E20 फ्यूल पॉलिसी पर हंगामा: एक्टिविस्ट हाउस अरेस्ट, ग्राहकों की बढ़ी चिंता

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
E20 फ्यूल पॉलिसी पर हंगामा: एक्टिविस्ट हाउस अरेस्ट, ग्राहकों की बढ़ी चिंता

सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला को दिल्ली पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया है। इस बीच, वाहन मालिक पुरानी गाड़ियों पर फ्यूल एफिशिएंसी और मेंटेनेंस कॉस्ट को लेकर चिंताएं जता रहे हैं, जिस पर निवेशकों की भी नज़र है।

E20 फ्यूल: क्या है पूरा मामला?

एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने शनिवार को बताया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया है। वह गांधी स्मृति में E20 फ्यूल पॉलिसी के खिलाफ एक साइलेंट प्रोटेस्ट और हंगर स्ट्राइक की योजना बना रहे थे। E20 फ्यूल, पेट्रोल में 20% एथनॉल और 80% गैसोलीन का मिश्रण होता है।

ग्राहकों और एक्सपर्ट्स की चिंताएं

E20 फ्यूल पॉलिसी कई ग्राहक समूहों और वाहन मालिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। खासकर 2023 से पहले बने वाहनों के मालिकों का कहना है कि इस फ्यूल से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया है और मेंटेनेंस की ज़रूरतें बढ़ गई हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माना है कि फ्यूल एफिशिएंसी में लगभग 2% से 6% की कमी आ सकती है, लेकिन उनका कहना है कि सरकारी टेस्टिंग में इंजन फेल होने की कोई बात सामने नहीं आई है।

सरकार की रणनीति और इंडस्ट्री पर असर

सरकार E20 फ्यूल को बढ़ावा देकर कच्चे तेल के इम्पोर्ट को कम करने, कार्बन एमिशन घटाने और घरेलू चीनी व कृषि सेक्टर को सपोर्ट करने की कोशिश कर रही है। ऑटो इंडस्ट्री को भी नए इंजनों को E20 फ्यूल के अनुकूल बनाने के लिए लगातार टेक्निकल एडजस्टमेंट करने पड़ रहे हैं। नए मॉडल्स में कंपनियां E20-कम्प्लायंट इंजन दे रही हैं।

सरकार जहां एथनॉल ब्लेंडिंग के एनवायर्नमेंटल और इकोनॉमिक फायदों की बात कर रही है, वहीं विरोध प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि सरकारी पॉलिसी और आम ग्राहकों के अनुभव के बीच एक बड़ा गैप है। आलोचक चाहते हैं कि E5 या E10 जैसे फ्यूल के विकल्प भी उपलब्ध रहें, ताकि ग्राहक अपनी गाड़ी के हिसाब से फ्यूल चुन सकें।

निवेशकों के लिए क्या है महत्वपूर्ण?

ऑटो और एनर्जी सेक्टर के निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इंडस्ट्री इन बदलावों को ग्राहकों की नाराजगी के बिना कैसे मैनेज करती है। भले ही इस पॉलिसी से घरेलू एथनॉल उत्पादकों को फायदा हो, लेकिन अगर मेंटेनेंस इशूज या ग्राहकों का विरोध बढ़ता है, तो यह भविष्य में रेगुलेटरी बदलावों या व्हीकल सेल्स को प्रभावित कर सकता है। निवेशक इस बात पर भी नज़र रख सकते हैं कि सरकार के एथनॉल इस्तेमाल बढ़ाने के अभियान के बीच, नॉन-ब्लेंडेड या लोअर-ब्लेंड पेट्रोल के विकल्प उपलब्ध रहते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.