सुरक्षा के नाम पर कड़े रेगुलेशन
चीन में विदेशी कंपनियों के लिए डील करना अब और भी मुश्किल होने वाला है। स्टेट काउंसिल ने एक नया और कड़ा नियम लागू किया है, जो 1 जुलाई से प्रभावी होगा। यह नियम सिर्फ इक्विटी ट्रांसफर से कहीं बढ़कर है। अब सरकार किसी भी ऐसे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन की जांच करेगी, उसे मंजूरी देगी या फिर उसे पलट भी सकती है, अगर उसे लगता है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। Meta द्वारा AI स्टार्टअप Manus का अधिग्रहण रद्द होने के बाद यह कदम उठाया गया है।
'सिंगापुर-वॉशिंग' पर लगाम
चीन ने एक ऐसे तरीके पर भी रोक लगा दी है जिसे 'सिंगापुर-वॉशिंग' कहा जाता था। पहले कंपनियां कैपिटल कंट्रोल से बचने के लिए अपने बिजनेस को सिंगापुर जैसे देशों में शिफ्ट कर लेती थीं, ताकि बीजिंग की सीधी निगरानी के बिना विदेशी कंपनियों को एक्वायर कर सकें। नए नियम के तहत, अब प्रतिबंधित गुड्स, टेक्नोलॉजी और सर्विसेज के एक्सपोर्ट के लिए सरकारी मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, यह नियम इंटैंगिबल ट्रांसफर, जैसे कि ओवरसीज टेक्निकल स्टाफ की तैनाती, क्रॉस-बॉर्डर ट्रेनिंग और टेक्निकल गाइडेंस पर भी लागू होगा। इसका मतलब है कि चीन से जुड़ी स्टार्टअप्स अपनी खास जानकारी या डेटा विदेशी कंपनियों को आसानी से नहीं दे पाएंगी।
कानूनी दांव-पेच और जवाबी कार्रवाई का डर
अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा अब सिर्फ ट्रांजैक्शन अप्रूवल का नहीं, बल्कि डील पूरी होने के बाद भी सरकारी दखल का है। नया कानून नियामकों को यह अधिकार देता है कि वे किसी भी समय शेयर या एसेट्स को बेचने का आदेश दे सकें, भले ही डील पहले ही फाइनल हो चुकी हो। यह नियम पश्चिमी देशों के ट्रेड बैरियर्स का जवाब भी हो सकता है। अगर कोई दूसरा देश चीनी निवेश पर रोक लगाता है या वहां की टेक कंपनियों पर प्रतिबंध लगाता है, तो चीन भी इन नियमों का इस्तेमाल कर सकता है। इससे 'जैसे को तैसा' वाली स्थिति बन सकती है, जहां विदेशी कंपनियां चीनी फर्मों के साथ ट्रेड नहीं कर पाएंगी या फिर उनके कर्मचारियों पर देश छोड़ने पर रोक लग सकती है। नियमों का पालन न करने पर निवेश राशि का 1% तक जुर्माना या बिजनेस बंद करने का आदेश भी मिल सकता है।
भविष्य की राह: आत्मनिर्भरता या मार्केट इंटीग्रेशन?
यह कदम चीन की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम दिखाता है। भले ही बीजिंग मार्केट-ओरिएंटेड सहयोग का समर्थन करने का दावा करे, लेकिन हकीकत यह है कि अब किसी भी क्रिटिकल टेक्नोलॉजी से जुड़े ट्रांजैक्शन के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाना होगा। उम्मीद है कि AI पार्टनर्शिप में कमी आएगी और चीन के अंदर ही अधिक नियंत्रित और स्थानीय निवेश स्ट्रक्चर पर जोर दिया जाएगा।
