एक्सपोर्ट्स रॉकेट पर, पर अंदर मांग फेल!
चीन की इकोनॉमी में अप्रैल में एक मिला-जुला असर दिखा। AI में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की वजह से एक्सपोर्ट्स (Exports) तो खूब बूम हुए, लेकिन देश के अंदर इकोनॉमिक एक्टिविटी में भारी कमजोरी आई। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (Industrial Production) में सालाना 4.1% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो पिछले लगभग तीन सालों का सबसे धीमा आंकड़ा है और इकोनॉमिस्ट्स की 5.63% की उम्मीद से काफी कम है। रिटेल सेल्स (Retail Sales) भी गिरीं, अप्रैल में सिर्फ 0.2% की मामूली बढ़त हुई। यह मार्च के 1.7% ग्रोथ के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है और दिसंबर 2022 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है। डोमेस्टिक कार सेल्स में तो 21.6% की भारी गिरावट आई, जो लगातार सातवें महीने की गिरावट है।
इन्वेस्टमेंट में गिरावट, गहरी आर्थिक समस्या का संकेत
फिक्स्ड-एसेट इन्वेस्टमेंट (Fixed-Asset Investment), जो भविष्य की इकोनॉमिक ग्रोथ का एक अहम पैमाना है, उसमें भी समस्याएं दिखीं। 2024 के पहले चार महीनों में इसमें अप्रत्याशित रूप से 1.6% की गिरावट आई, जबकि पहली तिमाही में 1.7% की ग्रोथ थी। यह गिरावट चिंताजनक है, खासकर तब जब इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट Q1 में 8.9% बढ़ा था। यह दिखाता है कि मैन्युफैक्चरिंग और प्रॉपर्टी सेक्टर में कमजोरी है। प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट, जो लगातार दबाव में है, जनवरी-अप्रैल के दौरान 13.7% गिर गया। अप्रैल में अर्बन अनइंप्लॉयमेंट रेट (Urban Unemployment Rate) मामूली घटकर 5.2% हो गया, लेकिन यह रोजगार की चुनौतियों को दिखाता है।
एक्सपोर्ट्स चमके, डोमेस्टिक खर्च पिछड़ा
एनालिस्ट्स चीन को "दो स्पीड" पर चलते हुए बता रहे हैं। हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और कुछ खास एक्सपोर्ट्स अच्छा कर रहे हैं, लेकिन कंज्यूमर कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) और डोमेस्टिक खर्च पीछे छूट रहे हैं। पहली तिमाही में चीन की जीडीपी (GDP) 5.0% बढ़ी, जो बीजिंग के टारगेट के हिसाब से था। इस ग्रोथ में 14.7% की भारी उछाल वाले एक्सपोर्ट्स और इंटीग्रेटेड सर्किट व AI जैसे हाई-टेक सेक्टर्स का बड़ा योगदान रहा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, बैटरीज और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में एक्सपोर्ट की यह मजबूती ग्लोबल AI इन्वेस्टमेंट का फायदा उठा रही है। हालांकि, यह बाहरी परफॉर्मेंस डोमेस्टिक कमजोरी की भरपाई करने के लिए काफी नहीं है। यह पैटर्न पहले भी देखा गया है, लेकिन अब ईरान युद्ध के कारण बढ़ते ग्लोबल ऑयल प्राइस (Oil Price) ने इसे और गंभीर बना दिया है।
ग्लोबल प्रेशर के बीच पॉलिसीमेकर्स की 'वेट एंड वॉच' स्ट्रैटेजी
इन अलग-अलग ट्रेंड्स के जवाब में, चीन के टॉप पॉलिसीमेकर्स (Policymakers) 'वेट एंड वॉच' मोड में दिख रहे हैं। डोमेस्टिक डिमांड और सप्लाई के बीच बढ़ते गैप के बावजूद, उन्होंने अपनी पिछली पॉलिसी स्टेटमेंट्स पर ही भरोसा जताया है, जिससे किसी नए स्टिमुलस (Stimulus) का कोई साफ संकेत नहीं मिला है। उनकी यह सतर्क रणनीति, और भरपूर मार्केट लिक्विडिटी, बताती है कि वे व्यापक सपोर्ट लाने के बजाय मौजूदा ट्रेंड्स को चलने देना पसंद कर रहे हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (National Bureau of Statistics) ने स्थिति की जटिलता पर कहा, "बाहरी माहौल जटिल और बदलता हुआ है, और मजबूत सप्लाई और कमजोर डिमांड की समस्या बनी हुई है।" ग्लोबल लेवल पर, यूएस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 54.5 पर बढ़कर मजबूत ग्रोथ दिखी। भारत में इन्फ्लेशन (Inflation) अप्रैल में मामूली बढ़कर 3.48% हो गया, जो सेंट्रल बैंक के टारगेट से नीचे है।
जोखिम: एक्सपोर्ट्स पर ज्यादा निर्भरता और बाहरी झटके
हालांकि चीन का एक्सपोर्ट सेक्टर, खासकर हाई-टेक एरिया में, डायनामिक है, यह पूरे इकोनॉमी को टिकाऊ ढंग से सपोर्ट करने की संभावना कम है। बाहरी मांग पर निर्भरता में जोखिम है, खासकर ईरान युद्ध के कारण बढ़ते ग्लोबल ऑयल प्राइस को देखते हुए। गोल्डमैन सैक्स रिसर्च (Goldman Sachs Research) ने एनर्जी प्राइस बढ़ने से डिमांड के धीमे होने की ओर इशारा किया और 2024 की दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी 4% पर धीमी होने का अनुमान लगाया। आईएमएफ (IMF) ने भी 2024 के लिए चीन की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 4.4% कर दिया है। फिक्स्ड-एसेट इन्वेस्टमेंट का लगातार सिकुड़ना, खासकर प्राइवेट सेक्टर और रियल एस्टेट में, डोमेस्टिक कॉन्फिडेंस की कमी को दर्शाता है और भविष्य की ग्रोथ के लिए खतरा पैदा करता है। खास हाई-डिमांड प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट ग्रोथ का फोकस, कॉम्पिटिटिवनेस दिखाने के बावजूद, ओवरऑल इकोनॉमिक हेल्थ पर सवाल उठाता है। डोमेस्टिक खर्च को बढ़ावा देने के लिए मजबूत उपायों के बिना सतर्क पॉलिसी एप्रोच, इन चुनौतियों से निपटने की इकोनॉमी की क्षमता के बारे में चिंताएं बढ़ाता है।
आउटलुक: चीन की इकोनॉमी के लिए आगे चुनौतियां
2024 के बाकी साल के लिए चीन की इकोनॉमी का आउटलुक इस बात पर निर्भर करेगा कि धीमी ग्लोबल डिमांड और जारी डोमेस्टिक खर्च की समस्याओं को देखते हुए उसकी एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ कितने समय तक बनी रहती है। सरकार का लक्ष्य इस साल 4.5% से 5% जीडीपी ग्रोथ रखना है। हालांकि, वर्तमान रास्ता, जिसमें एक्सपोर्ट-लेड रिकवरी डोमेस्टिक कमजोरियों को छिपा रही है और पॉलिसी रिस्पॉन्स धीमा है, यह बताता है कि इकोनॉमिक ट्रेंड्स या पॉलिसी एक्शन में बड़े बदलाव के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। हाई-टेक एक्सपोर्ट्स की लगातार मजबूती कुछ उम्मीद जगाती है, लेकिन यह डोमेस्टिक इकोनॉमी की व्यापक कमजोरी की पूरी भरपाई नहीं कर सकती।