ग्लोबल ट्रेड पर बड़ा संकट: युद्ध और सूखे का डबल अटैक, महंगाई बढ़ने का डर

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AuthorMehul Desai|Published at:
ग्लोबल ट्रेड पर बड़ा संकट: युद्ध और सूखे का डबल अटैक, महंगाई बढ़ने का डर
Overview

दुनियाभर के शिपिंग रूट्स पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के कारण प्रमुख 'चोकपॉइंट्स' जैसे हॉर्मुज, स्वेज और पनामा नहरों पर भारी दबाव है। इससे माल की सप्लाई (Supply) में भारी देरी हो रही है, शिपिंग लागत (Shipping cost) आसमान छू रही है और दुनिया भर में महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।

हॉजपॉच में ग्लोबल सप्लाई चेन!

दुनियाभर का 80% से ज्यादा मर्चेंडाइज ट्रेड (Merchandise trade) जिन समुद्री रास्तों से होता है, वे आज भयंकर संकट में हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), स्वेज नहर (Suez Canal) और पनामा नहर (Panama Canal) जैसे अहम 'चोकपॉइंट्स' पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और लगातार जलवायु परिवर्तन की मार पड़ रही है। इस दोहरी मार के कारण सप्लाई चेन (Supply Chain) में बड़ी दिक्कतें आ रही हैं, लागत बढ़ रही है और दुनिया भर में माल की आवाजाही बाधित हो रही है।

युद्ध ने रोका जहाजों का रास्ता!

खासकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई का जरिया है, उसमें फरवरी 2026 के अंत से संघर्ष के कारण 90-95% तक ट्रैफिक घट गया है। इसके चलते बड़े शिपिंग प्लेयर्स को सेवाएं रोकनी पड़ी हैं। इसका सीधा असर ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतों पर दिखा, जो $113 प्रति बैरल के पार चला गया, जो कि संघर्ष-पूर्व स्तरों से 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी है। वहीं, स्वेज नहर, जिससे दुनिया का 12-15% ट्रेड होता है, के पास बढ़ी दिक्कतों ने जहाजों को अफ्रीका के चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया है। इस रूट बदलने से ट्रांजिट टाइम 30-50% तक बढ़ रहा है और प्रति ट्रिप $1 मिलियन ज्यादा का खर्च आ रहा है। लाल सागर (Red Sea) से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर-रिस्क प्रीमियम (War-risk premiums) में भी भारी उछाल आया है, जो 1-2% तक पहुंच गया है।

सूखे की मार, पनामा नहर में पानी की कमी

दूसरी ओर, पनामा नहर लंबे समय से सूखे की मार झेल रही है। पानी की भारी कमी के कारण नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है, जिससे भारी कंजेशन (Congestion) और तेज गुजरने के लिए फीस में बढ़ोतरी हुई है। इन सब दिक्कतों का कंबाइंड असर यह हुआ है कि फ्रेट रेट्स (Freight rates) आसमान पर पहुंच गए हैं। जुलाई 2024 तक, ड्र्यूरी वर्ल्ड कंटेनर इंडेक्स (Drewry World Container Index - WCI) ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 300% की बढ़ोतरी दर्ज की। शंघाई से जेबेल अली जैसे रूटों की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं।

वैश्विक महंगाई को मिल रही हवा

यह सिर्फ लॉजिस्टिक की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक महंगाई (Global inflation) को बढ़ाने वाला बड़ा फैक्टर है। जे.पी. मॉर्गन रिसर्च (J.P. Morgan Research) का अनुमान है कि अकेले लाल सागर की दिक्कतों से 2024 की पहली छमाही में ग्लोबल कोर गुड्स इन्फ्लेशन (Global core goods inflation) में 0.7 प्रतिशत पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। हॉर्मुज संकट से बढ़ा एनर्जी का महंगा होना, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट और कंज्यूमर गुड्स की लागत बढ़ा रहा है। लम्बे ट्रांजिट टाइम और रूट बदलने के कारण शिपिंग कैपेसिटी सीमित हो गई है, जिससे कंटेनर की कमी हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। इन चोकपॉइंट्स के कारण अनुमानित वार्षिक आर्थिक नुकसान (Economic losses), जिसमें बढ़ी हुई फ्रेट कॉस्ट शामिल है, $14 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

इतिहास और भविष्य का डर

ऐसे चोकपॉइंट्स की भेद्यता (Vulnerability) कोई नई बात नहीं है। 2021 में स्वेज नहर में एवर गिवन (Ever Given) जहाज के फंसने से प्रति मिनट $6.7 मिलियन का नुकसान हुआ था और कुल मिलाकर €2 बिलियन से €2.5 बिलियन का आर्थिक नुकसान हुआ था। 20वीं सदी के मध्य में स्वेज नहर के बंद होने से भी ट्रेड में बड़े बदलाव और लागत में बढ़ोतरी हुई थी। हॉर्मुज की मौजूदा स्थिति अतीत के तनावों की याद दिलाती है, जिन्होंने तेल की कीमतों को भड़काया था। नॉर्दर्न सी रूट (Northern Sea Route) जैसे वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन वे अत्यधिक जलवायु अनिश्चितताओं और जमी हुई जगहों से गुजरते हैं। मेक्सिको का तेहुआंटेपेक इंटरओशनिक कॉरिडोर (Tehuantepec Interoceanic Corridor) जैसे नए लैंड प्रोजेक्ट्स संभावनाएं देते हैं, लेकिन वे मौजूदा जलमार्गों की वॉल्यूम को संभाल नहीं सकते।

बढ़ते जोखिम, सप्लाई चेन की कमजोरियां

आज का माहौल ग्लोबल लॉजिस्टिक्स के लिए एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' (Perfect storm) है। इन जोखिमों का आपस में जुड़ा होना यह सुनिश्चित करता है कि एक जगह की दिक्कतें सप्लाई चेन में दूरगामी प्रभाव डाल सकती हैं। अनुमान है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता (Geopolitical instability) के कारण 2025 में ग्लोबल सप्लाई चेन को $1 ट्रिलियन से ज्यादा का नुकसान होगा। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने न केवल तेल की सप्लाई को प्रभावित किया है, बल्कि बंकर फ्यूल की कीमतों को भी बढ़ा दिया है, जिससे कुल मिलाकर फ्रेट रेट्स बढ़ गए हैं। विवादित जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम (Insurance premiums) में बढ़ोतरी भी उन लागतों में जुड़ जाती है, जिनका भुगतान अंततः उपभोक्ता करते हैं। इसके अलावा, स्केलेबल विकल्पों की कमी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था इन कुछ असुरक्षित मार्गों पर बहुत अधिक निर्भर है, जिससे गलती की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। इन सब कारकों का मिश्रण बताता है कि शिपिंग की उच्च लागत और सप्लाई चेन की अस्थिरता लंबे समय तक जारी रह सकती है, जिससे 'जस्ट-इन-टाइम' डिलीवरी पर निर्भर उद्योगों को चुनौती मिलेगी और महंगाई बढ़ती रहेगी।

आगे क्या: ट्रेड में रेजिलिएंस (Resilience) का निर्माण

विश्लेषकों का सुझाव है कि लाल सागर का मुद्दा एक 'न्यू नॉर्मल' (New normal) बनता जा रहा है, जहां कुछ रूटों पर लंबी ट्रांजिट टाइम को आंशिक रूप से कम करने के लिए फ्लीट ओवरकैपेसिटी (Fleet overcapacity) काम करना शुरू कर रही है। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड की अंतर-कनेक्टिविटी (Interconnectedness) का मतलब है कि किसी भी प्रमुख चोकपॉइंट में रुकावट तेजी से दुनिया भर के देशों को प्रभावित कर सकती है, जो मैन्युफैक्चरिंग से लेकर उपभोक्ता कीमतों तक सब कुछ प्रभावित कर सकती है। रेजिलिएंस बनाने के लिए एक बहुस्तरीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें आपातकालीन स्टॉकपाइल (Emergency stockpiles), सप्लाई चेन का विविधीकरण (Diversification), बेहतर सुरक्षा और गंभीर व्यवधानों के लिए नए बीमा उत्पाद शामिल हो सकते हैं। इन महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को स्थिर और सुरक्षित रखना वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके लिए सभी हितधारकों से सक्रिय जोखिम मूल्यांकन (Risk assessment) और रणनीतिक अनुकूलन (Strategic adaptation) की आवश्यकता होगी।

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