इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का ज़ोर बरकरार
कैपेक्स (Capex) में इस बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर सड़कों, रेलवे और जलमार्गों पर दिखेगा। सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को मज़बूत करना है। रेलवे के लिए ₹2.78 लाख करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है, जिसमें पूरे देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना शामिल है। हाईवे प्रोजेक्ट्स को भी ज़ोरदार फंड मिलेगा, इन्हें ₹3.09 लाख करोड़ दिए गए हैं, जो पिछले साल से 8% ज़्यादा है।
वित्तीय स्थिरता और अन्य सेक्टरों को आवंटन
टैक्सपेयर्स को स्थिरता देने के लिए, सरकार ने मौजूदा टैक्स स्लैब में कोई भी बदलाव न करने का फैसला किया है। राज्यों को डिवॉल्यूशन के तौर पर ₹1.4 लाख करोड़ दिए जाएंगे। डिफेंस (रक्षा) बजट में 15% से ज़्यादा की बढ़त के साथ इसे ₹7.84 लाख करोड़ किया गया है। वहीं, हेल्थ (स्वास्थ्य) और परिवार कल्याण सेक्टर को लगभग ₹1.05 लाख करोड़ मिले हैं, जो 9-10% की बढ़ोतरी है। आयुष्मान भारत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी विशेष फंड जारी किया गया है।
मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन (शिक्षा मंत्रालय) का बजट 8.3% बढ़ाकर ₹1.39 लाख करोड़ किया गया है। कुल मिलाकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर (जिसमें हाईवे, रेल और अन्य इंफ्रा शामिल हैं) के लिए करीब ₹5.99 लाख करोड़ का फंड है। हालांकि, रूरल डेवलपमेंट (ग्रामीण विकास) और एग्रीकल्चर (कृषि) के आवंटन में मामूली बढ़त देखी गई है, लेकिन बजट ने साफ तौर पर कैपिटल-इंटेंसिव इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और ज़रूरी सामाजिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।