चीन की अर्थव्यवस्था पर प्रॉपर्टी संकट और कमजोर मांग का गहरा असर दिख रहा है। ऐसे में, 2026 की दूसरी तिमाही में विकास दर घटकर 4.5% रह जाने का अनुमान है। हालांकि, AI और ऑटोमोबाइल जैसे हाई-टेक निर्यातThe growth is still supported by them.
प्रॉपर्टी सेक्टर का संकट बन रहा सबसे बड़ी बाधा
चीन की अर्थव्यवस्था इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 की दूसरी तिमाही में सालाना विकास दर सिर्फ 4.5% रह सकती है। यह पहली तिमाही के 5% के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है। इसकी मुख्य वजह प्रॉपर्टी सेक्टर का गहराता संकट और घरेलू मांग का कमजोर होना है। 2020 से प्रॉपर्टी बाजार में कीमतें गिरी हुई हैं और बड़े डेवलपर्स कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। इसका सीधा असर लोगों के भरोसे पर पड़ा है, जिससे निवेश और खपत दोनों कम हो गए हैं। मई में रिटेल बिक्री में आई गिरावट, जो तीन साल में पहली बार हुई, इसी का नतीजा है।
निर्यात क्षेत्र से मिली सहारा
घरेलू मंदी के बावजूद, चीन का निर्यात (Export) मजबूत बना हुआ है। मई में, विदेशों में माल भेजने का आंकड़ा सालाना आधार पर 19.4% बढ़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इलेक्ट्रिक गाड़ियां (Automobiles) जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर हैं। यह दिखाता है कि चीन अब हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। निर्यात में यह मजबूती अर्थव्यवस्था को सरकारी लक्ष्य, जो कि 4.5% से 5.0% सालाना विकास दर का है, हासिल करने में मदद कर रही है। यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ चीन के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं।
आगे की राह और आर्थिक जोखिम
2026 के दूसरे चरण में अर्थव्यवस्था की चाल काफी हद तक सरकार की नई नीतियों पर निर्भर करेगी। चूंकि घरेलू खपत अभी भी कमजोर है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार रोजगार और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नए स्टिमुलस (Stimulus) उपायों का ऐलान करेगी। हालांकि, पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक तनाव एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर टैरिफ (Tariffs) या व्यापार प्रतिबंध बढ़ते हैं, तो AI और ऑटोमोबाइल निर्यात का यह मजबूतmomentum खतरे में पड़ सकता है, जो फिलहाल चीनी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। क्या सरकार कर्ज का प्रबंधन करते हुए खपत-आधारित मॉडल की ओर सफलतापूर्वक बढ़ पाएगी, यह आने वाले महीनों में देखने वाली बात होगी।
