Budget 2026: STT Hike ने उड़ाए डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के होश! बाज़ार में आई गिरावट, पर टैक्स रिफॉर्म्स की सौगात

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AuthorAditya Rao|Published at:
Budget 2026: STT Hike ने उड़ाए डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के होश! बाज़ार में आई गिरावट, पर टैक्स रिफॉर्म्स की सौगात
Overview

Union Budget 2026 ने शेयर बाज़ार को तगड़ा झटका दिया है। सरकार ने डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर Securities Transaction Tax (STT) में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिससे तुरंत बाज़ार में बिकवाली हावी हो गई। हालांकि, इस बजट में टैक्स नियमों को सरल बनाने और निश्चितता लाने के लिए कई बड़े रिफॉर्म्स का भी प्रस्ताव है।

बजट का पहला झटका: डेरिवेटिव्स पर STT का बढ़ना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश करते हुए सबसे बड़ा सरप्राइज डेरिवेटिव्स सेगमेंट को दिया। उन्होंने फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर इसे 0.1% से बढ़ाकर 0.15% करने का ऐलान किया। पूर्व CBDT सदस्य अखिलेश रंजन ने इसे 'शॉकर' बताया है। इस बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि अब फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने वालों को ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा।

बाज़ार पर असर और जानकारों की राय

इस अचानक STT Hike ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स को चिंतित कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी (Liquidity) पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह कदम सट्टेबाजी (Speculation) को कम करने और रिटेल इन्वेस्टर्स की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को 'जहर' करार देते हुए इस फैसले का समर्थन किया है।

टैक्स निश्चितता और रिफॉर्म्स की ओर कदम

Derivatives पर STT Hike के विपरीत, बजट में टैक्स सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सरकार ने सेफ हार्बर रूल्स (Safe Harbour Rules) को मजबूत करने, एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (APA) मैकेनिज्म को बढ़ावा देने और ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing) को सरल बनाने जैसे रिफॉर्म्स का प्रस्ताव दिया है। इन कदमों से खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) के लिए टैक्स का माहौल ज्यादा अनुमानित (Predictable) होगा।

टैक्स डिफॉल्ट पर नरमी और बायबैक पर नया नियम

सबसे खास बात यह है कि सरकार ने कई टैक्स डिफॉल्ट्स को डी-क्रिमिनलाइज (Decriminalize) करने का फैसला लिया है। इसका मतलब है कि छोटी-मोटी गलतियों पर अब जेल जाने का खतरा कम होगा, जो टैक्सपेयर्स और एडमिनिस्ट्रेशन के बीच विश्वास बढ़ाएगा। इसके अलावा, शेयर बायबैक (Share Buybacks) पर अब कैपिटल गेन्स (Capital Gains) की तरह टैक्स लगेगा, जिससे कंपनियों की डिविडेंड (Dividend) बांटने की रणनीति पर असर पड़ सकता है।

मैक्रो इकोनॉमी पर फोकस: इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश

बाजार की चिंता के बावजूद, बजट का मुख्य फोकस लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ पर है। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए रिकॉर्ड ₹12.2 ट्रिलियन का भारी आवंटन किया है। यह कदम अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद करेगा। मौजूदा समय में, भारतीय बाज़ार के बेंचमार्क Nifty 50 का P/E रेश्यो लगभग 22.0 के आसपास है, जो इन सभी बड़े नीतिगत बदलावों के बीच बाजार के मूल्यांकन (Valuation) का संकेत देता है।

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