DGFT, यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड, ₹10,000 तक के एक्सपोर्ट कंसाइनमेंट के लिए RCMC की अनिवार्यता को खत्म करने का प्रस्ताव ला रहा है। इसका मकसद छोटे कारोबारियों (MSMEs) के लिए नियमों को सरल बनाना और ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है। सरकार इस बदलाव पर इंडस्ट्री से फीडबैक मांग रही है।
Detailed Coverage
छोटे निर्यातकों को बड़ी राहत
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने निर्यात प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। प्रस्ताव के तहत, अब ₹10,000 या उससे कम मूल्य के निर्यात शिपमेंट के लिए RCMC (Registration-cum-Membership Certificate) की ज़रूरत नहीं होगी। फिलहाल, सरकार से मिलने वाले इंसेंटिव और पॉलिसी लाभों के लिए निर्यातकों को यह सर्टिफिकेट बनवाना पड़ता है। इस नए बदलाव से छोटे कारोबारियों का अनुपालन बोझ कम होने की उम्मीद है।
MSMEs और ई-कॉमर्स को फायदा
यह नीतिगत बदलाव खासकर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs), कारीगरों और उन छोटे विक्रेताओं के लिए लाया जा रहा है जो कूरियर, पोस्ट या ई-कॉमर्स के ज़रिए विदेश में सामान बेचते हैं। कई छोटे व्यापारियों के लिए RCMC बनवाना एक झंझट भरा काम होता है, जिससे वे समय पर अपने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट नहीं कर पाते। इस नियम के हटने से उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा नए निर्यातक ग्लोबल ट्रेड में शामिल हो पाएंगे।
हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि प्रतिबंधित (restricted) ITC (HS) क्लासिफिकेशन के तहत आने वाले आइटम्स पर यह छूट लागू नहीं होगी। अगर शिपमेंट का मूल्य ₹10,000 के अंदर भी है, तो भी प्रतिबंधित सामानों के लिए अन्य सभी ट्रेड नियमों और सुरक्षा जांचों का पालन करना अनिवार्य होगा।
आगे क्या?
DGFT ने इंडस्ट्री से इस प्रस्ताव पर अगले 10 दिनों के अंदर अपनी राय देने के लिए कहा है। इस फीडबैक प्रक्रिया से यह समझने में मदद मिलेगी कि इसे लागू करने में क्या चुनौतियाँ आ सकती हैं, जैसे कि कस्टम अथॉरिटी इन शिपमेंट के मूल्य का सत्यापन कैसे करेगी ताकि इस छूट का गलत इस्तेमाल न हो। लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट से जुड़े लोगों को DGFT की अंतिम नोटिफिकेशन पर नज़र रखनी चाहिए, जिसमें इस छूट के परिचालन संबंधी नियम स्पष्ट किए जाएंगे।
