पश्चिम बंगाल के उद्योग जगत में चिंता की लहर दौड़ गई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ पिछले 10 सालों में 22% से घटकर महज़ 6% रह गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर देखी जा रही 7.7% (Q1 FY26) और 9.1% (Q2 FY26) की ग्रोथ रेट से काफी पीछे है। इस धीमेपन की जड़ें राज्य की पुरानी और बोझिल जमीन नीतियों में बताई जा रही हैं, जो बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन हासिल करने की लागत बढ़ा रही हैं और उनकी व्यवहार्यता (viability) पर सवाल खड़ा कर रही हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट (Urban Land Ceiling Act) अभी भी राज्य में लागू है, जबकि देश के ज्यादातर राज्यों ने इसे 2000 के दशक की शुरुआत में ही खत्म कर दिया था। इस कानून के कारण जमीन के बड़े हिस्से पर मालिकाना हक रखना मुश्किल हो जाता है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन मिलना महंगा और खंडित हो जाता है। इसकी वजह से जमीन की लागत बढ़ जाती है और प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाकर और बेहतर औद्योगिक जमीन की कीमतें तय करके निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में औद्योगिक और व्यावसायिक जमीन के लिए अलग-अलग कीमतें भी ठीक से लागू नहीं हैं। इसके अलावा, कई राज्य SGST रिफंड और बिजली ड्यूटी में छूट जैसे आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन (fiscal incentives) दे रहे हैं, जिनकी पश्चिम बंगाल में कमी है या उन्हें वापस ले लिया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बड़ा उपभोक्ता वर्ग, रणनीतिक स्थान और कुशल प्रतिभा जैसे मजबूत पक्ष तो हैं, लेकिन अनिश्चित नियामक माहौल और कथित 'जबरन वसूली' जैसी चिंताओं के कारण कारोबारी माहौल सतर्क है। राज्य पर कर्ज का बोझ भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर है, जिससे औद्योगिक विकास के लिए बड़े पूंजी निवेश की क्षमता सीमित हो सकती है। अगर समय पर सुधार नहीं हुए, तो राज्य आर्थिक रूप से पिछड़ सकता है और राष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में अपना हिस्सा खो सकता है।
हालांकि, कुछ उम्मीदें भी हैं। उम्मीद है कि नई सरकार नीतियों में तालमेल बिठाकर सुधारों को गति देगी। उद्योगपतियों का कहना है कि व्यवसाय करने में आसानी (ease of doing business) को बढ़ाना, नियामक अनिश्चितता को दूर करना और जमीन अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना तत्काल प्राथमिकताएं हैं। अगर पश्चिम बंगाल इन सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करता है, तो यह काफी मात्रा में निजी निवेश को आकर्षित कर सकता है और रोजगार पैदा कर सकता है। लेकिन अगर जमीन नीतियों और प्रोत्साहन संरचनाओं में तेजी से बदलाव नहीं किया गया, तो राज्य पिछड़ता जाएगा।
