अगस्त 19 की डेडलाइन नज़दीक आते ही कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड टॉक तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी के बाद कनाडा ने साफ कर दिया है कि अगर कोई डील नहीं हुई तो वह पलटवार करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बीच, करीब CAD 28 अरब के कनाडाई एक्सपोर्ट पर 50% टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है।
Detailed Coverage
टैरिफ की डेडलाइन से पहले बढ़ी कनाडा की टेंशन
अगले महीने, 19 अगस्त को अमेरिका और कनाडा के बीच एक बड़ी ट्रेड डेडलाइन आने वाली है। इस तारीख तक अगर दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कई कनाडाई सामानों पर 50% तक का भारी टैरिफ लगा सकता है। इस खतरे को देखते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कर दिया है कि ओटावा (कनाडा की राजधानी) किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा और अमेरिका की किसी भी टैरिफ की कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा।
किन सामानों पर पड़ेगा असर?
हालांकि, इस टैरिफ का खतरा कुछ खास सेक्टर्स पर ही मंडरा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहद, शराब और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे सामानों को इस प्रस्तावित टैरिफ लिस्ट में शामिल किया गया है। अच्छी बात यह है कि कनाडा के एनर्जी एक्सपोर्ट्स और महत्वपूर्ण मिनरल्स को इस बार के टैरिफ खतरे से बाहर रखा गया है, जिससे इन प्रमुख उद्योगों को थोड़ी राहत मिली है। अनुमान है कि अगर 19 अगस्त तक बातचीत फेल होती है, तो लगभग CAD 28 अरब के सालाना कनाडाई एक्सपोर्ट्स पर यह ड्यूटी लग सकती है।
सरकारी रणनीति और इकोनॉमिक असर
कनाडा की सरकार इस मामले पर एकजूट होकर काम कर रही है। प्रधानमंत्री कार्नी ने प्रांतीय और क्षेत्रीय नेताओं के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति तैयार की है। सरकार जहां एक डिप्लोमेटिक समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं यह भी साफ कर दिया है कि कनाडाई आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्प खुले हैं। सरकार भविष्य में किसी एक मार्केट पर निर्भरता कम करने के लिए लंबी अवधि की डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजी पर भी काम कर रही है, ताकि अन्य देशों के साथ भी मजबूत पार्टनरशिप बन सके।
निवेशकों और बिजनेसमैन के लिए, यह ट्रेड डिस्प्यूट एक बड़ा अनिश्चितता का कारण बना हुआ है। इस तरह के ट्रेड टेंशन से बिजनेस कॉन्फिडेंस में उतार-चढ़ाव आ सकता है और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड पर निर्भर कंपनियों की वैल्यूएशन पर भी असर पड़ सकता है। फूड, बेवरेज और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में काम करने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि वे अमेरिकी ग्राहकों पर बहुत ज्यादा निर्भर करती हैं।
आगे चलकर, इस ट्रेड डिस्प्यूट का नतीजा ही बाजार के लिए सबसे अहम रहेगा। निवेशकों को 19 अगस्त की डेडलाइन नज़दीक आते ही कनाडाई सरकार के आधिकारिक बयानों और टैरिफ के दायरे को लेकर अपडेट पर नज़र रखनी चाहिए। ओटावा और वाशिंगटन के बीच किसी भी अंतिम समय की सफलता या तनाव में बढ़ोतरी से एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स में सेंटीमेंट ड्राइव होगा।
