Digital Fraud का कहर: ₹3,588 करोड़ डूबे, पर UPI रहा सबसे सुरक्षित!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Digital Fraud का कहर: ₹3,588 करोड़ डूबे, पर UPI रहा सबसे सुरक्षित!

डिजिटल पेमेंट की दुनिया में फ्रॉड का बड़ा खेल चल रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2022 से लेकर सितंबर 2026 के बीच, भारतीयों ने डिजिटल पेमेंट फ्रॉड में करीब **₹3,588 करोड़** गंवा दिए हैं। बैंकों ने इसमें से सिर्फ **₹239 करोड़** ही रिकवर कर पाए हैं। हालांकि, इस दौरान क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी के हॉटस्पॉट बने रहे, लेकिन UPI ट्रांजैक्शन अपनी मजबूती साबित करते हुए सबसे सुरक्षित साबित हुआ है।

Detailed Coverage

फ्रॉड का बढ़ता जाल: 5.83 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज

हालिया आंकड़ों के मुताबिक, FY22 से सितंबर 2026 तक, भारत में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के 5.83 लाख से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। इन घोटालों में कुल ₹3,588.22 करोड़ की भारी रकम डूब गई। चिंता की बात यह है कि वित्तीय संस्थानों के लिए इन डूबे हुए पैसों को वापस लाना एक बड़ी चुनौती है। अब तक कुल रकम का केवल 6.6%, यानी करीब ₹238.83 करोड़ ही रिकवर हो पाए हैं।

क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग पर सबसे ज़्यादा सेंध

रिपोर्ट्स साफ इशारा करती हैं कि फ्रॉड करने वाले सबसे ज़्यादा क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग को निशाना बना रहे हैं। अकेले इंटरनेट बैंकिंग के ज़रिए 2,42,562 मामलों में ₹1,730.14 करोड़ का नुकसान हुआ। क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के 2,43,849 मामलों में ₹1,447.27 करोड़ की रकम जा चुकी है। वहीं, डेबिट और एटीएम कार्ड से जुड़े फ्रॉड ने 94,991 मामलों में ₹401.17 करोड़ का चूना लगाया। यह दिखाता है कि पुराने डिजिटल पेमेंट सिस्टम ज़्यादा जोखिम में हैं।

UPI की मजबूती: लाखों ट्रांजैक्शन, पर फ्रॉड न के बराबर

इसके विपरीत, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अपनी सुरक्षा में अव्वल साबित हुआ है। देश भर में करोड़ों ट्रांजैक्शन होने के बावजूद, इसी अवधि में UPI पर केवल 457 फ्रॉड के मामले सामने आए, जिनकी कुल कीमत सिर्फ ₹2.13 करोड़ रही। आधार-एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) ने भी 1,346 मामलों में ₹1.06 करोड़ के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। UPI की यह मज़बूती इसलिए अहम है क्योंकि यह भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट तरीका है, और इसके मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन सिस्टम फ्रॉड को रोकने में कामयाब दिख रहे हैं।

RBI का एक्शन और जागरूकता अभियान

लगातार बढ़ते 'ऑथराइज़्ड पुश पेमेंट' (APP) फ्रॉड, जहाँ लोगों को सोशल इंजीनियरिंग के ज़रिए ठगा जाता है, को देखते हुए रेगुलेटर्स ने कमर कस ली है। अप्रैल 2026 में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस तरह के नुकसान को रोकने के लिए खास सुरक्षा उपायों पर एक डिस्कशन पेपर जारी किया है। RBI, NPCI और बैंकों ने मिलकर ग्राहकों को जागरूक करने के लिए 'e-BAAT' ट्रेनिंग और 'मैं मूर्ख नहीं हूँ' जैसे कैम्पेन चलाए हैं। निवेशक और बैंक ग्राहक आगे चलकर फ्रॉड को ट्रैक करने वाली सेंट्रलाइज्ड मैकेनिज़्म और कड़े वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल पर और अपडेट्स की उम्मीद कर सकते हैं, जो बैंकों के ऑपरेशनल कॉस्ट और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर भरोसा बढ़ा सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.