बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शराब और बियर की कीमतें इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक पैसेंजर की शिकायत के बाद एयरपोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने डायनामिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) के सुझाव पर गौर करने की बात कही है। सवाल ये है कि आखिर एयरपोर्ट पर ये चीजें इतनी महंगी क्यों बिकती हैं?
पैसेंजर की शिकायत से छिड़ी बहस
हाल ही में एक पैसेंजर ने बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बियर और व्हिस्की की कीमतों पर हैरानी जताई। पैसेंजर के मुताबिक, 330 ml बियर की कीमत ₹929 से ₹1,059 तक थी, वहीं 60 ml प्रीमियम व्हिस्की के लिए ₹1,549 वसूले जा रहे थे। पैसेंजर ने सुझाव दिया कि इतनी महंगी कीमतों के कारण बिक्री कम हो सकती है और एयरपोर्ट को ऑफ-पीक आवर्स (Off-Peak Hours) में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए डायनामिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) पर विचार करना चाहिए।
एयरपोर्ट का ऑपरेशनल मॉडल और रेवेन्यू शेयरिंग
इस फीडबैक के जवाब में बेंगलुरु एयरपोर्ट ने कहा है कि यह सुझाव उनके ऑपरेशंस टीम को रिव्यू के लिए भेज दिया गया है। एयरपोर्ट्स को अक्सर प्रीमियम रिटेल स्पेस माना जाता है, लेकिन यहां की प्राइसिंग स्ट्रक्चर काफी कॉम्प्लेक्स होती है। इसमें हाई इंफ्रास्ट्रक्चर मेंटेनेंस (Infrastructure Maintenance) और ऑपरेशंस के साथ-साथ वेंडर्स (Vendors) के लिए रेवेन्यू-शेयरिंग एग्रीमेंट्स (Revenue-Sharing Agreements) का बड़ा रोल होता है।
इन मॉडल्स के तहत, वेंडर्स को अपनी कुल बिक्री का एक हिस्सा एयरपोर्ट ऑपरेटर को देना पड़ता है। इस भुगतान को कवर करने और मुनाफे में रहने के लिए, वेंडर्स अक्सर एयरपोर्ट के बाहर की तुलना में ज्यादा कीमतें चार्ज करते हैं।
एविएशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का आर्थिक गणित
सिर्फ एयरपोर्ट की अपनी डील ही नहीं, बल्कि भारत के एविएशन (Aviation) और हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) सेक्टर में टैक्स का भारी बोझ भी कीमतों को बढ़ाता है। एविएशन इंडस्ट्री पर अक्सर बड़े टैक्स स्ट्रक्चर लागू होते हैं, जिनका असर अंततः ग्राहकों पर पड़ता है। इसके अलावा, हाई-ट्रैफिक एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को ऑपरेट करने के लिए बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital Investment) की जरूरत होती है, जिससे वेंडर्स के लिए रेंटल (Rental) और सर्विस कॉस्ट (Service Cost) बढ़ जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
एयरपोर्ट सेक्टर पर नजर रखने वालों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे नॉन-एरोनॉटिकल रेवेन्यू (Non-Aeronautical Revenue) को कैसे बढ़ाएं, जिसमें फूड, बेवरेज (Beverage) और रिटेल (Retail) शामिल हैं, और साथ ही फुटफॉल (Footfall) और कस्टमर सैटिस्फेक्शन (Customer Satisfaction) को भी बनाए रखें। एयरपोर्ट ग्राहकों के पास अक्सर कम विकल्प होते हैं, इसलिए डायनामिक प्राइसिंग की संभावना सीमित हो सकती है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अपने रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल में बदलाव करते हैं या फिर कस्टमर्स के दबाव के चलते वे और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग (Competitive Pricing) अपनाते हैं।
