चीन की इकोनॉमी का ग्रोथ रेट 3 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। दूसरी तिमाही में GDP सिर्फ **4.3%** रहा, जो उम्मीदों से काफी कम है। प्रॉपर्टी सेक्टर का संकट और घरेलू मांग में कमजोरी इसके पीछे की बड़ी वजह बताई जा रही है।
इकोनॉमी में आई सुस्ती
चीन की इकोनॉमी ग्रोथ रेट में बड़ी गिरावट आई है। दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ घटकर 4.3% पर आ गया है, जो कि पिछले 3 सालों का सबसे निचला स्तर है। पहली तिमाही में यह 5% था। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से भी काफी कम है और बीजिंग के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
एक्सपोर्ट में उछाल, पर डोमेस्टिक इकोनॉमी सुस्त
हालांकि, चीन के एक्सपोर्ट सेक्टर में ज़बरदस्त तेजी देखी गई है। जून में एक्सपोर्ट में 27% की सालाना बढ़ोतरी हुई, जिसका मुख्य कारण सेमीकंडक्टर, बैटरी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की ग्लोबल डिमांड रही। इससे क्लीन एनर्जी और AI से जुड़े सेक्टर में भारी निवेश आ रहा है।
लेकिन, यह एक्सपोर्ट बूस्ट घरेलू इकोनॉमी की कमजोरी को पूरी तरह से नहीं छिपा पा रहा है। चीन का प्रॉपर्टी सेक्टर अभी भी गहरे संकट से जूझ रहा है। बड़े डेवलपर्स के दिवालिया होने और प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट से लोगों की संपत्ति पर बुरा असर पड़ा है। चूंकि चीनी परिवारों की ज़्यादातर बचत प्रॉपर्टी में लगी है, इसलिए इस गिरावट से कंज्यूमर खर्च में भारी कमी आई है।
कंज्यूमर सेंटिमेंट और नौकरियों पर असर
रिटेल सेल्स में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। कंज्यूमर अभी भी खर्च करने से कतरा रहे हैं और बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रॉपर्टी सेक्टर में मंदी के कारण कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी कम हुई है, जिससे लाखों वर्कर्स की नौकरियां गई हैं या वे कम सैलरी पर काम करने को मजबूर हैं। ऊपर से बढ़ते फ्यूल प्राइस ने लोगों के बजट को और टाइट कर दिया है।
वेज ग्रोथ में भी अंतर
टेक और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के वर्कर्स की कमाई बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक इंडस्ट्रीज में ऑटोमेशन और कमजोर मांग के कारण सैलरी में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। हालांकि, महंगाई के दबाव से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन कमजोर कंज्यूमर डिमांड और बेरोजगारी जैसी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।
आगे की राह और पॉलिसी
चीन के प्रीमियर ली कियांग ने इन असंतुलनों को दूर करने के संकेत दिए हैं। सरकार कंज्यूमर खर्च और रोजगार को बढ़ाने के लिए नई पॉलिसी ला सकती है। लेकिन, यह देखना अहम होगा कि ये कदम प्रॉपर्टी सेक्टर के संकट से होने वाले नुकसान की भरपाई कर पाते हैं या नहीं। ग्लोबल मार्केट की नजरें चीन के अगले सरकारी पैकेजों पर टिकी हैं, जिनसे पता चलेगा कि देश संतुलित ग्रोथ की ओर बढ़ पाएगा या नहीं।
