CII के नए कैप्टन: केमिकल, बिजनेस और बायोटेक के लीडर बनेंगे भारत की इंडस्ट्रियल पॉलिसी के 'मास्टरमाइंड'!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
CII के नए कैप्टन: केमिकल, बिजनेस और बायोटेक के लीडर बनेंगे भारत की इंडस्ट्रियल पॉलिसी के 'मास्टरमाइंड'!
Overview

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने **2026-27** के लिए अपने नए शीर्ष नेतृत्व का ऐलान कर दिया है। **Tata Chemicals** के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO **R. Mukundan** प्रेसिडेंट बनेंगे, **RP-Sanjiv Goenka Group** के वाइस चेयरमैन **Shashwat Goenka** वाइस प्रेसिडेंट होंगे, और **Bharat Biotech** की को-फाउंडर **Suchitra K. Ella** प्रेसिडेंट-डेजिग्नेट चुनी गई हैं।

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नए चेहरे, बड़ी जिम्मेदारियाँ

यह नया नेतृत्व केमिकल मैन्युफैक्चरिंग, डाइवर्सिफाइड इंडस्ट्रीज और बायोटेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है। R. Mukundan केमिकल सेक्टर में तीन दशक से ज़्यादा का अनुभव रखते हैं। Shashwat Goenka के नेतृत्व वाला RP-Sanjiv Goenka Group पावर, ग्रीन एनर्जी, केमिकल्स और रिटेल जैसे कई सेक्टर्स में फैला हुआ है। वहीं, Suchitra K. Ella बायोटेक और हेल्थकेयर, खासकर वैक्सीन डेवलपमेंट में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं। इन तीनों दिग्गजों का संयुक्त अनुभव भारत के प्रमुख ग्रोथ सेक्टर्स के लिए पॉलिसी को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा।

इंडस्ट्री का कैसा है हाल?

केमिकल इंडस्ट्री अभी ज़बरदस्त ग्रोथ की ओर बढ़ रही है, और 2026 तक मैन्युफैक्चरिंग में इसका योगदान 18.31% तक पहुंचने का अनुमान है। 'मेक इन इंडिया' और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी सरकारी स्कीमें मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही हैं। स्पेशियलिटी केमिकल्स की मांग फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल्स से बढ़ रही है।

Tata Chemicals, जो सोडा ऐश और स्पेशियलिटी प्रोडक्ट्स में एक बड़ा नाम है, उसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹19,411 करोड़ है। हालांकि, पिछले पांच साल में कंपनी की सेल्स ग्रोथ धीमी रही है और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी कम रहा है, लेकिन हाल ही में Morgan Stanley ने स्टॉक को 'Overweight' रेटिंग दी है, जो रिकवरी के संकेत दे रहा है।

RP-Sanjiv Goenka Group की फ्लैगशिप कंपनी CESC Ltd. की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹24,125 करोड़ से ₹247.36 बिलियन के आसपास है। इसका P/E रेश्यो लगभग 15.17x-15.68x है और एनालिस्ट्स का इस पर भरोसा बना हुआ है। CESC का इंटीग्रेटेड यूटिलिटी मॉडल 30 लाख से ज़्यादा ग्राहकों को सेवा देता है और हाल ही में इसने ठीक-ठाक सेल्स और प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है।

ज़ोरदार दांव के साथ कुछ रिस्क भी

हर बड़े दांव की तरह, यहां भी कुछ जोखिम हैं। केमिकल सेक्टर इनपुट कॉस्ट की अस्थिरता और सप्लाई चेन में रुकावटों से प्रभावित हो सकता है। Tata Chemicals को कमजोर सेल्स ग्रोथ और लो ROE जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। CESC रेगुलेटरी निगरानी के दायरे में काम करती है, जिससे टैरिफ नीतियों में बदलाव का असर पड़ सकता है। कंपनी का 1.17 का हाई डेट/इक्विटी रेश्यो इसे आर्थिक मंदी या बढ़ती ब्याज दरों के समय में कमजोर बना सकता है। 'मेड इन इंडिया ब्रांड स्कीम' और PLI जैसी पहलों से कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है।

आगे क्या?

एनालिस्ट्स केमिकल इंडस्ट्री के लिए शानदार ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, जिसमें भारत एक बड़ा एक्सपोर्टर बन सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को PLI जैसी स्कीमें और फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) से सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। CII की यह नई लीडरशिप सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी अडॉप्शन और एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ावा देने वाली पॉलिसी की वकालत करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.