Debt Funds हुए फेल! सरकारी बॉन्ड यील्ड्स 11 महीने की ऊंचाई पर, क्या करें निवेशक?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Debt Funds हुए फेल! सरकारी बॉन्ड यील्ड्स 11 महीने की ऊंचाई पर, क्या करें निवेशक?
Overview

सरकारी बॉन्ड यील्ड्स (Government Bond Yields) में आई तेज बढ़ोतरी के कारण लंबे समय वाले डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds) उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। यील्ड्स के **11 महीने** के उच्च स्तर पर पहुंचने से बॉन्ड की कीमतों पर दबाव आया है, जिससे इन फंड्स के रिटर्न (Returns) पर असर पड़ा है। एक्सपर्ट्स अब निवेशकों को छोटी से मध्यम अवधि वाले फंड्स (Short- to Medium-Duration Funds) की ओर देखने की सलाह दे रहे हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

क्यों डेट फंड्स दे रहे हैं कम रिटर्न?

पिछले 8 से 9 महीनों में सरकारी सिक्योरिटीज (g-sec) की यील्ड्स में भारी इजाफा हुआ है, जिसने डेट फंड्स, खासकर लंबी अवधि वाले फंड्स के प्रदर्शन पर गहरा असर डाला है। आमतौर पर लंबी अवधि वाले डेट फंड्स से बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जाती है, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 3 सालों में लॉन्ग-ड्यूरेशन फंड्स ने औसतन 7.4% का सालाना रिटर्न दिया है, जबकि g-sec फंड्स 7% पर टिके रहे हैं। यह कई शॉर्ट- से मीडियम-ड्यूरेशन फंड्स के प्रदर्शन से काफी पीछे है।

10-वर्षीय g-sec की यील्ड अप्रैल-मई 2025 के अपने निचले स्तर से लगभग 47 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर अब 11 महीने के शिखर के करीब है। वहीं, 30-वर्षीय g-sec यील्ड्स में 63 बेसिस पॉइंट्स का उछाल आया है और यह 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। यील्ड्स में वृद्धि सीधे तौर पर बॉन्ड की कीमतों में गिरावट का कारण बनती है, जिससे बॉन्डहोल्डर्स के रिटर्न को नुकसान पहुंचता है। यह ट्रेंड रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बावजूद जारी है, जो बाजार के दबाव को दर्शाता है।

यील्ड्स बढ़ने की वजह क्या है?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, सरकारी सिक्योरिटीज की यील्ड्स पर ऊपर की ओर दबाव मुख्य रूप से डिमांड-सप्लाई (Demand-Supply) में असंतुलन के कारण है। सरकारी पेपर्स की सप्लाई तो मजबूत बनी हुई है, लेकिन निवेशकों की मांग कमजोर पड़ गई है। पिछले कुछ महीनों में म्यूचुअल फंड्स और अन्य घरेलू संस्थानों ने बिकवाली की है, जिससे निवेशकों का रुझान उन शॉर्ट-टर्म बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन्स (SDLs) की ओर बढ़ा है जो फिलहाल ज्यादा आकर्षक दरें दे रहे हैं।

इसके अलावा, रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के दखल (Foreign Exchange Interventions) ने भी बाजार की लिक्विडिटी (Liquidity) को कम करने में भूमिका निभाई है। हालांकि, RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMOs), फॉरेक्स स्वैप्स और रेपो ऑक्शन के माध्यम से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लिक्विडिटी इंफ्यूज की है, लेकिन फॉरेक्स इंटरवेंशन से निकली लिक्विडिटी इन प्रयासों को आंशिक रूप से बेअसर कर रही है। सप्लाई की चिंताएं तब और बढ़ जाती हैं जब राज्य सरकारों ने बड़े पैमाने पर उधार लेने की योजनाएं घोषित की हैं, और अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए और भी भारी इश्यू (Issuance) की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

एक्सपर्ट्स निवेशकों को अपनी फिक्स्ड-इनकम स्ट्रैटेजी (Fixed-Income Strategy) पर पुनर्विचार करने की सलाह दे रहे हैं। वर्तमान में, लंबी अवधि के निवेशों के लिए रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो (Risk-Reward Ratio) आकर्षक नहीं माना जा रहा है। इसके बजाय, छोटी अवधि के निवेश क्षितिज (Shorter Investment Horizons) को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा रही है। कोर एलोकेशन के लिए शॉर्ट-टर्म फंड्स, कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स (Corporate Bond Funds), या बैंकिंग और PSU डेट फंड्स जैसे उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बेहतर टैक्स एफिशिएंसी (Tax Efficiency) के लिए इनकम-प्लस-आर्बिट्राज फंड ऑफ फंड्स (Income-Plus-Arbitrage Fund of Funds) का भी सुझाव दिया गया है।

बाजार का सेंटिमेंट (Sentiment) यह संकेत दे रहा है कि निवेशक आक्रामक ड्यूरेशन दांव (Aggressive Duration Bets) के बजाय आकर्षक यील्ड्स से स्थिर रिटर्न को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के अंतर्निहित आर्थिक फंडामेंटल्स (Economic Fundamentals) मजबूत बने हुए हैं, जिसमें मजबूत ग्रोथ अनुमान और नियंत्रित महंगाई शामिल है, लेकिन इन सकारात्मक कारकों पर फिलहाल लिक्विडिटी संबंधी चिंताएं और भारी कर्ज की सप्लाई हावी है, जो निवेशकों को ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स की ओर धकेल रहे हैं जिनमें इंटरेस्ट रेट सेंसिटिविटी (Interest Rate Sensitivity) कम हो।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.