राहत का ऐलान: अब मिलेगा पूरा ब्याज
बजट 2026 के तहत एक अहम टैक्स सुधार किया गया है। अब से मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए जाने वाले ब्याज पर कोई TDS नहीं काटा जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी यह बदलाव, यह सुनिश्चित करेगा कि दुर्घटना पीड़ितों को उनके मुआवजे पर मिलने वाला पूरा ब्याज बिना किसी टैक्स कटौती के मिले।
क्यों आया यह बदलाव?
सरकार का मानना है कि MACT से मिलने वाला ब्याज, कमाई नहीं, बल्कि क्षतिपूर्ति (compensation) का हिस्सा है। इसे 'अन्य स्रोतों से आय' मानकर टैक्स काटना उचित नहीं था। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने इस फैसले पर जोर देते हुए कहा कि यह कदम सीधे तौर पर पीड़ित परिवारों को मदद पहुंचाने के लिए है। इस नियम के हटने से मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया तेज होगी और लंबे चलने वाले विवादों में कमी आएगी। Go Digit General Insurance के CIO, Parimal Heda ने इसे "एक लंबे समय से प्रतीक्षित, मानवीय कदम" बताया है।
पुराने नियम की मुश्किलें
आयकर अधिनियम की धारा 194A के तहत, MACT ब्याज पर TDS की कटौती अक्सर क्लेम की राशि को कम कर देती थी। इससे पीड़ितों के लिए यह एक अनावश्यक बोझ बन जाता था, खासकर उन लोगों के लिए जो नियमित टैक्सपेयर्स नहीं थे। इस बदलाव से ऐसी असमानता खत्म होगी और पीड़ितों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।
बीमा सेक्टर में खुशी
भारतीय बीमा सेक्टर ने इस फैसले का स्वागत किया है। HDFC ERGO General Insurance और Go Digit General Insurance जैसी कंपनियों का मानना है कि यह कदम ग्राहक-केंद्रितता को बढ़ावा देगा। इससे मोटर इंश्योरेंस को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और क्लेम प्रोसेस में अधिक कुशलता आएगी। देश में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बनी हुई हैं, जहां H1 2025 में ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर 26,770 से अधिक मौतें हुईं। ऐसे में, क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को आसान बनाना पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देगा।