निवेशकों की सोच में अंतर
डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) की यह मजबूत खरीदारी फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के भारत से पैसा निकालने के बिल्कुल विपरीत है। मार्च 2026 की तिमाही में, DIIs ने $27.2 बिलियन भारतीय शेयरों में डाले, जिसका मुख्य कारण सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) से लगातार आने वाला पैसा रहा। वहीं, FIIs ने $15.8 बिलियन की बिकवाली की, खासकर मार्च महीने में। यह तब हुआ जब ईरान संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी।
सेक्टरों का नया आवंटन
निवेशकों की सोच में यह अंतर विभिन्न सेक्टर्स में भी साफ दिख रहा है। पिछले एक साल में, DIIs ने 24 में से 21 सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। सबसे ज्यादा बढ़त प्राइवेट बैंक्स, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, रियल एस्टेट और हेल्थकेयर सेक्टर्स में देखी गई। इसके विपरीत, FIIs ने 17 सेक्टर्स में अपनी होल्डिंग कम की, जिसमें प्राइवेट बैंक्स, NBFCs, EMS और रियल एस्टेट प्रमुख थे।
मार्केट कैप ट्रेंड्स
घरेलू निवेशकों ने विभिन्न कंपनी साइज में भी अपनी पैठ बढ़ाई है। पिछले साल की तुलना में, लार्ज-कैप स्टॉक्स में उनकी हिस्सेदारी 130 बेसिस पॉइंट बढ़ी, मिड-कैप में 260 बेसिस पॉइंट, और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में 190 बेसिस पॉइंट का इजाफा हुआ। यह व्यापक वृद्धि बाजार में घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
टॉप होल्डिंग्स पर फोकस
बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर DIIs के लिए सबसे बड़ा निवेश क्षेत्र बना हुआ है, जो उनके Nifty-500 निवेश का 28.2% है। अन्य प्रमुख सेक्टर्स में ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर गुड्स, टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल शामिल हैं। DIIs की टॉप इंडिविजुअल स्टॉक पिक्स में HDFC Bank, Reliance Industries, ICICI Bank, ITC और State Bank of India शामिल हैं। यह पैटर्न बाहरी कारकों से जुड़े सेक्टर्स से हटकर उन सेक्टर्स की ओर एक बदलाव का संकेत देता है जो भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था द्वारा संचालित होते हैं।
