Dollar Price: डॉलर की चमक फीकी? डी-डॉलरराइजेशन की बढ़ती लहरों से घबराया ग्लोबल मार्केट

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Dollar Price: डॉलर की चमक फीकी? डी-डॉलरराइजेशन की बढ़ती लहरों से घबराया ग्लोबल मार्केट
Overview

वैश्विक स्तर पर डी-डॉलरराइजेशन (De-Dollarization) की बढ़ती रफ्तार और अमेरिकी राजकोषीय चिंताओं के चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index) **98** के अहम स्तर से नीचे फिसल गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे डॉलर की सेफ-हेवन (Safe-haven) के तौर पर अपील कमजोर हो सकती है, जिसका सीधा असर गोल्ड की कीमतों और वैश्विक वित्त पर दिख सकता है।

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अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) का 98 के स्तर से नीचे गिरना काफी अहम है। आमतौर पर, भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय डॉलर मजबूत होता है, लेकिन हालिया मध्य पूर्व (Middle East) के तनाव के दौरान भी इसने अपनी बढ़त गंवा दी। 1 मई, 2026 तक, इंडेक्स करीब 97.77 पर ट्रेड कर रहा था, जो कि 97.9512 के क्लोजिंग स्तर से भी कम था। 1 मई को DXY में 0.11% की गिरावट आई। पिछले एक महीने और बारह महीनों में, यह 2.08% कमजोर हुआ है, जो इसके सेफ-हेवन स्टेटस पर सवाल खड़े करता है।

इस गिरावट को केवल एक अस्थायी झटका नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे डी-डॉलरराइजेशन की एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी के तौर पर डॉलर का दबदबा धीरे-धीरे कम हो रहा है। ब्रिक्स (BRICS) देश तेजी से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। अनुमान है कि 2020 से 2024 के बीच उन्होंने ग्लोबल गोल्ड प्रोडक्शन का लगभग 50% और सेंट्रल बैंकों की गोल्ड खरीद का 50% से अधिक हिस्सा हासिल किया है। रूस और चीन इस मुहिम में सबसे आगे हैं। यह कदम डॉलर को 'हथियार' बनाए जाने की आशंकाओं और SWIFT पेमेंट सिस्टम की कमजोरियों के चलते उठाया जा रहा है, जिससे देश अधिक स्थिर माने जाने वाले एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं। ग्लोबल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी 1999 के लगभग 71% से घटकर अब करीब 57% रह गई है।

इसके अलावा, अमेरिका की बढ़ती राजकोषीय चिंताएं भी डॉलर पर दबाव बना रही हैं। 30 अप्रैल, 2026 तक, अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज (National Debt) लगभग $38.93 ट्रिलियन तक पहुंच गया था, और मार्च 2026 में कर्ज-से-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) 100% को पार कर गया था। इस स्थिति से करेंसी का अवमूल्यन (Debasement) और लंबी अवधि में महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बढ़ रही हैं। कई आलोचक, जैसे पीटर शिफ (Peter Schiff), चेतावनी दे रहे हैं कि लगातार घाटे के कारण डॉलर के 'अच्छे दिन खत्म' हो गए हैं और यह गिर सकता है। यह माना जा रहा है कि इस साल 2026 में कर्ज पर ब्याज का भुगतान $1 ट्रिलियन को पार कर सकता है, जो राष्ट्रीय रक्षा खर्च से भी अधिक होगा। यह स्थिति डॉलर की दीर्घकालिक स्थिरता पर संदेह पैदा करती है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि डॉलर का यह गिरावट का दौर जारी रह सकता है, और अगले 12 महीनों में यह 96.50 तक गिर सकता है। ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं का बढ़ता उपयोग और वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम का विकास डॉलर पर निर्भरता कम होने का संकेत दे रहा है। हालांकि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) फिलहाल इंटरेस्ट रेट्स को स्थिर रख सकता है, बाजारें आने वाले समय में पॉलिसी बदलावों के संकेतों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.