वितरण में बड़ा गैप, कमजोर देशों की बढ़ती चिंता
विकसित देशों ने क्लाइमेट फाइनेंस का $100 अरब सालाना लक्ष्य लगातार तीसरे साल पार कर लिया है, 2024 में यह राशि $136.7 अरब तक पहुंच गई। लेकिन, फंड के वितरण और उसकी क्वालिटी को लेकर गंभीर मुद्दे बने हुए हैं।
जहां फंड का लक्ष्य पूरा हो गया, वहीं पैसों के बंटवारे में बड़ा अंतर दिखा। जलवायु परिवर्तन से सबसे ज़्यादा प्रभावित गरीब देशों को कुल फंडिंग का महज़ 7% ही मिला। वहीं, प्राइवेट कैपिटल मोबिलाइजेशन 33% बढ़कर $30.5 अरब हो गया, लेकिन इसका ज़्यादातर फायदा मध्यम-आय वाले देशों और मिटिगेशन (शमन) से जुड़े प्रोजेक्ट्स को मिला, न कि एडैप्टेशन (अनुकूलन) की ज़रूरतों को। इससे सवाल उठता है कि क्या मौजूदा वित्तीय प्रवाह सबसे ज़रूरी ज़रूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा कर पा रहा है।
रियायती फंडिंग की जगह कर्ज हावी
OECD की रिपोर्ट से एक बड़ी चिंता यह भी है कि किस तरह का फाइनेंस दिया जा रहा है। कुल पब्लिक क्लाइमेट फाइनेंस का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा लोन (कर्ज) के रूप में है, न कि ग्रांट्स (अनुदान) या रियायती ऋण के रूप में। रियायती द्विपक्षीय ऋण में कमी के साथ इस बदलाव से विकासशील देशों में यह डर बढ़ रहा है कि उन्हें ज़रूरी सपोर्ट के बजाय ज़्यादा कर्ज लेना पड़ रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने इस बात पर जोर दिया है कि कर्ज पर यह फोकस भरोसे को खत्म कर रहा है और जलवायु संबंधी दीर्घकालिक प्रयासों को खतरे में डाल रहा है।
अनुकूलन के लिए फाइनेंस अपर्याप्त
अनुकूलन (Adaptation) के लिए फाइनेंस, जो जलवायु प्रभावों के खिलाफ लचीलापन बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, अभी भी पर्याप्त नहीं है। 2024 में, एडैप्टेशन फाइनेंस पिछले साल की तुलना में थोड़ी बढ़ोतरी के साथ $34.7 अरब तक पहुंच गया। यह 2025 तक एडैप्टेशन फाइनेंस को दोगुना करने की ग्लासगो क्लाइमेट पैक्ट की प्रतिबद्धता से बहुत कम है। विकासशील देशों को आर्थिक बाधाओं और सीमित संस्थागत क्षमता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके लिए एडैप्टेशन फंडिंग बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। संस्थागत क्षमता, डिलीवरी सिस्टम को बेहतर बनाना और ब्लेंडेड फाइनेंस मॉडल का उपयोग करना एडैप्टेशन के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
नए लक्ष्य और पारदर्शिता के उपाय
आगे की राह देखें तो, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का लक्ष्य 2035 तक सालाना कम से कम $1.3 ट्रिलियन का बड़ा वित्तीय लक्ष्य है, जिसमें विकसित देशों से सालाना कम से कम $300 अरब का योगदान अपेक्षित है। भविष्य में फाइनेंसिंग में प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करने के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस और कैटेलिटिक अप्रोच का इस्तेमाल होने की संभावना है। पेरिस समझौते के एन्हांस्ड ट्रांसपेरेंसी फ्रेमवर्क (Enhanced Transparency Framework) के तहत 2024 से क्लाइमेट फाइनेंस रिपोर्टिंग को अपडेट भी किया जाएगा, हालांकि डेटा की उपलब्धता में देरी की आशंका है।
