भारत को ₹14 लाख करोड़ का झटका! जंग (Corrosion) पर हर साल भारी नुकसान: नोमुरा की रिपोर्ट

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारत को ₹14 लाख करोड़ का झटका! जंग (Corrosion) पर हर साल भारी नुकसान: नोमुरा की रिपोर्ट

देश के लिए एक बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। एक नई नोमुरा (Nomura) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जंग (Corrosion) के कारण हर साल करीब ₹14 लाख करोड़ का भारी नुकसान होता है। यह देश के ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का **4.3%** है। इसका सीधा असर पावर, रेलवे और ब्रिज जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ रहा है।

Detailed Coverage

इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक नुकसान

नोमुरा की रिपोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि जंग लगने की वजह से देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों पर गहरा असर पड़ रहा है। पावर सेक्टर, जिसमें ट्रांसमिशन ग्रिड भी शामिल हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। लगातार बाहरी वातावरण के संपर्क में रहने वाले इन इंफ्रास्ट्रक्चर को बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है। इससे सरकार और निजी कंपनियों के लिए ऑपरेशनल खर्चे बढ़ जाते हैं और सुरक्षा को लेकर भी जोखिम पैदा होते हैं। सीधे आर्थिक नुकसान के अलावा, जंग लगने से इन संपत्तियों की कुल उत्पादकता कम हो जाती है, जिससे उनकी उम्र घट जाती है और उन्हें जल्दी बदलना पड़ता है।

मानकों में भिन्नता

रिपोर्ट अमेरिका (US) और जापान (Japan) जैसे विकसित देशों के साथ भारत के मानकों की तुलना करती है। उन देशों में, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को उनके पर्यावरण के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है, जैसे कि ज्यादा नमी या खारे पानी के तटीय इलाके, और उसी हिसाब से सुरक्षा उपाय अनिवार्य होते हैं। इसके विपरीत, भारत में अक्सर अलग-अलग इलाकों के लिए एक जैसे मानक अपनाए जाते हैं। यह तरीका मानसून के दौरान की कठोर परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखता, जहां अत्यधिक नमी से स्टील और धातु की संरचनाएं तेजी से खराब होती हैं।

आर्थिक विकास की संभावना

इस समस्या का समाधान निकालने में देश के लिए एक बड़ी आर्थिक संभावना छिपी है। रिपोर्ट का कहना है कि अगर भारत आधुनिक जंग-रोधी सुरक्षा रणनीतियों को अपनाता है, तो देश की GDP 1.5% तक बढ़ सकती है। जिंक कोटिंग्स (Zinc coatings), एपॉक्सी एप्लीकेशन्स (epoxy applications) या वेदरिंग स्टील (weathering steel) जैसे प्रभावी उपायों से लगातार मरम्मत की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (Bureau of Indian Standards) के पास गाइडलाइन्स हैं, पर रिपोर्ट के अनुसार उनमें जरूरी स्पष्टता की कमी है, जिससे अक्सर ठेकेदार न्यूनतम सुरक्षा उपायों को चुनते हैं जो लंबे समय तक टिके रहने की गारंटी नहीं देते।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

बाजार और निवेशकों के लिए, सरकार की नीतियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर खरीद के संबंध में अपने अनिवार्य मानकों को अपडेट करती है। वैश्विक सुरक्षा बेंचमार्क (global protection benchmarks) की ओर बढ़ना उन कंपनियों के लिए लंबे समय के अवसर पैदा कर सकता है जो हाई-परफॉर्मेंस कोटिंग्स (high-performance coatings) और मैटेरियल्स में विशेषज्ञता रखती हैं। साथ ही, इससे इंफ्रास्ट्रक्चर-हैवी कंपनियों और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ भी कम हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.