खनिज उत्पादन में तेजी! केंद्र सरकार का राज्यों को ₹5,175 करोड़ का प्रोत्साहन

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AuthorMehul Desai|Published at:
खनिज उत्पादन में तेजी! केंद्र सरकार का राज्यों को ₹5,175 करोड़ का प्रोत्साहन

केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, राज्यों को 79 नीलामी वाले खनिज ब्लॉकों में उत्पादन शुरू करने के लिए ₹5,175 करोड़ का प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे देश का खनिज उत्पादन बढ़ेगा।

राज्यों के लिए खजाने का पिटारा

वित्त मंत्रालय ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर के लिए 'स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट' (SASCI) के तहत एक बड़ा ऐलान किया है। राज्यों को माइनिंग सेक्टर में सुस्ती खत्म करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹5,175 करोड़ का इंसेंटिव दिया जाएगा। इसका सबसे बड़ा मकसद 79 बड़े और ज़रूरी खनिज ब्लॉकों में जल्द से जल्द काम शुरू करवाना है, ताकि इंपोर्ट पर निर्भरता कम हो सके और घरेलू उद्योगों के लिए कच्चे माल की सप्लाई बढ़ाई जा सके।

प्रोडक्शन टारगेट और राज्यों की ज़िम्मेदारी

यह फंड पाने के लिए राज्यों को 31 दिसंबर 2026 की डेडलाइन तक प्रोडक्शन से जुड़े कुछ खास माइलस्टोन पूरे करने होंगे। सरकार ने राज्यों के लिए टारगेट भी तय किए हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश को सबसे ज़्यादा, यानी 13-13 खदानें चालू करनी होंगी। इसके अलावा ओडिशा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर भी बड़ी ज़िम्मेदारी है। ये पहल देश भर में नीलामी (Auction) हो चुके करीब 684 ब्लॉकों का लगभग 10% हिस्सा कवर करती है।

इंसेंटिव पैकेज का ब्रेकअप

इस इंसेंटिव पैकेज को तीन हिस्सों में बांटा गया है। सबसे बड़ा हिस्सा, ₹2,500 करोड़, सीधे खदानों को चालू कराने के लिए है। हर बड़े खनिज ब्लॉक से प्रोडक्शन शुरू होने पर राज्यों को ₹20 करोड़ मिलेंगे, लेकिन एक राज्य को ज़्यादा से ज़्यादा ₹200 करोड़ तक का ही फायदा हो सकता है। इसके लिए राज्यों को सभी ज़रूरी फॉरेस्ट, एनवायरनमेंट और लैंड-यूज़ क्लीयरेंस पूरी करनी होंगी, जो अक्सर माइनिंग प्रोजेक्ट्स में देरी का कारण बनती हैं। साथ ही, ₹2,000 करोड़ माइनिंग गवर्नेंस रिफॉर्म्स लागू करने के लिए रखे गए हैं, और बाकी बचे ₹675 करोड़ 'स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स' के आधार पर बांटे जाएंगे, जो माइनिंग एक्टिविटीज़ के लिए राज्यों की तैयारी को मापता है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

यह कदम माइनिंग सेक्टर में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बेहतर बनाने का संकेत देता है। लंबे समय से चल रही रेगुलेटरी प्रक्रियाएं और लैंड एक्विजिशन की दिक्कतें माइनिंग कंपनियों के लिए बड़ी रुकावटें रही हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ने की समस्या बनी रहती है। फाइनेंशियल इंसेंटिव को क्लीयरेंस और प्रोडक्शन स्टार्ट होने से जोड़ने का यह कदम, नीलामी से लेकर असल प्रोडक्शन तक के समय को कम करने की कोशिश है।

इस पॉलिसी की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारें सेंट्रल रेगुलेटरी बॉडीज़ के साथ मिलकर ज़रूरी परमिट्स को कितनी जल्दी हासिल कर पाती हैं। अगर यह सफल होता है, तो स्टील, सीमेंट, पावर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग जैसे कच्चे माल पर निर्भर सेक्टरों को फायदा हो सकता है, जिससे लंबे समय में इनपुट कॉस्ट कम हो सकती है। निवेशकों को आने वाले नतीजों में इन 79 ब्लॉकों की प्रगति पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि खनिजों की ज़्यादा उपलब्धता इन सेक्टर्स की कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन को बेहतर बना सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.