बजट का फोकस: अर्थव्यवस्था को रफ्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026-27 में देश को एक मजबूत आर्थिक रास्ते पर ले जाने का विजन पेश किया है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को खास तवज्जो दी गई है। इसका मकसद घरेलू मांग को बढ़ाना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की स्थिति को मजबूत करना है। बजट की घोषणाओं के बाद शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन यह बजट बड़े लक्ष्यों के साथ लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल ग्रोथ को सपोर्ट करता है।
मैक्रो इकोनॉमिक टारगेट और मार्केट का रिएक्शन
सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए 4.3% का फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) टारगेट रखा है। इसके साथ ही ₹12.2 लाख करोड़ के भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का ऐलान किया गया है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट पर इस फोकस का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और रोजगार पैदा करना है। ग्रोथ-ओरिएंटेड इन उपायों के बावजूद, बजट वाले दिन शेयर बाजार में काफी वोलेटिलिटी रही, जिसमें बड़े इंडेक्स शुरुआती बढ़त के बाद गिर गए। यह निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है, शायद कुछ खास फिस्कल मेजर्स या ग्लोबल चुनौतियों के चलते ग्रोथ अनुमानों के री-इवैल्यूएशन की चिंताएं भी हैं। Morgan Stanley के अनुमान के मुताबिक, FY27 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10% रह सकती है, जो एक सावधानी भरी उम्मीद जगाता है।
सेक्टर-स्पेसिफिक पहलें और चुनौतियां
बजट में हेल्थकेयर सेक्टर पर खास ध्यान दिया गया है। 17 कैंसर दवाओं और 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में पूरी छूट दी गई है। साथ ही, खास मेडिकल फूड्स पर भी कंसेशन हैं। हेल्थकेयर में लगातार पब्लिक इन्वेस्टमेंट से मरीजों और हेल्थ प्रोफेशनल्स, दोनों को फायदा होने की उम्मीद है। इसमें अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के विस्तार और नर्सिंग केयरगिवर्स के सपोर्ट जैसी पहलें भी शामिल हैं।
MSME सेक्टर को एक बड़ा बूस्ट मिला है। ₹10,000 करोड़ के SME ग्रोथ फंड (SME Growth Fund) की शुरुआत की गई है, जिसका मकसद हाई-पोटेंशियल फर्म्स को इक्विटी सपोर्ट देना और उन्हें स्केल अप करना है। सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड (Self-Reliant India Fund) के लिए ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप भी माइक्रो-एंटरप्राइजेज को रिस्क कैपिटल देने में मदद करेगा। हालांकि, GST में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की पुरानी समस्या अभी भी कुछ मैन्युफैक्चरर्स के वर्किंग कैपिटल को प्रभावित कर रही है, भले ही प्रोविजनल रिफंड मैकेनिज्म पेश किए गए हों।
आम आदमी के लिए क्या?
वेतनभोगी लोगों और मध्यम वर्ग के लिए, बजट में डायरेक्ट टैक्स रिलीफ (Direct Tax Relief) सीमित है, क्योंकि न्यू रेजीम (New Regime) के इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Slabs) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, रिवाइज्ड टैक्स रिटर्न (Revised Tax Returns) के लिए डेडलाइन बढ़ाने और एजुकेशनल व मेडिकल रेमिटेंस पर टीडीएस (TCS) को कम करने जैसे कंप्लायंस मेजर्स (Compliance Measures) से कुछ राहत मिली है। लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deductions) या अन्य डायरेक्ट फाइनेंशियल बेनिफिट्स की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं।
सीनियर सिटिजन को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के विस्तार से फायदा होगा। अब 70 साल से ऊपर के लोग भी ₹5 लाख तक का सालाना हेल्थ कवरेज पा सकेंगे। जेरियाट्रिक केयर और असिस्टिव टेक्नोलॉजीज पर फोकस हेल्थकेयर में इस वर्ग की जरूरतों को भी पूरा करेगा।
रियल एस्टेट के मोर्चे पर, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लिए आवंटन में खासी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) सेगमेंट के लिए किसी नए खास ऐलान की कमी से स्टेकहोल्डर्स निराश हैं, क्योंकि इस सेगमेंट की बिक्री हिस्सेदारी में गिरावट आई है। बजट में रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस (Infrastructure Status) दिया गया है, जिसका मकसद रेंटल मार्केट को फॉर्मलाइज करना है।
भविष्य की राह
बजट का मुख्य जोर कैपिटल एक्सपेंडिचर और मैन्युफैक्चरिंग पर है, जिसका लक्ष्य लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ और मजबूती हासिल करना है। बायोफार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर टारगेटेड इनिशिएटिव्स (Targeted Initiatives) से लाभान्वित होने की स्थिति में हैं। हालांकि, इन उपायों की सफलता प्रभावी इम्प्लीमेंटेशन (Implementation) और GST इनवर्टेड ड्यूटी जैसी संरचनात्मक समस्याओं को दूर करने की क्षमता पर निर्भर करेगी, साथ ही आम नागरिक के लिए अफोर्डेबिलिटी से जुड़े व्यापक सरोकारों को भी संबोधित करना होगा।