सरकारी पहल: आयात बंद, 'मेक इन इंडिया' पर जोर! 120 जिलों में एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
सरकारी पहल: आयात बंद, 'मेक इन इंडिया' पर जोर! 120 जिलों में एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी

कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने राज्यों से कहा है कि वे उन इम्पोर्टेड प्रोडक्ट्स (Imported Products) की पहचान करें जिन्हें भारत में ही बनाया जा सकता है। इसका मकसद विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम करना है। इस इनिशिएटिव के तहत 120 जिलों से एक्सपोर्ट (Export) बढ़ाने के लिए 90 दिन का एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जो MSMEs को सपोर्ट करेगा और विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को भी कम करेगा।

क्या है नया कदम?

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भारतीय राज्यों से उन सामानों की पहचान करने को कहा है, जिन्हें फिलहाल इम्पोर्ट किया जा रहा है, लेकिन अब उन्हें देश में ही मैन्युफैक्चर (Manufacture) किया जा सकता है। हाल ही में हुई बोर्ड ऑफ ट्रेड (Board of Trade) की मीटिंग में मिनिस्टर ने इस बात पर जोर दिया कि इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना देश की सप्लाई चेन (Supply Chain) को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बचाने के लिए बहुत जरूरी है। इस बदलाव को सपोर्ट करने के लिए, सरकार ने राज्यों को एक्सपोर्ट कमेटियां (Export Committees) बनाने और हर महीने इनकी समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इस पहल का मुख्य फोकस डोमेस्टिक प्रोडक्शन (Domestic Production) की तरफ है, खासकर उन चीजों के लिए जहां लोकल मैन्युफैक्चरिंग विदेशी विकल्पों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव (Competitive) हो सकती है।

90 दिन का एक्सपोर्ट हब अभियान

इस कोशिश के तहत, सरकार 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 120 खास जिलों पर फोकस करते हुए 90 दिन का एक टाइम-बाउंड प्रोग्राम (Time-bound Program) शुरू कर रही है। 'डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब' (Districts as Export Hubs) फ्रेमवर्क के तहत चलाए जा रहे इस ड्राइव का मकसद लोकल बिजनेसेज (Local Businesses) को फॉर्मल एक्सपोर्ट इकोनॉमी (Formal Export Economy) में लाना है। इस प्रोग्राम में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) जैसी मौजूदा स्कीम्स और माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (MSME) क्लस्टर्स से सपोर्ट को इंटीग्रेट (Integrate) करने की योजना है। इसका प्राइमरी गोल रजिस्टर्ड एक्सपोर्टर्स (Registered Exporters) की संख्या बढ़ाना और इन खास इलाकों से होने वाले एक्सपोर्ट के कुल वैल्यू को ऊपर ले जाना है।

अनुचित व्यापार के खिलाफ सपोर्ट

डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स (Domestic Manufacturers) की विदेशी कॉम्पिटिशन (Foreign Competition) को लेकर चिंताओं को दूर करते हुए, मिनिस्टर ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। जो कंपनियां डंपिंग (Dumping)—यानी जब विदेशी प्रोडक्ट्स को भारत में उनकी डोमेस्टिक मार्केट वैल्यू से कम कीमत पर बेचा जाता है—या प्रीडेटरी प्राइसिंग (Predatory Pricing) के दबाव का सामना कर रही हैं, वे सहायता के लिए DGTR से संपर्क कर सकती हैं। यह अथॉरिटी इन दावों की जांच करने और लोकल इंडस्ट्रीज को बचाने के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-dumping Duties) या अन्य सेफगार्ड मेजर्स (Safeguard Measures) की सिफारिश करने के लिए एम्पावर्ड (Empowered) है। यह रेगुलेटरी मैकेनिज्म (Regulatory Mechanism) सस्ते इम्पोर्ट के खिलाफ संघर्ष कर रही डोमेस्टिक फर्म्स के लिए एक लेवल प्लेइंग फील्ड (Level Playing Field) प्रदान करने के इरादे से है।

निवेशकों के लिए क्यों अहम?

निवेशकों के लिए, यह पॉलिसी डायरेक्टशन इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन (Import Substitution) की तरफ एक लॉन्ग-टर्म शिफ्ट (Long-term Shift) को हाईलाइट करती है, जिससे केमिकल्स (Chemicals), टेक्सटाइल्स (Textiles), इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics), और लाइट इंजीनियरिंग (Light Engineering) जैसे सेक्टर्स को फायदा हो सकता है। जो कंपनियां इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स (Imported Components) को बदलने के लिए प्रोडक्शन को सफलतापूर्वक स्केल-अप (Scale-up) कर सकती हैं, वे मार्केट शेयर (Market Share) और प्रॉफिट मार्जिंस (Profit Margins) में सुधार देख सकती हैं। हालांकि, निवेशकों को यह भी नजर रखनी चाहिए कि क्या डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग लॉन्ग-टर्म प्रोटेक्शन (Long-term Protection) के बिना कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए जरूरी क्वालिटी (Quality) और कॉस्ट एफिशिएंसी (Cost Efficiencies) हासिल कर सकती है। इन मेजर्स की इफेक्टिवनेस (Effectiveness) स्टेट लेवल पर इंप्लीमेंटेशन (Implementation) की स्पीड और MSMEs की एक्सपेंशन (Expansion) के लिए जरूरी कैपिटल (Capital) और टेक्नोलॉजी (Technology) तक पहुंचने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

निवेशक 'डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब' प्रोग्राम के डेवलपमेंट पर नजर रख सकते हैं, खासकर नए एक्सपोर्टर रजिस्ट्रेशन (Exporter Registrations) और रीजनल मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट (Regional Manufacturing Output) पर प्रोग्रेस रिपोर्ट्स के संबंध में। इसके अतिरिक्त, स्पेसिफिक कमोडिटी (Commodity) या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में एंटी-डंपिंग इन्वेस्टिगेशन्स (Anti-dumping Investigations) के संबंध में भविष्य की DGTR नोटिफिकेशन्स को ट्रैक करना भी प्रासंगिक होगा, क्योंकि ये सीधे लोकल लिस्टेड कंपनियों की प्राइसिंग पावर (Pricing Power) को प्रभावित कर सकते हैं।

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