भारत के DGFT (Directorate General of Foreign Trade) ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बने आयातित सामानों की जांच होगी और ज़रूरत पड़ने पर उन पर रोक भी लगाई जा सकती है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार की चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया गया है, खासकर अमेरिका की तरफ से हो रही जांच को देखते हुए।
क्या हैं नए नियम?
DGFT ने फॉरेन ट्रेड पॉलिसी 2023 में बदलाव करते हुए एक नया ढांचा तैयार किया है। इसके तहत, अब भारत में आने वाले उन सामानों की बाकायदा जांच की जाएगी जिनके बारे में शक है कि वे जबरन मजदूरी से बनाए गए हैं। 13 जुलाई, 2026 के पब्लिक नोटिस के अनुसार, सरकार यह पता लगाएगी कि भारतीय बाज़ार में आने वाले उत्पाद अनैतिक श्रम परिस्थितियों में तो नहीं बने हैं।
जांच का तरीका और अधिकार
DGFT खुद पहल करके या किसी पुख्ता शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर सकता है। इस अधिकार के तहत, DGFT आयातकों, निर्यातकों और सप्लाई चेन से जुड़े निर्माताओं से जरूरी दस्तावेज और सबूत मांग सकता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए, DGFT को विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करने और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सलाह लेने की भी इजाज़त होगी।
अगर जांच में पाया जाता है कि आयातित सामानों के उत्पादन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल हुआ है, तो DGFT उन सामानों पर पूरी तरह से रोक लगाने की सिफारिश कर सकता है। यह रोक फॉरेन ट्रेड (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1992 के तहत लगाई जाएगी। यह कदम सरकार को अनैतिक व्यापारिक प्रथाओं पर लगाम लगाने का एक स्पष्ट कानूनी रास्ता देता है।
वैश्विक व्यापार पर असर
यह नीतिगत बदलाव तब आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनावों का सामना कर रहा है। हाल ही में, यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने कई देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, से होने वाले आयात पर 12.5% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया था। इसका कारण जबरन मजदूरी से बने सामानों को प्रभावी ढंग से न रोक पाना बताया गया था। भारत ने पहले भी इन प्रस्तावों को चुनौती दी थी और कहा था कि उसके मौजूदा कानूनी ढांचे इन मुद्दों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, और अमेरिका के पास देश-विशिष्ट व्यापार दंड के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है।
इन जांच नियमों को औपचारिक बनाकर, भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहा है। निवेशकों और व्यवसायों के लिए, यह विकास सप्लाई चेन की ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) की ओर एक सख्त कदम को दर्शाता है। उन कंपनियों को, जो भारी मात्रा में आयात पर निर्भर हैं, अपनी कंप्लायंस (Compliance) निगरानी को और मजबूत करना पड़ सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी सप्लाई चेन जबरन मजदूरी के आरोपों से मुक्त रहे। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में आयात पर अचानक रोक या प्रशासनिक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि DGFT इन नई जांचों को कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से करता है। भविष्य में DGFT जांच के लिए किन सामानों को चुनेगा और इन संभावित प्रतिबंधों का विशिष्ट कमोडिटी (Commodity) आयात पर क्या असर पड़ेगा, यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
