केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स समेत 7 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। इन पहलों पर कुल **₹2.19 लाख करोड़** खर्च होंगे। सरकार का मकसद घरेलू औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स सुधारना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स को बड़ी राहत
बुधवार को कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए ₹2,19,353 करोड़ के बड़े निवेश पैकेज को हरी झंडी दे दी है। इस कदम से सरकार 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देकर भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है।
कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण, जिसे 'सेमीकॉन 2.0' के नाम से जाना जाता है, के लिए ₹1.27 लाख करोड़ आवंटित किए हैं। इसके अलावा, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) के दूसरे चरण के लिए ₹62,500 करोड़ की मंजूरी मिली है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को और मजबूत करना है, जिसमें हाल के वर्षों में ग्लोबल और लोकल कंपनियों की भागीदारी बढ़ी है।
वाराणसी में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
सरकार ने वाराणसी में शहरी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है। हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (Hybrid Annuity Model) के तहत दो एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स पर काम होगा, जिसमें सरकार निजी डेवलपर्स के साथ वित्तीय जोखिम साझा करेगी। पहला प्रोजेक्ट, नेशनल हाईवे-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाला 46 किमी लंबा कॉरिडोर, ₹14,447.64 करोड़ का है। वहीं, वरुणा नदी के किनारे दूसरे कॉरिडोर के लिए ₹10,998.32 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस मॉडल से सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाना चाहती है।
रेलवे अपग्रेड और यूरिया नीति
मैन्युफैक्चरिंग और शहरी सड़कों के अलावा, कैबिनेट ने राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के महत्वपूर्ण अपग्रेड को भी मंजूरी दी है, जिसमें फ्रेट और पैसेंजर क्षमता बढ़ाने के लिए ट्रैक डबलिंग और नई लाइनों का काम शामिल है। इसके साथ ही, यूरिया उत्पादन में घरेलू आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 को भी अंतिम रूप दिया गया है। यह कदम देश की आयातित फर्टिलाइजर पर निर्भरता को कम करने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए, इन प्रोजेक्ट्स का कार्यान्वयन सबसे महत्वपूर्ण होगा। हालांकि ये आवंटन इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक लॉन्ग-टर्म ग्रोथ रोडमैप प्रदान करते हैं, लेकिन कंपनी के मुनाफे पर वास्तविक प्रभाव प्रोजेक्ट अवार्ड की गति, कच्चे माल की लागत प्रबंधन और निजी ठेकेदारों की कर्ज अनुशासन बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा। निवेशक यह समझने के लिए आगामी कंपनी फाइलिंग और प्रोजेक्ट टेंडर्स पर नजर रख सकते हैं कि कौन सी फर्में इन नई परियोजनाओं और मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं से संबंधित अनुबंध हासिल करती हैं।
