मैन्युफैक्चरिंग में तेजी, सर्विसेज में संकुचन
चीन का ऑफिशियल मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अप्रैल में 50.3 पर रहा, जो 50.1 के अनुमान से बेहतर है और विस्तार (expansion) का संकेत देता है। यह मार्च के 50.4 से मामूली कम है, लेकिन फिर भी फैक्ट्री एक्टिविटी जारी रहने का इशारा करता है। इस तेजी की मुख्य वजह ग्लोबल डिमांड रही, खासकर AI से जुड़े प्रोडक्ट्स की, जो चीन के एक्सपोर्ट (export) में बड़ा योगदान दे रहे हैं। AI से जुड़े सामानों ने पहली तिमाही 2026 में चीन के कुल एक्सपोर्ट का करीब 22% हिस्सा बनाया।
इसके विपरीत, सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन वाले नॉन-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उम्मीद से ज्यादा गिरावट आई है। यह मार्च के 50.1 से गिरकर 49.4 पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि घरेलू मांग (domestic demand) का कमजोर होना, बढ़ती ईंधन की कीमतें और आर्थिक अनिश्चितता इसके मुख्य कारण हैं, जो कंज्यूमर खर्च (consumer spending) को हतोत्साहित कर रहे हैं। कुल मिलाकर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज को मिलाकर बना कंपोजिट PMI भी मार्च के 50.5 से घटकर अप्रैल में 50.1 पर आ गया।
बढ़ती ग्लोबल लागतें और सप्लाई टेंशन
यह आर्थिक विभाजन ऐसे समय में आया है जब ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल लेवल पर लागतें बढ़ रही हैं। इस संघर्ष ने सप्लाई चेन्स (supply chains) को टाइट कर दिया है और कमोडिटी प्राइसेस (commodity prices), खासकर एनर्जी और फर्टिलाइजर के दाम बढ़ा दिए हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $100 प्रति बैरल के पार चला गया है, और नेचुरल गैस की कीमतें भी काफी बढ़ी हैं, जिससे मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनपुट कॉस्ट (input costs) बढ़ गई है। हालांकि चीन के पास स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश है, पर इसका असर दिख रहा है। उदाहरण के लिए, गुआंगडोंग प्रांत (Guangdong Province) में मिडिल ईस्ट से गैस सप्लाई में आई कमी के कारण बिजली की कीमतें करीब दोगुनी हो गई हैं।
इंटरनेशनल तुलना और ट्रेड
चीन का मैन्युफैक्चरिंग PMI 50.3, दुनिया के दूसरे बड़े देशों के मुकाबले थोड़ा पीछे है। अप्रैल में अमेरिका का मैन्युफैक्चरिंग PMI चार साल के उच्चतम स्तर 54.0 पर पहुंच गया, जबकि यूरो जोन का PMI 52.2 पर था, जो 47 महीनों में सबसे मजबूत है। यूके (UK) में भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने मजबूत वापसी की, जिसका PMI मई 2022 के बाद पहली बार 53.6 पर पहुंच गया।
वैश्विक आर्थिक उठापटक के बावजूद, 2026 की शुरुआत में चीन का फॉरेन ट्रेड (foreign trade) काफी मजबूत रहा। पहली तिमाही में ट्रेड वॉल्यूम 11.84 ट्रिलियन युआन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 15% ज्यादा है। AI की मांग के चलते एक्सपोर्ट 11.9% बढ़ा, जबकि इंपोर्ट (import) 19.6% उछल गया। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2026 में इंपोर्ट, एक्सपोर्ट से ज्यादा बढ़ सकते हैं, खासकर AI चिप्स की भारी डिमांड के कारण।
बड़े रिस्क और भविष्य का आउटलुक
चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI का यह ऊपरी आंकड़ा असलियत से थोड़ा अलग तस्वीर पेश करता है। नॉन-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा संकुचन (contraction) बताता है कि घरेलू मांग कमजोर पड़ रही है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की टिकाऊ ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी और ईरान युद्ध जैसी अप्रत्याशित भू-राजनीतिक घटनाएं, साथ ही 14 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बीजिंग दौरे से जुड़ी अनिश्चितता, भविष्य के ट्रेड टैरिफ (tariffs) और द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकती है। ANZ एनालिस्ट्स मौजूदा माहौल को 'अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल नहीं' बता रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के विपरीत, जिनकी मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू ग्रोथ मजबूत दिख रही है, चीन का एक्सपोर्ट पर, खासकर AI के मामले में, निर्भर रहना उसे ग्लोबल स्लोडाउन के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है।
ऑफिशियल्स ने 2026 की मजबूत शुरुआत की बात तो कही है, लेकिन चुनौतियों पर भी जोर दिया है। वे एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाने और टेक्नोलॉजिकल सेल्फ-सफिशिएंसी (self-sufficiency) हासिल करने का वादा कर रहे हैं। AI डिमांड और क्लीन एनर्जी को सपोर्ट करने वाले चीन के एक्सपोर्ट सेक्टर की मजबूती, घरेलू खपत और सर्विसेज की कमजोरी को दूर करने में महत्वपूर्ण होगी। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी बढ़ सकती है, लेकिन धीमी गति से।
