Union Budget 2026: शेयर बाजार को झटका! STT Hike और Buyback Tax से निवेशकों में मायूसी, पर सरकार का 'विक्सित भारत' रोडमैप

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Union Budget 2026: शेयर बाजार को झटका! STT Hike और Buyback Tax से निवेशकों में मायूसी, पर सरकार का 'विक्सित भारत' रोडमैप
Overview

साल 2026 का यूनियन बजट पेश हो चुका है, जिसने बाजार को तत्काल राहत देने के बजाय देश के भविष्य के लिए एक लंबी अवधि का रोडमैप तैयार किया है। हालांकि, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी और बायबैक पर नए टैक्स के ऐलान से बाजार की धारणा (sentiment) प्रभावित हुई और गिरावट दर्ज की गई। लेकिन, बजट का मुख्य जोर भारत को वैश्विक अस्थिरता से बचाने और आर्थिक मजबूती व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर है।

तत्काल राहत नहीं, बस एक रणनीतिक रोडमैप

यूनियन बजट 2026 को भारत के भविष्य के लिए एक रणनीतिक रोडमैप के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। इसने स्टॉक मार्केट के खिलाड़ियों को तत्काल राहत देने के बजाय एक लंबी अवधि की दिशा दिखाई है। डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में की गई वृद्धि और बायबैक पर नए टैक्स के ऐलान ने बाजार में गिरावट को हवा दी।

बाजार की प्रतिक्रिया

जैसे ही बजट में सट्टेबाजी वाली गतिविधियों पर लगाम कसने वाले उपायों की घोषणा हुई, कारोबार के अंत में बाजार में एक उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। फ्यूचर्स और ऑप्शंस के प्रीमियम और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर STT को बढ़ाया गया है। इसके अतिरिक्त, बायबैक पर अब कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। यह कदम टैक्सेशन को भले ही सरल बनाए, लेकिन इसने बाजार की धारणा पर नकारात्मक प्रभाव डाला।

लंबी अवधि का विजन: आत्मनिर्भरता और लचीलापन

बाजार की तात्कालिक चिंताओं से हटकर, इस बजट का मुख्य उद्देश्य भारत की 'विक्सित भारत' की महत्वाकांक्षाओं की नींव को मजबूत करना है। सरकार की कोशिश है कि अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक तूफानों से बचाया जा सके। वित्त मंत्री ने इसे 'पहला कर्तव्य' बताया है - उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और लचीलेपन (resilience) को बढ़ाकर सतत आर्थिक विकास को गति देना।

प्रमुख पहलें

इस बड़े विजन को साकार करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए नई स्कीम, और औद्योगिक क्लस्टर्स को फिर से सक्रिय करने की योजनाएं शामिल हैं। सरकार ने पहले से लागू टैक्स राहतों और अहम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के ज़रिए घरेलू खपत और आर्थिक स्थिरता को भी मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

MSMEs और विभिन्न सेक्टरों को समर्थन

छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को विशेष तवज्जो दी गई है। एक समर्पित SME ग्रोथ फंड और टियर II और III शहरों में कंपनियों को अनुपालन (compliance) में मदद के लिए 'कॉर्पोरेट मित्र' जैसी पहलें शुरू की गई हैं। विनिर्माण (manufacturing), सेवा (services), और पर्यटन (tourism) जैसे सेक्टरों को भी व्यवसाय को आसान बनाने वाले विभिन्न सुधारों और टैक्स रियायतों से लाभ होगा।

राजकोषीय अनुशासन

वित्त मंत्री ने राजकोषीय अनुशासन (fiscal discipline) को बनाए रखने पर जोर दिया है। फिस्कल डेफिसिट को 2025-26 के लिए जीडीपी के 4.4% और 2026-27 के लिए 4.3% पर रखने का लक्ष्य है। सरकार का इरादा 2030 तक डेट-जीडीपी रेशियो को 50+/-1% के दायरे में लाने का है। वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। यह निजी क्षेत्र के निवेश में कमी के बीच ग्रोथ को सहारा देने के लिए सरकार के निरंतर निवेश का संकेत देता है।

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