मध्य प्रदेश: बच्चों में कुपोषण का भयानक आलम! 40% हुए अंडरवेट, सरकार की पोषण योजनाओं पर सवाल

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AuthorMehul Desai|Published at:
मध्य प्रदेश: बच्चों में कुपोषण का भयानक आलम! 40% हुए अंडरवेट, सरकार की पोषण योजनाओं पर सवाल

मध्य प्रदेश में बच्चों के कुपोषण के आंकड़े चिंताजनक रूप से बढ़ गए हैं। अब राज्य के **40%** से ज़्यादा पांच साल से कम उम्र के बच्चे अंडरवेट (कम वज़न वाले) हैं, जो पिछले सर्वेक्षण के **33%** से काफी ज़्यादा है। यह स्थिति सरकारी पोषण योजनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

मध्य प्रदेश में बच्चों का वज़न घटा, कुपोषण बढ़ा

मध्य प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण का स्तर गंभीर हो गया है। नए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 40% बच्चे अंडरवेट पाए गए हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा 33% था। यह वृद्धि राज्य के पोषण स्वास्थ्य ढांचे पर बढ़ते दबाव का संकेत है, भले ही यह एक कृषि प्रधान राज्य के रूप में जाना जाता है।

आर्थिक तंगी और खान-पान का बदलता मिजाज

ग्रामीण परिवारों के बीच आर्थिक अस्थिरता इस स्वास्थ्य संकट का एक मुख्य कारण बनी हुई है। कई परिवार मौसमी मज़दूरी पर निर्भर हैं, जहाँ उन्हें हर दिन ₹300 से ₹350 की दिहाड़ी मिलती है। ऐसे में, छह लोगों के परिवार के लिए संतुलित आहार का इंतज़ाम करना मुश्किल हो गया है। इस आर्थिक दबाव के चलते लोगों के खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। खर्च सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अब ग्रामीण परिवार अपने मासिक बजट का लगभग 10% प्रोसेस्ड फ़ूड और पैकेट वाले स्नैक्स पर खर्च कर रहे हैं। वे ज़रूरी प्रोटीन और ताज़े फल-सब्ज़ियों की जगह इन सस्ती चीज़ों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।

पोषण नीतियों और फंडिंग की चुनौतियाँ

मौजूदा सरकारी योजनाएं जैसे 'पोषण 2.0' और 'पीएम-पोषण' जैसी पहलें भी इस बढ़ती ज़रूरत को पूरा करने में संघर्ष कर रही हैं। वर्तमान में, इन योजनाओं के तहत प्रति बच्चा प्रतिदिन लगभग ₹12 से ₹17 का आवंटन किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए ज़रूरी कैलोरी और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

हालांकि आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली फंडिंग में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन महंगाई और ज़रूरतमंद बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वास्तविक खर्च पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, 2014 से आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है, जिससे ज़रूरी पोषण सेवाओं का दायरा सीमित हो गया है। कुछ राज्यों ने अपने मिड-डे मील कार्यक्रम में अंडे जैसी प्रोटीन युक्त चीज़ों को शामिल करके स्वास्थ्य परिणामों में सुधार किया है, लेकिन ये पहलें अक्सर केंद्रीय दिशानिर्देशों के तहत आवंटित प्रति-बच्चा बजट में शामिल नहीं होती हैं। उम्मीद है कि निवेशक और नीति-निर्माता इस बात पर नज़र रखेंगे कि आने वाली तिमाहियों में इस फंडिंग ढांचे में बदलाव होता है या नहीं, या राज्य पोषण वितरण में सुधार के लिए स्वतंत्र उपाय लागू करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.