Midcaps की धूम, Smallcaps पर खतरा! CLSA ने दी बड़ी चेतावनी

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Midcaps की धूम, Smallcaps पर खतरा! CLSA ने दी बड़ी चेतावनी
Overview

CLSA की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में मिडकैप कंपनियों ने लगातार छठे क्वार्टर में अपनी कमाई का दबदबा बनाए रखा है। वहीं, स्मॉलकैप शेयरों के लिए **FY27/28** के अनुमानों में बड़े डाउनग्रेड का सामना करना पड़ रहा है।

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बाजार में दिखा साफ अंतर: मिडकैप चमके, स्मॉलकैप फंसे

CLSA की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत इंक (India Inc.) की कमाई में एक बड़ा अंतर नजर आ रहा है। मिड-कैप (Mid-cap) कंपनियां लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि स्मॉल-कैप (Small-cap) कंपनियों के लिए आय के अनुमानों में कटौती की जा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निफ्टी 500 (Nifty 500) के तहत टॉप-लाइन ग्रोथ अच्छी रहने के बावजूद, मुनाफा बढ़ने की गुंजाइश (breadth of earnings) तेजी से कम हुई है।

मिडकैप कंपनियों का लगातार जलवा

सबसे खास बात यह है कि दिसंबर तिमाही (FY26) में मिड-कैप कंपनियों ने 19.6% का शानदार प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ग्रोथ दर्ज किया। यह लगातार छठा मौका है जब मिडकैप कंपनियों ने लार्ज-कैप (Large-cap) के 6.6% और स्मॉल-कैप के 12.9% ग्रोथ को पीछे छोड़ा है।

हालांकि, इस सफलता के पीछे की सच्चाई यह है कि निफ्टी 500 की कुल मुनाफा ग्रोथ में लगभग 80% का योगदान सिर्फ ऑयल एंड गैस (Oil & Gas) और फाइनेंशियल (Financial) सेक्टर का रहा। इन बड़े सेक्टरों को हटा दें, तो बाकी कंपनियों का PAT ग्रोथ सिर्फ 0.6% ही रहा, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है।

वैल्यूएशन पर ब्रोकरेज की नजर

वैल्यूएशन (Valuation) के मामले में भी स्थिति थोड़ी पेचीदा है। फरवरी 2026 तक, निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 30.5 था, जबकि निफ्टी 100 (Nifty 100) यानी लार्ज कैप का P/E करीब 21.8 और निफ्टी 50 (Nifty 50) का 22.25 था।

बाजार के लिए अच्छी खबर यह है कि मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) संकेत मजबूत हैं। जीडीपी (GDP) ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है और महंगाई (Inflation) भी जनवरी 2026 में लगभग 2.75% पर नरम बनी हुई है।

स्मॉल-कैप शेयरों पर असली खतरा

CLSA की रिपोर्ट में सबसे बड़ा जोखिम स्मॉल-कैप सेगमेंट में नजर आ रहा है। यहां उम्मीदें बहुत ऊंची हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन उम्मीदों से काफी पीछे है। CLSA का कहना है कि स्मॉल-कैप कंपनियों के लिए FY27 और FY28 के अनुमानों को लगातार तीसरी बार 3.9% और 3.1% तक घटाया गया है।

इसके बावजूद, स्मॉल-कैप से अगले दो सालों में 28.4% की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) की उम्मीद की जा रही है, जो कि अवास्तविक लगता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले चार तिमाहियों में केवल 39% कंपनियों ने ही 20% से ज्यादा की ग्रोथ हासिल की है।

CLSA की सलाह: किसे दें तरजीह?

इन सबके बीच, CLSA लार्ज-कैप शेयरों को तरजीह दे रहा है। ब्रोकरेज कंजम्पशन (Consumption), रियल एस्टेट (Real Estate) और आईटी (IT) सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। उनका मानना है कि आईटी सेक्टर में AI के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी कंपनियों जैसे Infosys और TCS के बजाय मिड-साइज़ कंपनियों पर फोकस करना बेहतर होगा। वहीं, बैंकों से उम्मीद है कि वे FY26 की सुस्ती के बाद कमाई की ग्रोथ को फिर से संभालेंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.