साल 2026 की दूसरी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था **4.3%** की दर से बढ़ी है, जो कि अनुमानों से काफी कम है। यह पिछले तीन सालों में सबसे धीमी रफ्तार है। प्रॉपर्टी मार्केट में गहराए संकट और कमजोर कंज्यूमर डिमांड के चलते यह गिरावट आई है।
प्रॉपर्टी संकट और कंज्यूमर डिमांड का असर
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को जारी आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है। यह प्रदर्शन पहली तिमाही में दर्ज 5% की ग्रोथ से काफी कम है और 2022 की शुरुआत के बाद से सबसे कमजोर तिमाही विस्तार है। इस नतीजे के साथ, चीन अपने तय सालाना ग्रोथ टारगेट 4.5% से 5% के दायरे से पिछड़ गया है।
प्रॉपर्टी सेक्टर का संकट अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। 2026 की पहली छमाही में प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट 18% गिरा, जबकि फिक्स्ड-एसेट इन्वेस्टमेंट में 5.7% की गिरावट आई। चीन में प्रॉपर्टी की वैल्यू घरों की कुल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा है, इस गिरावट ने कंज्यूमर कॉन्फिडेंस को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका असर रिटेल सेल्स में भी दिखा, जो जून में पिछले महीने की गिरावट के बाद केवल 1.1% बढ़ी।
लेबर मार्केट पर भी दबाव
लेबर मार्केट पर भी दबाव बना हुआ है। जून में शहरी बेरोजगारी दर 5% पर रही। सरकार ने इस साल 1.2 करोड़ नई शहरी नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन सुस्त घरेलू बाजार और नई टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने के कारण, हाल ही में ग्रेजुएट हुए युवाओं के लिए नौकरी ढूंढना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
एक्सपोर्ट और फिस्कल दबाव
एक्सपोर्ट अर्थव्यवस्था के लिए एक सहारा साबित हुए हैं, जो साल की पहली छमाही में 17% बढ़कर $2.1 ट्रिलियन तक पहुंच गए। हालांकि, यह ग्रोथ घरेलू मांग की कमी की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं रही। इसके अलावा, प्रॉपर्टी में आई मंदी के कारण स्थानीय सरकारों की वित्तीय स्थिति टाइट हो गई है, जो अपने बजट के लिए पारंपरिक रूप से जमीन की बिक्री पर निर्भर करती हैं। कम्युनिस्ट पार्टी की भ्रष्टाचार-विरोधी निगरानी एजेंसी की रिपोर्ट्स में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जहां शहरों ने अनियमित भूमि लेनदेन के माध्यम से बजट घाटे को छुपाने की कोशिश की, जैसे नानिंग का मामला जहां 2024 में ¥2.83 अरब का राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था।
आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?
बाजार की नजरें अब जुलाई के अंत में होने वाली Politburo मीटिंग पर हैं। निवेशक घरेलू खपत को बढ़ावा देने और स्थानीय सरकारी कर्ज को संबोधित करने के उद्देश्य से विशिष्ट नीतिगत घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। निर्यात-संचालित ग्रोथ को आंतरिक मांग की रिकवरी के साथ संतुलित करने की सरकार की क्षमता, 2026 के शेष भाग के लिए अर्थव्यवस्था को अपने लक्ष्य ग्रोथ पथ पर वापस लाने में महत्वपूर्ण कारक होगी।
