E20 पेट्रोल से माइलेज घटेगा 6% तक, पर इंजन को कोई नुकसान नहीं: नितिन गडकरी

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AuthorAditya Rao|Published at:
E20 पेट्रोल से माइलेज घटेगा 6% तक, पर इंजन को कोई नुकसान नहीं: नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल से फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) में 2% से 6% तक की कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन फेल होने का कोई खतरा नहीं है। सरकार की टेस्टिंग में यह बात सामने आई है कि पुराने वाहनों के कुछ छोटे पुर्जों को बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है, जबकि नए वाहनों पर इसका कोई असर नहीं होगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश भर में E20 फ्यूल, जिसमें पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिला होता है, के इस्तेमाल को लेकर अहम जानकारी दी है। हाल ही में संसद में मंत्री ने कन्फर्म किया कि भले ही वाहन मालिकों को फ्यूल एफिशिएंसी में 2% से 6% तक की कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन पुख्ता टेस्टिंग से पता चला है कि यह फ्यूल मिश्रण पुराने और नए, दोनों तरह के वाहनों में इंजन फेल होने का कारण नहीं बनेगा।

वाहन के मेंटेनेंस पर असर?

ज़्यादातर वाहन मालिकों के लिए E20 फ्यूल का इस्तेमाल एक सामान्य प्रक्रिया रहेगी। मंत्री ने बताया कि BS-IV और BS-VI स्टैंडर्ड वाले वाहन इस फ्यूल के साथ पूरी तरह से कम्पेटिबल (Compatible) हैं। हालांकि, 2016 से पहले बने पुराने BS-III वाहनों के मालिकों को अपनी नियमित सर्विसिंग के दौरान रबर सील या गैस्केट जैसे कुछ खास पुर्जों को बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है। इन्हें बड़े इंजन ओवरहॉल के बजाय सामान्य सर्विसिंग का हिस्सा माना जा रहा है। खास बात यह है कि कार निर्माता कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल पर भी वे वाहन की वारंटी (Warranty) जारी रखेंगे, जिससे लंबे समय में नुकसान होने की चिंता दूर हो जाती है।

टेस्टिंग और सुरक्षा

जनता की सुरक्षा और वाहनों की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने मिलकर विभिन्न इंजन टाइप्स पर संयुक्त अध्ययन किया। इन अध्ययनों में ड्राइविंग, मटेरियल कम्पैटिबिलिटी और जंग लगने के जोखिमों को मापने के लिए कस्टम प्रोटोकॉल भी शामिल थे। नतीजों से पता चला कि E20 फ्यूल इंजन की लाइफ या स्टार्ट होने की क्षमता पर कोई बुरा असर नहीं डालता। इसके अलावा, इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल का इस्तेमाल भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है, जिससे E20 फ्यूल से पारंपरिक E10 मिश्रण की तुलना में लगभग 30% तक उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।

लागू करने की योजना और भविष्य

इथेनॉल की ज़्यादा ब्लेंडिंग की ओर बढ़ना सरकार के 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम' का हिस्सा है, जो 2006 से अलग-अलग चरणों में चल रहा है। वर्तमान टारगेट 'रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25' में बताए गए हैं। जैसे-जैसे सरकार इस चरणबद्ध कार्यान्वयन को आगे बढ़ा रही है, निवेशकों और ग्राहकों के लिए मुख्य ध्यान रिटेल आउटलेट्स पर E20 की उपलब्धता और पुराने वाहनों के लिए सर्विसिंग की ज़रूरतों पर रहेगा। भले ही माइलेज में कमी रोज़मर्रा के यात्रियों के लिए एक छोटी चिंता हो सकती है, लेकिन इंजन की बड़ी खराबी के अभाव से यह उम्मीद की जाती है कि इससे ऑटोमोटिव सेक्टर में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी और न ही निर्माताओं के लिए वारंटी से जुड़े खर्चों में भारी वृद्धि होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.