बजट के पीछे की रणनीतिक चालें और राजनीतिक शोर
यूनियन बजट 2026-27 ने इकोनॉमी के मोर्चे पर कुछ खास योजनाओं को सामने रखा है। भले ही पश्चिम बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी और तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर एम.के. स्टालिन ने बजट को 'दिशाहीन' और 'निराशाजनक' बताकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, लेकिन सरकार का जोर इन चुनावी राज्यों में महत्वपूर्ण सेक्टर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर रहा है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने ₹12.2 लाख करोड़ के पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य रखा है, जिसका मकसद इकोनॉमी की रफ़्तार बनाए रखना और भारत को मजबूत बनाना है। इस बजट के ऐलान के बाद शेयर बाजार में भी हलचल दिखी, Sensex 1,100 अंकों से ज्यादा गिर गया।
तमिलनाडु: इंफ्रास्ट्रक्चर के पार, कई सेक्टर्स को फायदा
तमिलनाडु को बजट में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर से कहीं ज्यादा मिलता दिख रहा है। राज्य में खास रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। इसका मकसद माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, ताकि हम क्रिटिकल मिनरल्स के लिए दूसरे देशों, खासकर चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकें। यह भारत के रेयर अर्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने की एक बड़ी राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है। इसके अलावा, चेन्नई को हैदराबाद और बेंगलुरु से जोड़ने वाले दो हाई-SPEED रेल कॉरिडोर की योजनाएं भी हैं, जिनका उद्देश्य बड़े इकोनॉमिक हब के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाना है। राज्य के एग्री-सेक्टर के लिए भी खास ध्यान दिया गया है, जिसमें नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी नकदी फसलों के विकास के लिए विशेष स्कीमें शामिल हैं। सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर, प्राचीन आयरन एज के पुरातात्विक स्थल आदिचநல்லूर को हेरिटेज टूरिज्म डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने की योजना भी तमिलनाडु के लिए खास है।
पश्चिम बंगाल: इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव और औद्योगिक पुनरुद्धार
पश्चिम बंगाल के लिए बजट में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्रियल रिवाइवल पर फोकस किया गया है। दांकुनी से सूरत तक एक नया ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी और ट्रेड कनेक्टिविटी में सुधार होगा। वाराणसी-सिलिगुड़ी हाई-SPEED रेल कॉरिडोर (जो बिहार से भी गुजरेगा) का मकसद उत्तर बंगाल की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। इसके अलावा, बजट में एक मखाना बोर्ड और राज्य में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट की स्थापना का भी प्रस्ताव है। देश भर में 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को फिर से शुरू करने की एक बड़ी पहल भी की गई है, जिसका पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक औद्योगिक हब को फायदा मिल सकता है। साथ ही, जूट प्रोडक्शन के लिए भी नई स्कीम लाई गई है, जिसमें राज्य अग्रणी है। एजुकेशन मिनिस्ट्री के लिए भी आवंटन बढ़ा है, जिसमें कोलकाता के NIPER को अपग्रेड करने पर भी ध्यान दिया गया है।
सेक्टर्स पर असर और इकोनॉमिक समीकरण
रेयर अर्थ कॉरिडोर पर बजट का जोर, क्रिटिकल मिनरल्स में घरेलू क्षमता बढ़ाने की सरकार की रणनीतिक जरूरत को दिखाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर हाई-SPEED रेल और फ्रेट कॉरिडोर में भारी निवेश, सरकार के ग्रोथ इंजन के रूप में इंफ्रा को बढ़ावा देने के एजेंडे के अनुरूप है। यह कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और संबंधित सेक्टर्स में डिमांड बढ़ा सकता है। हाई-वैल्यू कैश क्रॉप्स और एग्री सलाह पर जोर, किसानों की आय बढ़ाने की एक लंबी अवधि की रणनीति का संकेत देता है। पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स और MSMEs को सपोर्ट करने से डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और सेल्फ-रिलायंस को मजबूती मिलेगी। राजनीतिक मतभेदों के बीच, ये वित्तीय कदम रणनीतिक क्षेत्रों में बाधाओं को दूर करने और आयात निर्भरता कम करने के स्पष्ट प्रयास दर्शाते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए फिस्कल डेफिसिट 4.3% रहने का अनुमान है।