क्रिटिकल मिनरल्स की जंग: चीन के दबदबे को टक्कर देने दुनिया एकजुट, सप्लाई चेन पर बड़ा दांव

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AuthorAditya Rao|Published at:
क्रिटिकल मिनरल्स की जंग: चीन के दबदबे को टक्कर देने दुनिया एकजुट, सप्लाई चेन पर बड़ा दांव
Overview

वॉशिंगटन में हुई पहली क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल मीटिंग ने इस बात का साफ संकेत दिया है कि दुनिया चीन के क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) पर बढ़ते दबदबे को कम करने के लिए कमर कस चुकी है। बीजिंग दुनिया के **95%** क्रिटिकल मिनरल्स के प्रोडक्शन और रिफाइनिंग को कंट्रोल करता है, जिसके चलते अब **50 से ज़्यादा** देश अपनी सप्लाई चेन को डी-रिस्क (De-risk) करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

नई भू-राजनीतिक सरहद

वॉशिंगटन में हुई क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टेरियल मीटिंग सिर्फ एक सहयोग का मंच नहीं थी, बल्कि इसने वैश्विक आर्थिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। यह मीटिंग इस बात का साफ संकेत है कि अब दुनिया के लिए अहम संसाधनों - जैसे कि रेयर अर्थ्स (Rare Earths) और बैटरी मेटल्स (Battery Metals) - तक पहुंच और उनका नियंत्रण एक नई भू-राजनीतिक लड़ाई का मैदान बन गया है। चीन का दुनिया के 95% क्रिटिकल मिनरल्स के प्रोडक्शन और रिफाइनिंग क्षमता पर कब्जा है, जिसने 50 से भी ज़्यादा देशों को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है। यह दबदबा अब केवल आर्थिक असंतुलन नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका इस्तेमाल भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।

सप्लाई चेन को डी-रिस्क करना: एक वैश्विक ज़रूरत

भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 'अत्यधिक केंद्रीकरण' (Excessive Concentration) की चुनौती का जिक्र किया और स्ट्रक्चर्ड इंटरनेशनल कोलैबोरेशन (Structured International Collaboration) के ज़रिए सप्लाई चेन को डी-रिस्क (De-risk) करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। भारत ने जनवरी 2025 में ही करीब ₹4 बिलियन (USD 4 Billion) के बजट के साथ 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन' (National Critical Minerals Mission) लॉन्च किया है, जिसका मकसद देश में मिनरल्स की खोज और विदेशों में एसेट्स (Assets) हासिल करना है। इसी तरह, भारत और साउथ कोरिया जैसे देशों के समर्थन वाले अमेरिका के नेतृत्व वाले FORGE इनिशिएटिव (Initiative) का लक्ष्य डिफेंस (Defense), AI और एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) के लिए ज़रूरी मिनरल्स की मजबूत और डायवर्सिफाइड (Diversified) सप्लाई चेन बनाना है। यह पहल चीन द्वारा मार्च 2025 की शुरुआत में लगाए गए रेयर अर्थ्स एक्सपोर्ट कर्ब्स (Rare Earths Export Curbs) जैसी पिछली घटनाओं के जवाब में आई है, जिन्होंने एक अकेले सप्लायर पर निर्भरता की नाजुकता को उजागर किया था। क्रिटिकल मिनरल्स का व्यापक बाज़ार 2022 में $320 बिलियन का था और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) व रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) से बढ़ती मांग के चलते 2030 तक $494 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान है।

रिसोर्स रेस में कंपनियों का भविष्य

इस बढ़ती रिसोर्स सिक्योरिटी (Resource Security) की रेस ने कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (Investment Strategy) को भी बदल दिया है। सप्लाई चेन में शुरुआत में मौजूद कंपनियों में दिलचस्पी बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, Sibanye Stillwater (SBSW), जो प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals), लिथियम (Lithium) और कॉपर (Copper) में डील करती है, उसे एनालिस्ट्स (Analysts) से 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग मिली है और वे इसके EPS ग्रोथ (EPS Growth) में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। Sociedad Química y Minera de Chile (SQM), एक बड़ी लिथियम प्रोड्यूसर (Producer), ने मजबूत मांग और अपने लो-कॉस्ट ऑपरेशनल प्रोफाइल (Low-Cost Operational Profile) का फायदा उठाते हुए अपने शेयर्स में उछाल देखा है, और एनालिस्ट्स इसके रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) में ज़बरदस्त बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं। वहीं, MP Materials, जो अमेरिका की एक प्रमुख रेयर अर्थ्स प्रोड्यूसर है, सरकारी पार्टनरशिप (Partnerships) और डिमांड गारंटी (Demand Guarantees) के बाद स्टॉक में भारी तेज़ी देखी है, और इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) 2026 की शुरुआत तक अनुमानित $10 बिलियन तक पहुँच चुकी है। क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर एक सुपरसाइकिल (Supercycle) के कगार पर है, जो गिरती ब्याज दरों (Interest Rates), बेहतर ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ (Global Economic Growth) और क्लीन एनर्जी (Clean Energy) व AI से बढ़ती मांग से प्रेरित है। सेक्टर-स्पेसिफिक ETFs (Exchange Traded Funds), जैसे Sprott Critical Materials ETF (SETM), इस ट्रेंड में डाइवर्सिफाइड एक्सपोजर (Diversified Exposure) प्रदान करते हैं।

रणनीतिक कमजोरियां और भविष्य का नज़रिया

क्रिटिकल मिनरल्स के लिए चल रही यह होड़ जोखिमों से खाली नहीं है। चीन का प्रोसेसिंग (Processing) और रिफाइनिंग (Refining) में दबदबा अहम सप्लाई चेन चोक पॉइंट्स (Choke Points) पैदा करता है। अमेरिका जैसे देश डोमेस्टिक कैपेसिटी (Domestic Capacity) में भारी निवेश कर रहे हैं और नए अलायंस (Alliances) बना रहे हैं, लेकिन चीन के स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और लागत लाभ की बराबरी करना अभी भी एक चुनौती है। उदाहरण के लिए, अमेरिका अभी भी कई क्रिटिकल मिनरल्स के लिए 50% से ज़्यादा आयात पर निर्भर है, और 12 ऐसे मिनरल्स हैं जो पूरी तरह से बाहर से मंगाए जाते हैं। इसके भू-राजनीतिक मायने बहुत बड़े हैं: इन मैटेरियल्स (Materials) पर नियंत्रण सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा क्षमताओं और तकनीकी प्रगति को प्रभावित करता है। जैसे-जैसे देश इन रिसोर्सेज (Resources) को सुरक्षित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं, बाज़ार को बढ़ी हुई वोलैटिलिटी (Volatility), रणनीतिक निवेश और वैश्विक व्यापार निर्भरताओं में लगातार पुनर्गठन की उम्मीद करनी चाहिए। लंबी अवधि का आउटलुक (Outlook) लंबी प्रतिस्पर्धा का है, जहाँ रणनीतिक रिसोर्स कंट्रोल (Strategic Resource Control) किसी भी पारंपरिक सैन्य या आर्थिक शक्ति जितना ही महत्वपूर्ण होगा।

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