घरेलू निवेशकों का दम! FIIs ने की वापसी, भारतीय शेयर बाज़ार में लौटी रौनक

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
घरेलू निवेशकों का दम! FIIs ने की वापसी, भारतीय शेयर बाज़ार में लौटी रौनक

भारतीय शेयर बाज़ार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का दबदबा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। Nifty 50 में इनकी हिस्सेदारी एक नया मुकाम छू चुकी है, जिसने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संभाला है। जुलाई 2026 में FIIs की वापसी और गिरते कच्चे तेल के भावों ने बाज़ार में नई जान फूंकी है।

घरेलू निवेशकों का बढ़ता दबदबा

भारतीय शेयर बाज़ार की मजबूती में घरेलू निवेशकों (DIIs) का योगदान नई ऊंचाइयों पर है। मार्च 2026 तक, Nifty 50 इंडेक्स में DIIs की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 24.9% हो गई। यह पिछले डेढ़ साल से ज़्यादा समय से जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली के दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इस बदलाव ने बाज़ार को स्थिरता दी है, जो हाल के दिनों में कई उतार-चढ़ावों से गुज़रा है।

जुलाई में FIIs का बदला मिजाज

लंबे समय तक बिकवाली का दौर झेलने के बाद, विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। कैलेंडर वर्ष 2025 में FIIs ने भारतीय शेयरों से ₹2.98 लाख करोड़ निकाले थे। 2026 की शुरुआत में भी यह बिकवाली जारी रही, लेकिन जुलाई में तस्वीर बदल गई। 29 जुलाई 2026 तक, FIIs वापस खरीदार बनकर उभरे और उन्होंने भारतीय इक्विटी में ₹34,873 करोड़ का निवेश किया। इस बदलाव के साथ ही Nifty 50 में FIIs की हिस्सेदारी घटकर 12-तिमाही के निचले स्तर 22.8% पर आ गई है।

मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स और नतीजों का अनुमान

आर्थिक माहौल में हालिया सुधार भी सकारात्मक सेंटिमेंट में योगदान दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भू-राजनीतिक तनाव को कम करने में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। तेल की कम कीमतों के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर का नरम पड़ना और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का गिरना, भारत जैसे उभरते बाज़ारों में वैश्विक पूंजी की वापसी को प्रोत्साहित कर सकता है।

घरेलू स्तर पर, आर्थिक विकास की उम्मीदें बरकरार हैं। चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में भारत की GDP ग्रोथ 8% रहने का अनुमान है। यह ग्रोथ रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निवेश, AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर के लिए 'चाइना-प्लस-वन' रणनीति जैसे दीर्घकालिक कारकों से प्रेरित है। इसके अलावा, घरेलू व्यवसाय निरंतर खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च से लाभान्वित हो रहे हैं। हालांकि कुछ निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन कॉर्पोरेट प्रदर्शन आम तौर पर मजबूत बना हुआ है, और FY27 के दौरान आय वृद्धि (Earnings Growth) में और ज़्यादा उद्योगों के शामिल होने की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

आगे चलकर, बाज़ार की निगाहें रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं। हालांकि ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन निवेशक संभावित दर कटौती (Rate Cuts) के संकेतों की तलाश में हैं, जो वर्तमान में फाइनेंशियल ईयर 2027 की तीसरी तिमाही में अपेक्षित हैं। इसके अतिरिक्त, FIIs की हालिया खरीदारी की प्रवृत्ति की निरंतरता और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का कॉर्पोरेट मुनाफे पर प्रभाव अगले कुछ महीनों में महत्वपूर्ण कारक होंगे जिन पर नज़र रखने की ज़रूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.