वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। डेरिवेटिव्स सेगमेंट में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में अचानक की गई बढ़ोतरी को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने ट्रेडर्स की लागत बढ़ा दी।
STT Hike बनी बिकवाली की वजह
बजट की घोषणा के बाद, BSE Sensex 1,547 अंक या 1.88% की गिरावट के साथ 80,722.94 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 495 अंक या 1.96% की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,825.45 पर बंद हुआ। यह बड़ी गिरावट मुख्य रूप से फ्यूचर्स (Futures) और ऑप्शंस (Options) ट्रेडिंग पर STT में की गई बड़ी बढ़ोतरी के कारण आई। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, वहीं ऑप्शंस पर STT को 0.10% और 0.125% की दर से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इस कदम से ट्रेडिंग की लागत में सीधा असर पड़ा, जिससे कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। MCX, Angel One और BSE जैसे वॉल्यूम पर निर्भर कंपनियों में खास गिरावट आई, जिसमें MCX के शेयर 12% और Angel One व BSE के शेयर 8% से अधिक गिरे।
IT सेक्टर को मिला बूस्ट, बायबैक टैक्स में राहत
बाजार की गिरावट के विपरीत, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया। बजट में शेयर बायबैक (Buyback) पर सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन्स (Capital Gains) के तौर पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे जानकारों ने सराहा है। इस बदलाव से माइनॉरिटी शेयरधारकों को फायदा होने की उम्मीद है। इस नीतिगत बदलाव का IT कंपनियों पर सकारात्मक असर पड़ा। Wipro और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में करीब 2% की बढ़ोतरी देखी गई। प्रमुख IT सेवा फर्म TCS का P/E रेश्यो 23.57 से 23.96 के बीच रहा, और इसकी मार्केट कैप लगभग ₹1.13 लाख करोड़ से ₹11.52 लाख करोड़ तक रही। 1 फरवरी 2026 को TCS का शेयर 2.51% चढ़कर ₹3,202.40 पर बंद हुआ। IT सेवाओं के लिए सेफ हार्बर (Safe Harbour) की सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दी गई है, और कॉमन सेफ हार्बर मार्जिन 15.5% रखा गया है, जिसने इस सेक्टर को और मजबूती दी।
टूरिज्म, ज्वेलरी और EMS सेक्टर में तेजी
कुछ खास सेक्टरों के लिए बजट में किए गए ऐलान से भी सकारात्मक हलचल देखने को मिली। टूरिज्म इंडस्ट्री को विदेश यात्रा पैकेजों पर लगने वाले टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) में बड़ी राहत मिली है, जिसे 5% और 20% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इससे आउटबाउंड टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ज्वेलरी (Jewellery) स्टॉक्स में उछाल देखा गया क्योंकि सोना और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) में कोई बदलाव नहीं किया गया। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर को 40,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के आउटले (Outlay) से बड़ा बूस्ट मिला, जिससे Dixon Technologies और Kaynes Technology जैसे शेयरों में तेजी आई।
डिफेंस और PSU बैंक शेयरों पर दबाव
दूसरी ओर, डिफेंस (Defence) सेक्टर के शेयर गिर गए। FY27 के लिए प्रस्तावित कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) 7.85 लाख करोड़ रुपये था, जो इंडस्ट्री की उम्मीदों के मुताबिक नहीं था। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) बैंकों में भारी गिरावट आई, Nifty PSU Bank इंडेक्स 3.8% फिसल गया। बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए उच्च-स्तरीय समिति के गठन और सरकारी उधारी योजनाओं में बढ़ोतरी की चिंताओं ने PSU बैंक शेयरों पर दबाव डाला।
मैक्रो आउटलुक और विदेशी निवेशक
विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) के लिए खास प्रोत्साहन की कमी को लेकर भी बाजार की भावना प्रभावित हुई, जो पहले से ही भारतीय इक्विटी में बिकवाल रहे हैं। मैक्रो (Macro) मोर्चे पर, सरकार ने FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को GDP का 4.3% अनुमानित किया है और पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया है, जो फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित ग्रोथ पर सरकार के फोकस को दर्शाता है।