महिला उद्यमियों की बल्ले-बल्ले! क्लीन एनर्जी से चमकी किस्मत, बिजनेस में आई बंपर ग्रोथ

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
महिला उद्यमियों की बल्ले-बल्ले! क्लीन एनर्जी से चमकी किस्मत, बिजनेस में आई बंपर ग्रोथ
Overview

भारत की लाखों महिलाएं, जो छोटे-मोटे बिजनेस (Micro and Small Enterprises) चलाती हैं, आज क्लीन एनर्जी की मदद से अपनी आमदनी में भारी उछाल और बिजनेस ऑपरेशंस में जबरदस्त सुधार देख रही हैं। सोलर पावर ने काम के घंटों को बढ़ाया है और लागत कम की है, जिससे ऑर्डर टाइम पर पूरे हो रहे हैं और बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है।

'विकसित भारत' के सपने में महिलाओं का बढ़ता योगदान

भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना एक अहम हिस्सा है। देश भर में छोटे और मध्यम स्तर के लाखों महिला उद्यमी, जिनके लिए बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की कमी हमेशा से ग्रोथ में एक बड़ी बाधा रही है, अब डिसेंट्रलाइज्ड क्लीन एनर्जी सॉल्यूशंस की मदद से अपने बिजनेस को बदल रही हैं। यह न केवल व्यक्तिगत व्यवसायों के लिए वरदान साबित हो रहा है, बल्कि देश की आर्थिक मजबूती और पर्यावरण लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद कर रहा है।

प्रोडक्शन में आई तेजी, आय में भारी इजाफा

ग्रामीण भारत की महिला उद्यमी अब ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए सोलर पावर का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक फायदा हो रहा है। पहले बिजली कटौती के कारण काम के घंटे सीमित थे, ऑपरेशनल कॉस्ट ज्यादा आती थी और प्रोडक्शन भी कम होता था। लेकिन अब भरोसेमंद सोलर एनर्जी से यूनिट्स ज्यादा समय तक और लगातार चल सकती हैं। कुछ उद्यमी अपनी मासिक आय में ₹7,000 से ₹8,000 तक का इजाफा देख रही हैं, वहीं कुछ की दैनिक आय 40% तक बढ़ी है। इस बढ़ी हुई प्रोडक्टिविटी से ग्राहक संतुष्टि और बिजनेस का विस्तार आसान हो गया है। यह क्लीन एनर्जी का एक्सेस उनके लिए एक अहम बिजनेस एसेट बन गया है। याद दिला दें, भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल एनर्जी कैपेसिटी हासिल करना है, जो रिन्यूएबल एनर्जी के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

फाइनेंस तक पहुंच अभी भी बड़ी रुकावट

बाजार में डिमांड होने और बिजनेस चलाने की क्षमता होने के बावजूद, लगभग 80% महिला-नेतृत्व वाले उद्यम आज भी छोटे स्तर और कम रिटर्न वाले सेक्टरों में फंसे हुए हैं। इसकी मुख्य वजह फाइनेंस तक पहुंच की भारी कमी है। ग्लोबली, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए क्रेडिट गैप (लोन मिलने में अंतर) लगभग $1.7 ट्रिलियन का है। भारत में यह समस्या और भी गंभीर है, जहाँ करीब 90% महिला उद्यमी कभी भी फॉर्मल फाइनेंस तक नहीं पहुंच पाई हैं। इनके सामने कोलेटरल (गिरवी रखने लायक संपत्ति) की कमी, क्रेडिट हिस्ट्री का पतला होना, सामाजिक बाधाएं और ऐसे फाइनेंसियल प्रोडक्ट्स का न होना जो उनकी खास जरूरतों को पूरा कर सकें, जैसी दिक्कतें हैं। यहां तक कि जिन व्यवसायों का आर्थिक और पर्यावरणीय रिटर्न अच्छा है, उन्हें भी क्लाइमेट फाइनेंस जैसी चीजों का लाभ मुश्किल से मिलता है। वर्तमान में भारत में महिलाओं की कार्यबल में हिस्सेदारी की दर लगभग 23-24% है, जो यह दिखाता है कि एक बड़ा आर्थिक वर्ग अभी भी पूरी तरह से सक्रिय नहीं हो पाया है।

मिलकर काम करने से बनेगा समाधान

जमीनी स्तर पर चल रही पहलों से यह साफ हो रहा है कि क्लीन एनर्जी के एक्सेस को फाइनेंस और एंटरप्राइज सपोर्ट के साथ जोड़ने पर तुरंत और मापे जा सकने वाले परिणाम मिलते हैं। उत्तर प्रदेश की 'डिसेंट्रलाइज्ड एनर्जी फॉर वुमेन्स इकोनॉमिक एम्पावरमेंट-DEWEE' जैसी पहल, जिसे स्थानीय संस्थानों और डेवलपमेंट पार्टनर्स का सपोर्ट मिला है, क्लीन एनर्जी के डिप्लॉयमेंट को आजीविका सशक्तिकरण और जेंडर-रेस्पॉन्सिव फाइनेंसिंग के साथ जोड़ती है। इस मॉडल को भारत सरकार के इकोनॉमिक सर्वे में भी सराहा गया है, जो इसकी प्रभावशीलता और राष्ट्रीय नीति के लिए इसकी प्रासंगिकता को उजागर करता है। ऐसे कम्युनिटी-बेस्ड प्लेटफॉर्म, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ऊर्जा की विश्वसनीयता, बिजनेस की प्रोडक्टिविटी और रोजगार सृजन जैसी समस्याओं को एक साथ हल करने का रास्ता दिखाते हैं। बैंकों, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों और क्लाइमेट फंड्स के बीच सहयोग, कर्ज के जोखिम को कम करने, पूंजी लागत घटाने और वित्तीय पहुंच का विस्तार करने के लिए महत्वपूर्ण है। पब्लिक-प्राइवेट-फिलेंथ्रोपिक पार्टनरशिप (सार्वजनिक-निजी-परोपकारी साझेदारी) भी व्यवहार्यता दिखाकर लोन को डी-रिस्क कर सकती है और काम को बड़े पैमाने पर बढ़ा सकती है।

अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

महिलाओं के उद्यमिता की पूरी क्षमता को अनलॉक करने से भारत की जीडीपी में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। अनुमान है कि 2025 तक $700 बिलियन तक की वृद्धि संभव है। यह केवल एक सामाजिक उद्देश्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, लचीलापन और 'विकसित भारत' विजन को प्राप्त करने का एक मुख्य चालक है। फाइनेंस, डिसेंट्रलाइज्ड क्लीन एनर्जी और एंटरप्राइज सपोर्ट को मौजूदा राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से रणनीतिक रूप से जोड़कर, भारत अधिक समावेशी, लचीला और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे सकता है। ये समाधान सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनसे ठोस लाभ मिल रहे हैं और राष्ट्रीय प्रगति को गति देने का एक स्पष्ट अवसर पैदा हो रहा है।

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