए बिना ही E20 को देशभर में लागू कर दिया गया है।
फ्यूल एफिशिएंसी और इंजन पर असर की चिंता
इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा वाहनों की परफॉरमेंस है। NITI Aayog की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने फोर-व्हीलर्स में फ्यूल एफिशिएंसी करीब 6-7% और टू-व्हीलर्स में 3-4% तक कम हो सकती है, अगर वे सिर्फ पेट्रोल पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए हों। हालांकि, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की स्टडीज़ में ये आंकड़े थोड़े कम बताए गए हैं, लेकिन कई वाहन मालिकों ने E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में गिरावट की शिकायत की है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले रबर और प्लास्टिक के फ्यूल सिस्टम कंपोनेंट्स पर इथेनॉल के हाई कंसंट्रेशन से क्षरण (Corrosion) का खतरा बढ़ सकता है।
रेगुलेटरी और इम्प्लीमेंटेशन पर सवाल
यह मामला तब और गरमा गया जब हाल ही में जुडिशियल डिस्कशन (Judicial Discussions) में सरकार की इथेनॉल पॉलिसी पर सवाल उठाए गए। आलोचकों का कहना है कि ओरिजिनल रोडमैप में 2025 तक E10 फ्यूल को एक सुरक्षा उपाय के तौर पर बनाए रखने का सुझाव था, जिसे E20 में बदलाव के दौरान प्राथमिकता नहीं दी गई। इसी के चलते कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे जैसे विपक्षी नेताओं ने पॉलिसी का फिर से मूल्यांकन करने की मांग की है। वहीं, सरकार का पक्ष है कि E20 ट्रांजिशन कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए एक अहम कदम है। सरकार ने यह भी कहा कि देश ने तय समय से काफी पहले ही इथेनॉल ब्लेंडिंग के टारगेट को हासिल कर लिया है।
सरकारी रुख और ग्लोबल ट्रेंड
अपने बचाव में सरकार का कहना है कि बायोफ्यूल (Biofuel) की ओर बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय उदाहरण भी मौजूद हैं। ब्राज़ील जैसे देशों का ज़िक्र करते हुए, जहाँ इथेनॉल का अधिक ब्लेंड इस्तेमाल होता है, और अमेरिका का, जहाँ E10 और E15 का उपयोग होता है, सरकार का तर्क है कि भारत भी ग्लोबल एनर्जी ट्रेंड्स (Global Energy Trends) के अनुरूप चल रहा है। सरकार का आधिकारिक रुख यही है कि E20 प्रोग्राम वैज्ञानिक शोध पर आधारित है और ब्लेंडिंग प्रतिशत में भविष्य में होने वाली वृद्धि के लिए अतिरिक्त टेस्टिंग और इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
ऑटोमोटिव सेक्टर और निवेशकों के लिए, आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां पुराने वाहनों के साथ लंबे समय तक चलने वाली ड्यूरेबिलिटी (Durability) सुनिश्चित करने के लिए इंजन डिजाइन और कंपोनेंट स्पेसिफिकेशंस (Component Specifications) में कैसे बदलाव करती हैं। बाज़ार के जानकार इस बात पर भी नज़र रखेंगे कि सरकार भविष्य में वैकल्पिक फ्यूल ग्रेड्स (Alternative Fuel Grades) की उपलब्धता को लेकर क्या घोषणाएं करती है और क्या पुराने वाहन फ्लीट्स (Vehicle Fleets) की कम्पैटिबिलिटी (Compatibility) से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए कोई टैक्स इंसेंटिव (Tax Incentives) या कंज्यूमर कंपनसेशन (Consumer Compensation) के उपाय लाए जाते हैं।
