STT Hike का असर: बाज़ार में भूचाल!
बजट 2026 के आते ही बाज़ार में घबराहट फैल गई। इसका सबसे बड़ा कारण डेरिवेटिव्स यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में STT (Securities Transaction Tax) की दरें बढ़ाना रहा। 1 अप्रैल 2026 से फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस पर यह 0.10% / 0.125% से बढ़ाकर 0.15% हो गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम ज़रूरत से ज़्यादा अटकलों (Speculation) और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग को रोकने के लिए उठाया गया है, खासकर उन सेगमेंट में जहां ज़्यादातर रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान होता है। इस ऐलान के तुरंत बाद, 1 फरवरी 2026 को शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त गिरावट आई। सेंसेक्स (Sensex) 1,500 अंकों से ज़्यादा लुढ़क गया, और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 495 अंक नीचे आ गया। इस बिकवाली के चलते बाज़ार से करीब ₹9.4 लाख करोड़ की मार्केट कैप (Market Cap) साफ हो गई। एनालिस्ट्स और ट्रेडर्स ने इस STT Hike को लागत बढ़ाने वाला कदम बताते हुए निराशा जताई है, जिसका असर डेरिवेटिव्स सेगमेंट की लिक्विडिटी (Liquidity) और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ सकता है।
गोल्ड बॉन्ड और बायबैक टैक्सेशन में बड़े बदलाव
STT Hike के अलावा, बजट में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और शेयर बायबैक (Share Buyback) के टैक्सेशन में भी अहम बदलाव किए गए हैं। SGBs के मामले में, मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) में मिलने वाली छूट अब केवल उन निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने इसे सीधे जारी होने के समय खरीदा था। 1 अप्रैल 2026 के बाद सेकेंडरी मार्केट से SGBs खरीदने वाले निवेशकों को रिडेम्पशन (Redemption) पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा, जो पहले सभी निवेशकों के लिए लागू था। इस बदलाव का मकसद SGBs को ट्रेडिंग एसेट के बजाय एक सेविंग इंस्ट्रूमेंट के तौर पर बढ़ावा देना है। शेयर बायबैक के नियमों में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। अब बायबैक से मिलने वाली राशि को डिविडेंड (Dividend) के बजाय कैपिटल गेन्स के तौर पर टैक्सेबल (Taxable) किया जाएगा। यह माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि उनका टैक्स भार कम हो सकता है, लेकिन प्रमोटर्स के लिए यह एडिशनल बायबैक टैक्स (Tax) के कारण प्रभावी दर 22% (कॉर्पोरेट) और 30% (नॉन-कॉर्पोरेट) तक पहुंच सकती है। यह कदम टैक्स आर्बिट्रेज (Tax Arbitrage) को रोकने के लिए उठाया गया है।
इक्विटी LTCG टैक्स अपरिवर्तित, आर्थिक सेहत पर नज़र
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की दरें पहले जैसी ही रहेंगी। एक साल से ज़्यादा होल्डिंग अवधि वाले LTCG पर 12.5% की दर से टैक्स लगेगा, जिसमें सालाना ₹1.25 लाख तक की छूट भी जारी रहेगी। वहीं, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20% का टैक्स लागू होगा। बाज़ार में तेज़ी को देखते हुए कई निवेशक टैक्स में रियायत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन इन बदलावों के अभाव में उन्होंने अपनी मुनाफावसूली (Profit Booking) की रणनीतियों पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है।
व्यापक आर्थिक मोर्चे पर, बजट में FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) का अनुमान 4.3% रखा गया है, जो FY26 के रिवाइज्ड अनुमान 4.4% से थोड़ा कम है। वहीं, नॉमिनल GDP ग्रोथ (Nominal GDP Growth) का लक्ष्य 10% रखा गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव है।