Budget 2026: सरकार का बड़ा दांव! MGNREGA की जगह ₹95,692 Cr की नई रूरल जॉब्स स्कीम लॉन्च

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Budget 2026: सरकार का बड़ा दांव! MGNREGA की जगह ₹95,692 Cr की नई रूरल जॉब्स स्कीम लॉन्च
Overview

Union Budget 2026 में सरकार ने ग्रामीण रोजगार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। MGNREGA की जगह अब 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) स्कीम लाई गई है, जिसके लिए **₹95,692 करोड़** का भारी आवंटन किया गया है। इस नई स्कीम के तहत, अब ग्रामीण परिवारों को सालाना **125 दिन** रोज़गार की गारंटी मिलेगी।

बजट 2026: ग्रामीण रोजगार में बड़ा बदलाव, MGNREGA की जगह नई स्कीम लॉन्च

Union Budget 2026 में सरकार ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह अब 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) नाम की नई स्कीम को लॉन्च किया गया है। इस नई स्कीम के लिए बजट में ₹95,692.31 करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है, जो पिछले साल MGNREGA के लिए रखे गए ₹86,000 करोड़ से काफी ज्यादा है। इस कुल आवंटन में से ₹30,000 करोड़ स्कीम के संक्रमण (Transition) के दौरान MGNREGA कंपोनेंट के लिए अलग रखे गए हैं।

125 दिन की गारंटी और 'नो-वर्क' पीरियड का अनोखा प्रोविज़न

VB-G RAM G स्कीम की सबसे खास बात यह है कि अब हर ग्रामीण परिवार को सालाना 125 दिन रोज़गार की गारंटी मिलेगी, जो MGNREGA के 100 दिन के मुकाबले 25 दिन ज़्यादा है। इसके अलावा, इस स्कीम में एक 'नो-वर्क' पीरियड (No-Work Period) का भी प्रोविज़न है, जिसकी कुल अवधि 60 दिन होगी। इसे खेती के पीक सीज़न, यानी बुवाई और कटाई के समय से बाहर रखा जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के लिए मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे, वहीं वर्कर्स को साल के बाकी 305 दिन रोज़गार की गारंटी मिले। पेमेंट की बात करें तो, मज़दूरी का भुगतान साप्ताहिक या पंद्रह दिनों के अंदर करने का नियम बनाया गया है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी।

स्टेट्स पर बढ़ी ज़िम्मेदारी, बदलेगा फंडिंग का ढांचा

इस स्कीम में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव यह किया गया है कि अब यह सेंट्रल सेक्टर स्कीम से बदलकर एक Centrally Sponsored फ्रेमवर्क में आ गई है। इसका मतलब है कि अब स्टेट्स को न केवल प्रशासनिक ज़िम्मेदारी उठानी होगी, बल्कि फंड का कुछ हिस्सा भी वहन करना होगा। एक सामान्य नियम के तहत, ज़्यादातर स्टेट्स को 60:40 के रेशियो में खर्च साझा करना होगा, जबकि नॉर्थ-ईस्टर्न और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 होगा। स्टेट्स को सेंट्रल सरकार द्वारा तय किए गए नॉर्म्स से ज़्यादा खर्च होने पर उसे खुद वहन करना होगा, साथ ही अनएम्प्लॉयमेंट अलाउंस (Unemployment Allowance) का भुगतान भी उन्हीं की ज़िम्मेदारी होगी। इस बदलाव से स्टेट गवर्नमेंट्स पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ने की चिंता जताई जा रही है।

'विकसित भारत 2047' विज़न और इकोनॉमी पर असर

यह बड़ा आवंटन और स्कीम का नया ढांचा 'विकसित भारत 2047' के व्यापक विज़न का एक अहम हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2047 तक एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण करना है। एनालिस्ट्स का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में रोज़गार के लिए इतना बड़ा आवंटन रूरल डिमांड को बढ़ावा देगा, जिससे FMCG, एग्री-इनपुट्स और फार्म टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स को सीधा फायदा होगा। रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर और रोज़गार पर फोकस से इनकम सिक्योरिटी बढ़ेगी और कंजम्पशन-लेड ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा, जो देश की ओवरऑल इकोनॉमिक रेज़िलिएंस को मजबूत करेगा। यह कदम रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी को मॉडर्न बनाने और उसे लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर व क्लाइमेट रेज़िलिएंस गोल्स के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विधायी (Legislative) रिसेट है।

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