E20 Fuel: आपकी गाड़ी का माइलेज होगा कम? जानें कितना पड़ेगा असर!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
E20 Fuel: आपकी गाड़ी का माइलेज होगा कम? जानें कितना पड़ेगा असर!

सरकार ने E20 फ्यूल के इस्तेमाल से आपकी गाड़ी के माइलेज पर पड़ने वाले असर को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, माइलेज में **2% से 6%** तक की कमी आ सकती है, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय का अनुमान है कि पुराने वाहनों में यह कमी **3% से 5%** तक सीमित रह सकती है।

E20 फ्यूल से माइलेज पर कितना असर?

केंद्र सरकार ने E20 पेट्रोल (जिसमें 20% इथेनॉल और 80% गैसोलीन होता है) के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत कच्चे तेल के आयात और उत्सर्जन को कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को बढ़ा रहा है, ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह नया फ्यूल पुराने वाहनों को कैसे प्रभावित करेगा।

सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?

दो सरकारी मंत्रालयों ने इस मामले पर अलग-अलग अनुमान दिए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि E10 पेट्रोल के लिए डिज़ाइन किए गए वाहन (जैसे BS-III, BS-IV, और BS-VI मॉडल) E20 फ्यूल पर चलने पर 2% से 6% तक की ईंधन दक्षता में कमी का अनुभव कर सकते हैं।

वहीं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में बताया कि पुराने, E10-कम्प्लायंट वाहनों के लिए माइलेज में कमी आम तौर पर 3% से 5% तक सीमित है। हालांकि ये आंकड़े थोड़े अलग हैं, पर दोनों ही यह बताते हैं कि इसका असर बहुत ज़्यादा नहीं होगा और यह वाहन की बनावट और उम्र पर निर्भर करेगा।

माइलेज पर असर डालने वाले अन्य कारक

माइलेज में अपेक्षित गिरावट के बावजूद, सरकारी अधिकारी इस बात पर जोर देते हैं कि E20 फ्यूल को अपनाने के पीछे महत्वपूर्ण तकनीकी और पर्यावरणीय लाभ हैं। E20 फ्यूल की ऑक्टेन रेटिंग ज़्यादा होती है, जो इंजन के एंटी-नॉक गुणों (Anti-Knock Characteristics) को बेहतर बनाती है और इससे इंजन का कम्बशन (Combustion) ज़्यादा स्मूथ और क्लीन होता है।

निवेशकों के लिए यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) केवल फ्यूल की बनावट पर ही निर्भर नहीं करती। जैसा कि दोनों मंत्रालयों ने स्पष्ट किया है, वाहन का रखरखाव, गाड़ी चलाने का तरीका और सड़क की स्थिति जैसे कारक अक्सर इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत की तुलना में ओवरऑल माइलेज पर ज़्यादा प्रभाव डालते हैं। ऑटोमोटिव निर्माताओं (Automotive Manufacturers) के लिए, नए इंजन डिज़ाइन को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना जारी है ताकि दक्षता में होने वाले इन नुकसानों को कम किया जा सके।

ऑटोमोटिव और ऑयल मार्केटिंग सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों को इन दक्षता के आंकड़ों पर उपभोक्ता की प्रतिक्रिया और भविष्य में वाहनों की मांग पर पड़ने वाले प्रभाव पर नज़र रखनी चाहिए। सोशल मीडिया पर माइलेज में मामूली कमी की चिंता जताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि यह प्रभाव प्रबंधनीय है। बाजार के लिए अगली महत्वपूर्ण खबर ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा E20-कम्प्लायंट इंजन की निरंतर तैनाती और इथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों (Ethanol Blending Targets) को लेकर किसी भी आगे की नीतिगत सुधारों से आएगी, जिसका सीधा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की खरीद और मुनाफे पर पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.