सरकार ने बजट 2026 में टैक्सपेयर्स के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि अब इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को रिवाइज करने की अंतिम तारीख को 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। इससे टैक्सपेयर्स को फाइनेंशियल ईयर के खत्म होने के बाद अपनी ओरिजिनल फाइलिंग में किसी भी तरह की गलती या चूक को सुधारने के लिए 12 महीने का लंबा समय मिलेगा, जो कि पहले सिर्फ 9 महीने था।
यह कदम टैक्सपेयर्स को अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देने और कंप्लायंस को आसान बनाने के सरकारी इरादे को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि इस बढ़ी हुई समय-सीमा से अनजाने में हुई गलतियों को सुधारने में मदद मिलेगी, लिटिगेशन (litigation) के मामले कम होंगे और टैक्सपेयर्स व रेवेन्यू अथॉरिटीज (revenue authorities) के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होगा। इससे स्वैच्छिक कंप्लायंस (voluntary compliance) को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रिवाइज्ड रिटर्न (revised return) ओरिजिनल फाइलिंग की जगह लेता है और इसे टैक्स की प्रक्रिया पूरी होने से पहले कभी भी फाइल किया जा सकता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यदि कोई असेसिंग ऑफिसर (assessing officer) सेक्शन 143(3) के तहत आपकी रिटर्न की जांच (scrutiny) शुरू कर चुका है, तो आप इसके बाद रिवाइज्ड रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139(5) के तहत नियंत्रित किया जाता है।
इस बढ़ी हुई फ्लेक्सिबिलिटी के साथ, एक मामूली बदलाव यह है कि यदि 9 महीने की शुरुआती अवधि के बाद रिवीजन फाइल किया जाता है, तो उस पर एक छोटी, नाममात्र की फीस (nominal fee) लागू होगी। यह कदम भारत में टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को सरल और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जो देर से जानकारी मिलने या टैक्स नियमों की जटिलताओं के कारण शुरुआती समय-सीमा का पालन नहीं कर पाते। यह बदलाव वैश्विक टैक्स प्रथाओं के साथ तालमेल बिठाने और टैक्सपेयर्स के लिए विवादों को कम करने में भी सहायक होगा।