भू-राजनीतिक तनाव के बीच डॉलर को मिली मजबूती
एशियाई बाजारों में आज सुबह से ही अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में तेज़ी देखी जा रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित पनाह (Safe Haven) के तौर पर डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि डॉलर इंडेक्स, जो प्रमुख करेंसी की तुलना में डॉलर की मजबूती मापता है, में 0.5% का उछाल आया और यह 99.641 के स्तर पर पहुंच गया। यह एक हफ्ते की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त है, जो ग्लोबल अनिश्चितता में निवेशकों की डॉलर के प्रति पसंद को दिखाती है।
Fed की नरमी की उम्मीदों से डॉलर को सहारा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलते संकेतों ने भी डॉलर को मज़बूती दी है। बढ़ती महंगाई और सप्लाई चेन की दिक्कतों के बावजूद, अब ट्रेडर यह उम्मीद कर रहे हैं कि फेडरल रिजर्व साल के अंत तक ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करेगा। CME Group के FedWatch टूल के अनुसार, दिसंबर की मीटिंग में फेड के दरों को स्थिर रखने की संभावना 70.6% तक पहुंच गई है, जो पिछले दिन 60.2% थी। दरों में इस संभावित 'पॉज़' (Pause) ने डॉलर को सहारा दिया है। जापानी येन (Japanese Yen) के मुकाबले डॉलर 159.41 के करीब रहा, जो इस साल की ऊंचाई के नज़दीक है। वहीं, ग्लोबल ग्रोथ के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियन डॉलर (Australian Dollar) 0.1% गिरकर $0.6943 पर आ गया।
अन्य करेंसी और क्रिप्टो पर क्या हुआ असर?
महंगाई की चिंताएं दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्ड ने भी संकेत दिया है कि अगर मिडिल ईस्ट संघर्ष से महंगाई बढ़ती है, तो यूरोज़ोन को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। हालांकि, यूरो $1.1560 पर स्थिर रहा। यूके में, फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) 3.0% पर स्थिर रहा, जो जनवरी के बराबर है और बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) के लक्ष्य से ऊपर है। ब्रिटिश पाउंड (British Pound) $1.3365 पर कुछ हद तक संभला। डिजिटल एसेट्स की बात करें तो, बिटकॉइन (Bitcoin) 0.4% की बढ़त के साथ $71,247.25 पर और ईथर (Ether) 0.2% चढ़कर $2,170.88 पर कारोबार कर रहा था।
डॉलर की बढ़त के लिए क्या हैं खतरे?
हालांकि, भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते डॉलर फिलहाल मज़बूत दिख रहा है, लेकिन इसकी यह तेज़ी कई चुनौतियों का सामना कर सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज़्यादा बनी रहती है, खासकर अस्थिर ऊर्जा कीमतों को देखते हुए, तो Fed का दरों को लंबा 'पॉज़' करने का अनुमान गलत साबित हो सकता है। ऐसे में, अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ीं या सप्लाई चेन में कोई नई बाधा आई, तो Fed को अपनी पॉलिसी पर फिर से विचार करना पड़ सकता है, जिससे डॉलर कमज़ोर हो सकता है। USD/JPY में तेज़ उछाल से जापान सरकार द्वारा येन को संभालने के लिए इंटरवेंशन (Intervention) की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। गोल्ड (Gold), जो एक और सेफ हेवन एसेट है, रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब कारोबार कर रहा है, जो व्यापक 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) माहौल का संकेत देता है।
आगे क्या हो सकता है?
बाज़ार अब भू-राजनीतिक घटनाओं और सेंट्रल बैंकों के बयानों पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। मौजूदा आंकड़े फेड द्वारा दरों को स्थिर रखने का संकेत दे रहे हैं, लेकिन भविष्य में महंगाई और ऊर्जा की कीमतों का रास्ता अनिश्चित है। किसी भी भू-राजनीतिक स्थिति में बदलाव या फेडरल रिजर्व से कोई अप्रत्याशित 'हॉकिश' (Hawkish) कदम डॉलर के वर्तमान फायदे को तेज़ी से पलट सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि तेल बाज़ार की अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में आगे संघर्ष का जोखिम, डॉलर की मांग को निकट भविष्य में ऊँचाई पर बनाए रखेगा। हालांकि, मध्यम अवधि में डॉलर के प्रदर्शन के लिए फेडरल रिजर्व के भविष्य के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।