50,000 पार Dow Jones, पर भविष्य अनिश्चित?
अमेरिकी शेयर बाजार के लिए 6 फरवरी, 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा, जब Dow Jones Industrial Average पहली बार 50,000 का आंकड़ा पार कर गया। यह इंडेक्स 50,115.67 पर बंद हुआ। इस साल 2026 में अब तक Dow Jones में 4.3% की शानदार बढ़त देखी गई है। इस तेजी ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को भी बड़ा बयान देने के लिए प्रेरित किया है। Trump का कहना है कि "शानदार टैरिफ" (Great TARIFFS) के दम पर यह इंडेक्स उनके कार्यकाल के अंत तक 1,00,000 तक पहुँच सकता है। यह मौजूदा बढ़त पिछले साल के अक्टूबर से चली आ रही है, जब Dow ने लगातार नौ महीनों तक तेजी का सिलसिला बनाए रखा था। Trump के पिछले कार्यकाल में भी Dow Jones में 12% से ज्यादा की तेजी आई थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बाजार पर कैसा असर?
लेकिन, यह बुलिश (Bullish) आउटलुक (Outlook) एक बड़े खतरे के साये में है। अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट 20 फरवरी, 2026 तक International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वैधता पर अपना फैसला सुनाने वाला है। लीगल एक्सपर्ट्स (Legal Experts) और सट्टेबाजी बाजारों का मानना है कि इस बात की 75% से ज्यादा संभावना है कि कोर्ट सरकार के खिलाफ फैसला सुनाए। अगर ऐसा होता है, तो सरकार को अब तक वसूले गए सैकड़ों अरबों डॉलर के ड्यूटी (Duty) को वापस करना पड़ सकता है। यह फैसला बाजार में भारी अनिश्चितता और बड़ी हलचल ला सकता है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी जजों ने एग्जीक्यूटिव ब्रांच (Executive Branch) द्वारा IEEPA का इस्तेमाल कर इन टैरिफ को लागू करने के अधिकार पर सवाल उठाए थे।
अन्य इंडेक्स का हाल और आर्थिक संकेत
Dow Jones में तेजी के बावजूद, अन्य बड़े इंडेक्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। S&P 500, जिसने जनवरी के मध्य में रिकॉर्ड हाई (Record High) बनाया था, वह महीने के अंत तक 1.4% बढ़ा और साल की शुरुआत से अब तक 1.3% चढ़ा है। वहीं, Nasdaq में 6 फरवरी, 2026 तक साल की शुरुआत से 0.9% की गिरावट दर्ज की गई। 2026 के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ (Growth) 2.6% रहने का अनुमान है, जबकि अमेरिका की ग्रोथ धीमी होकर 1.5% तक पहुँच सकती है। J.P. Morgan Global Research के मुताबिक, 2026 में अमेरिका और दुनिया भर में मंदी (Recession) का 35% चांस है, हालांकि ग्लोबल इक्विटी (Equities) के लिए आउटलुक सकारात्मक है।
टैरिफ का इतिहास और असर
ऐतिहासिक रूप से, टैरिफ (Tariffs) एक दोधारी तलवार साबित हुए हैं। अध्ययनों से पता चला है कि ये GDP को कम कर सकते हैं, उपभोक्ता मूल्य (Consumer Prices) बढ़ा सकते हैं और घरेलू आय (Household Income) पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। 2018-2019 में शुरू हुई ट्रेड वॉर्स (Trade Wars) ने बाजार में बड़ी अस्थिरता पैदा की और अमेरिकी एक्सपोर्ट (Exports) को नुकसान पहुँचाया। मौजूदा टैरिफ व्यवस्था से उपभोक्ता मूल्य और महंगाई (Inflation) बढ़ने का अनुमान है। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत के बीच महंगाई में 1% की बढ़ोतरी हो सकती है।
अनुमानों पर दांव या बड़ा जोखिम?
Trump का 1,00,000 का Dow लक्ष्य आकर्षक है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सामने यह अनुमान से ज्यादा सट्टा (Speculative) लग रहा है। टैरिफ के अमान्य होने की स्थिति एक बड़ा खतरा पैदा करती है, खासकर उन सेक्टर्स (Sectors) के लिए जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन्स (Supply Chains) पर निर्भर हैं। टैरिफ का बोझ, जिसमें उपभोक्ता पर 50% से ज्यादा का बोझ पड़ता है, महंगाई बढ़ाता है और व्यवसायों के लिए लागत बढ़ाता है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) कम हो सकते हैं। जबकि Dow के बड़े कंपोनेंट्स (Components) में बढ़त देखी गई है, Dow Inc. जैसी कुछ कंपनियों को विश्लेषकों से 'होल्ड' (Hold) रेटिंग मिली है, जो दर्शाता है कि सभी शेयर बाजार के मौजूदा माहौल से एक समान फायदा नहीं उठा रहे हैं। ब्रॉड टैरिफ के ऐतिहासिक प्रभाव में नौकरियों का नुकसान और आर्थिक उत्पादन में कमी शामिल रही है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अगर ट्रेड पॉलिसी (Trade Policy) को प्रभावित करता है तो इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
भविष्य की राह: अनिश्चितता से निपटना
निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले पर निर्भर करेगी। यदि फैसला टैरिफ को अमान्य करता है, तो अनिश्चितता कम होने और संभावित ड्यूटी रिफंड (Duty Refunds) मिलने से बाजार में तेजी आ सकती है। हालांकि, बदली हुई ट्रेड पॉलिसी, वैश्विक आर्थिक मंदी और मंदी की संभावनाओं के दीर्घकालिक प्रभाव बने रहेंगे। 2026 के लिए इक्विटी (Equities) के लिए बाजार की भावना (Sentiment) आम तौर पर सकारात्मक बनी हुई है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी, रेगुलेटरी (Regulatory) नतीजों और अंतर्निहित आर्थिक फंडामेंटल्स (Fundamentals) के बीच तालमेल ही तय करेगा कि क्या Trump की बड़ी भविष्यवाणियां सच हो सकती हैं।