एक्सपोर्ट रिबेट पेमेंट में तेजी का आदेश
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसके तहत, RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Export Products) और RoSCTL (Rebate of State and Central Taxes and Levies) के तहत आने वाले स्क्रॉल (scrolls) की प्रोसेसिंग अब तीन दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इन स्क्रॉल की प्रोसेसिंग में पहले काफी देरी हो रही थी, जिससे निर्यातकों को भारी वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
RoDTEP और RoSCTL को समझें
ये दोनों स्कीम्स भारतीय एक्सपोर्ट्स को ग्लोबल मार्केट में अधिक कॉम्पिटिटिव बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। RoDTEP स्कीम, एक्सपोर्ट वैल्यू का 0.3% से लेकर 3.9% तक का रिफंड देती है, जिसमें ऐसे सेंट्रल और स्टेट टैक्सेस और ड्यूटीज शामिल हैं जो कहीं और रिकवर नहीं हुए हैं। यह खासकर टेक्सटाइल और लेदर जैसे लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज में काम कर रहे MSMEs के लिए फायदेमंद है।
वहीं, RoSCTL स्कीम उन स्टेट और सेंट्रल टैक्सेस और लेवीज़ पर रिबेट देती है जो किसी अन्य माध्यम से कवर नहीं होते। इसका मुख्य लक्ष्य अपैरल (apparel), गारमेंट्स (garments) और मेड-अप्स (made-ups) के एक्सपोर्ट्स की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाना है। इन दोनों स्कीम्स का मकसद भारतीय एक्सपोर्ट्स को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध कराना है।
हालिया स्कीम एक्सटेंशन (Scheme Extension)
हाल ही में, भारतीय सरकार ने RoDTEP और RoSCTL दोनों स्कीम्स को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला ऊँचे फ्रेट कॉस्ट (freight costs) और ग्लोबल डिमांड में आई मंदी के बीच लिया गया है। RoDTEP स्कीम 30 सितंबर 2026 तक पूरी दरों पर जारी रहेगी। इसी तरह, अपैरल और मेड-अप्स के लिए RoSCTL स्कीम भी 30 सितंबर 2026 तक या 16वें फाइनेंस कमीशन (16th Finance Commission) के अप्रूव होने तक जारी रहेगी। यह टेक्सटाइल सेक्टर के लिए निरंतरता सुनिश्चित करता है। इन कदमों से सरकार की ग्लोबल ट्रेड और निर्यातकों को सपोर्ट करने की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।
