फिस्कल डेफिसिट में ऐतिहासिक गिरावट
West Bengal के वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए अपने ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) का 2.91% फिस्कल डेफिसिट रहने का अनुमान जताया है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि राज्य का घाटा लगभग एक दशक में पहली बार 3% की अहम सीमा से नीचे आया है। आखिरी बार ऐसा 2017-18 फाइनेंशियल ईयर में हुआ था। यह अनुमान 16वें फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसने राज्यों को अपने फिस्कल डेफिसिट को GSDP के 3% तक सीमित रखने की सलाह दी थी। FY27 के लिए अनुमानित ₹62,423.36 करोड़ का घाटा, FY26 के संशोधित अनुमान ₹67,773.98 करोड़ से कम है। इसी दौरान, राज्य के GSDP में 8% की वृद्धि होकर ₹21,48,244 करोड़ होने का अनुमान है।
घाटा कम होने के पीछे क्या है खास?
इस बेहतर फिस्कल आउटलुक के पीछे कई कारण हैं। सबसे अहम है खर्चों पर लगाम और केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड (ग्रांट्स) में भारी बढ़ोतरी। FY27 में रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (राजस्व व्यय) में केवल 8.22% की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो FY26 के 12.8% की तुलना में काफी कम है। इसका एक बड़ा कारण पेंशन पर होने वाले खर्च में 27.77% की कमी आना है। वहीं, राज्य के कुल रेवेन्यू रिसिप्ट्स (राजस्व प्राप्तियों) में 17.5% की जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान है। इसमें सबसे बड़ा योगदान केंद्र सरकार से मिलने वाले ग्रांट्स-इन-एड (अनुदान) में 115.75% की शानदार उछाल का है। इसके अलावा, राज्यों के टैक्स और ड्यूटी में हिस्सेदारी में भी 9.69% की वृद्धि हुई है। हालांकि, राज्य के अपने टैक्स रेवेन्यू (own tax revenue) में बढ़ोतरी का अनुमान सिर्फ 6.2% है, जो इन बाहरी फंड्स पर निर्भरता को दर्शाता है।
क्या यह सुधार टिकाऊ है?
हालांकि, फिस्कल डेफिसिट का यह आंकड़ा सुनने में बहुत अच्छा लग रहा है, लेकिन इसके पीछे का सच जानना भी जरूरी है। West Bengal ऐतिहासिक रूप से केंद्र से मिलने वाले फंड्स पर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा निर्भर रहा है। FY27 के बजट में केंद्र से ग्रांट्स में हुई यह भारी बढ़ोतरी जहां अभी राहत दे रही है, वहीं इसकी लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) पर सवाल खड़े करती है। 16वां फाइनेंस कमीशन 'कम्प्लायंस-ड्रिवन फिस्कल फेडरलिज्म' पर जोर दे रहा है, जिसका मतलब है कि राज्यों को घाटे की सीमा का पालन करना होगा और ऑफ-बजट बोरिंग से बचना होगा। राज्य का 2.91% का अनुमान इस निर्देश के अनुकूल है, लेकिन रेवेन्यू का स्रोत महत्वपूर्ण है। राज्य के अपने टैक्स रेवेन्यू में 6.2% की मामूली वृद्धि, GSDP ग्रोथ की तुलना में धीमी है, जो भविष्य में भी बाहरी मदद पर निर्भरता का संकेत देती है।
कर्ज का गणित और कैपिटल इन्वेस्टमेंट का दम
घाटे को काबू में रखने के बावजूद, राज्य मार्केट से उधार (मार्केट बोरिंग) लेने की योजना जारी रखे हुए है। FY27 के लिए ₹80,444.55 करोड़ के लोन का अनुमान पिछले साल के बराबर है। उम्मीद है कि डेट-टू-GSDP रेशियो (कर्ज-से-GSDP अनुपात) थोड़ा सुधर कर 38.29% से 37.98% हो जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) में 42.64% की भारी बढ़ोतरी कर इसे ₹86,533.10 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर राज्य के मजबूत फोकस को दिखाता है, ठीक वैसे ही जैसे यूनियन बजट में भी कैपिटल आउटले को बढ़ाया गया है। इंडस्ट्री चैंबर्स ने इस 'बैलेंस्ड अप्रोच' का स्वागत किया है, जो इंफ्रा डेवलपमेंट को बढ़ावा देते हुए फिस्कल डिसिप्लिन बनाए रखने के आत्मविश्वास को दर्शाता है। हालांकि, राज्य का लॉन्ग-टर्म फिस्कल हेल्थ इस बात पर निर्भर करेगा कि वह केंद्र की मदद पर ज्यादा निर्भर हुए बिना, अपने आंतरिक रेवेन्यू जनरेशन को कितना मजबूत कर पाता है।