कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: क्या RBI रोकेगा ब्‍याज दरें बढ़ाना?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: क्या RBI रोकेगा ब्‍याज दरें बढ़ाना?

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

कच्चे तेल की गिरती कीमतों से भारत को महंगाई (Inflation) और रुपये (Rupee) को लेकर बड़ी राहत मिली है। लेकिन, एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है कि ब्‍याज दरें (Interest Rates) अब बढ़ेंगी या नहीं। खाने-पीने की चीजों के बढ़ते दाम और मॉनसून को देखते हुए, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) साल के अंत में ब्‍याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। अब देखना यह है कि क्या तेल की यह चाल RBI की पॉलिसी को बदल पाएगी।

क्या हुआ?

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हाल ही में बड़ी गिरावट आई है। भारत जैसे देश के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि हम अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात (Import) करते हैं। सस्ते तेल से आयात बिल कम होता है, भारतीय रुपये (Indian Rupee) को सहारा मिलता है और महंगाई (Inflation) पर दबाव कम होता है। हालांकि, यह एक अच्छी खबर ज़रूर है, लेकिन इकोनॉमिस्ट्स (Economists) इस बात पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं कि इससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्‍याज दरें (Interest Rates) बढ़ाना बंद कर देगा।

निवेशकों के लिए क्यों ज़रूरी?

निवेशकों (Investors) के लिए RBI के ब्‍याज दरों पर फैसले बहुत मायने रखते हैं। जब सेंट्रल बैंक दरें बढ़ाता है, तो कंपनियों और आम लोगों के लिए लोन लेना महंगा हो जाता है। इससे बिज़नेस और क्रेडिट ग्रोथ धीमी हो सकती है। सस्ता तेल आमतौर पर इकोनॉमी को राहत देता है, लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई और मौसम (Weather) की वजह से सप्लाई में गड़बड़ी जैसे खतरे अभी भी बने हुए हैं। अगर ये खतरे बने रहे, तो RBI को महंगाई को अपने कंफर्ट लेवल तक लाने के लिए ब्‍याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं।

ब्‍याज दरों पर एक्सपर्ट्स की राय?

कई बड़े फाइनेंसियल संस्थानों के इकोनॉमिस्ट्स (Economists) की राय अलग-अलग है कि RBI आगे क्या करेगा। Deutsche Bank, ANZ Research और Kotak Mahindra Bank जैसे संस्थानों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेंट्रल बैंक इस साल के अंत में ब्‍याज दरें बढ़ा सकता है। वे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में अनिश्चितता, मॉनसून (Monsoon) के संभावित असर और दूसरे खर्चों को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। अगस्त, अक्टूबर या दिसंबर में रेट हाइक (Rate Hike) की संभावनाओं पर अभी भी चर्चा चल रही है।

दूसरी ओर, कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) की राय अलग है। Yes Bank के एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालिया महंगाई के आंकड़े सेंट्रल बैंक के अनुमान से कम हैं। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने जोखिम को कम कर दिया है, और वे आने वाले महीनों में भी ब्‍याज दरें बढ़ने की उम्मीद नहीं कर रहे हैं।

रुपया और ट्रेड बैलेंस (Trade Balance)

इकोनॉमिस्ट्स (Economists) आम तौर पर इस बात पर सहमत हैं कि तेल की कम कीमतों से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) में सुधार होगा। यह भारत की कमाई और आयात के बीच का अंतर है। अगर तेल की कीमतें $85 प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो ट्रेड गैप (Trade Gap) काफी कम हो सकता है। इससे रुपये (Rupee) को सहारा मिलेगा और वह स्थिर रह सकता है या उसमें मजबूती आ सकती है। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI इस स्थिरता का इस्तेमाल अपनी फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) को मजबूत करने के लिए कर सकता है, न कि रुपये को बहुत तेज़ी से ऊपर जाने देने के लिए।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आने वाले महीनों में निवेशकों (Investors) को कुछ ज़रूरी बातों पर नज़र रखनी चाहिए। सबसे पहले, खाने-पीने की चीजों की महंगाई (Food Inflation) के आंकड़ों पर ध्यान दें, क्योंकि यह अभी RBI की मुख्य चिंता है। दूसरे, मॉनसून (Monsoon) का कैसा असर रहता है, यह बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर खेती और खाद्य कीमतों को प्रभावित करता है। आखिर में, RBI की पॉलिसी मीटिंग्स (Policy Meetings) से आने वाले आधिकारिक बयान और मिनट्स (Minutes) इस बात का सबसे स्पष्ट संकेत देंगे कि सेंट्रल बैंक तेल की कीमतों में आई इस गिरावट को रेट हाइक (Rate Hike) रोकने की वजह मानता है या सावधानी भरा रवैया जारी रखेगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.