Dollar Rate गिरी: AI Imports से Trade Deficit बढ़ा, Yen Intervention बेअसर!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
Dollar Rate गिरी: AI Imports से Trade Deficit बढ़ा, Yen Intervention बेअसर!
Overview

अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) में हल्की नरमी देखी गई, क्योंकि AI से जुड़े इम्पोर्ट्स (Imports) के कारण ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़ गया। वहीं, जापानी येन (Japanese Yen) को बचाने के लिए सेंट्रल बैंक की कोशिशें खास सफल नहीं दिख रही हैं, जबकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (Australian Dollar) रेट हाइक के बाद चढ़ा, लेकिन ग्रोथ आउटलुक पर चिंताएं हैं।

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अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index) में हल्की गिरावट आई है और यह करीब 98.437 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह गिरावट ग्लोबल टेंशन में कमी का नतीजा कम, बल्कि अमेरिका के बढ़ते ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) का असर ज्यादा लग रही है। मार्च में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़े कैपिटल गुड्स में भारी निवेश के चलते इम्पोर्ट्स (Imports) में तेज उछाल आया। इन AI-संबंधित इम्पोर्ट्स के बिना, ट्रेड डेफिसिट काफी कम होता। पेट्रोिलम एक्सपोर्ट्स (Exports) में बढ़ोतरी के बावजूद, इम्पोर्ट्स ज्यादा रहे। जानकारों का मानना है कि डॉलर पर लंबे समय से चला आ रहा वैल्यूएशन का दबाव इसे और नीचे ले जा सकता है।

दूसरी ओर, जापानी येन (Japanese Yen) ने कुछ रिकवरी दिखाई है। टोक्यो अथॉरिटीज द्वारा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर 'इंटरवेंश्न' (Intervention) किए जाने के बाद येन ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई। अनुमान है कि करेंसी को सपोर्ट करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए गए। हालांकि, ऐसे कदमों का लॉन्ग-टर्म असर सवालों के घेरे में है। येन की कमजोरी की वजह जापान की बेहद कम ब्याज दरें (Interest Rates), दूसरे बड़े देशों के मुकाबले बढ़ता इंटरेस्ट रेट गैप और लगातार बनी हुई आर्थिक चिंताएं हैं। जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) वजहों से एनर्जी शॉक ने इन दिक्कतों को और बढ़ाया है, जिससे इंटरवेंश्न सिर्फ एक टेम्परेरी (Temporary) उपाय साबित हो रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर गल्फ देशों में शांति वार्ता (Peace Negotiations) से कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं मिलता है, तो USD/JPY का पेअर वापस 160 के लेवल की ओर बढ़ सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (Australian Dollar) में भी उछाल आया, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। कैश रेट को 4.35% पर पहुंचा दिया गया है। हालांकि, महंगाई (Inflation) को कंट्रोल करने के इस 'हॉकिश' (Hawkish) मूव का बाजार को पहले से अंदाजा था, इसलिए इसका तुरंत असर सीमित रहा। लेकिन, RBA ने 2026 के लिए आर्थिक ग्रोथ के अनुमान को घटाकर सिर्फ 1.3% कर दिया है। इसके पीछे ग्लोबल एनर्जी शॉक को वजह बताया गया है। बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) बढ़ने का अनुमान है, जो टाइट मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के बावजूद मुश्किल आर्थिक भविष्य की ओर इशारा करता है।

यूरो (Euro) डॉलर के मुकाबले थोड़ा चढ़ा, क्योंकि यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें थीं। हालांकि, महंगे एनर्जी कॉस्ट और सुस्त ग्रोथ के कारण यूरोजोन (Eurozone) में स्टैगफ्लेशन (Stagflation) की चिंताएं बनी हुई हैं। ब्रिटिश पाउंड (British Pound) भी मजबूत बना रहा, जो दो महीने के हाई के करीब कारोबार कर रहा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) के महंगाई पर सख्त रुख के संकेतों ने इसे सहारा दिया। पर, घरेलू राजनीतिक अनिश्चितताएं इसके और बढ़ने की राह में रोड़ा बन सकती हैं।

कुल मिलाकर, जापानी येन की स्ट्रक्चरल कमजोरियां बड़ा रिस्क बनी हुई हैं। जापान और दूसरी बड़ी इकोनॉमीज़ के बीच इंटरेस्ट रेट का बड़ा गैप और निगेटिव रियल इंटरेस्ट रेट येन के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। येन में लगातार मजबूती के लिए फंडामेंटल पॉलिसी शिफ्ट की जरूरत होगी। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भविष्य ग्रोथ आउटलुक में बड़ी गिरावट से धूमिल हो गया है; 2026 के लिए सिर्फ 1.3% GDP ग्रोथ का अनुमान सुस्त इकोनॉमी की तरफ इशारा करता है, जिस पर मॉनेटरी टाइटनिंग और एक्सटर्नल शॉक का दबाव है। भले ही जियोपॉलिटिकल टेंशन थोड़ी कम हुई हो, लेकिन क्रिटिकल शिपिंग रूट्स पर नाजुक सीज़फायर और लगातार फायर एक्सचेंज का मतलब है कि किसी भी बढ़त से 'फ्लाइट टू सेफ्टी' (Flight to Safety) हो सकती है, जिससे डॉलर जैसी सेफ-हेवन करेंसीज को फायदा होगा। AI इन्वेस्टमेंट से बढ़ा अमेरिकी ट्रेड डेफिसिट एक लॉन्ग-टर्म चुनौती है, जो बताता है कि डॉलर का करंट वैल्यू और गिर सकता है।

आगे चलकर, एनालिस्ट्स (Analysts) का अनुमान है कि U.S. Dollar Index तिमाही के अंत तक 97.83 और 12 महीने में 96.17 तक गिर सकता है। यूरो के 1.18 (तिमाही के अंत) और 1.20 (एक साल में) तक जाने की उम्मीद है, जबकि ब्रिटिश पाउंड तिमाही के अंत तक करीब 1.36 और 12 महीने में 1.39 तक मजबूत हो सकता है। जापानी येन पर इंटरवेंश्न का असर कम हो रहा है, और USD/JPY अगले कुछ हफ्तों में 160 की ओर बढ़ सकता है, जब तक कि गल्फ शांति वार्ता में कोई बड़ा मोड़ न आए। AUD/USD का आउटलुक मिला-जुला है, क्योंकि RBA के रेट हाइक को इकोनॉमी ग्रोथ में आई सुस्ती का ग्रहण लगा है, जिससे यह दूसरे पेयर्स की तुलना में कम आकर्षक हो जाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.