BRICS देशों का ट्रेड ₹1.17 ट्रिलियन डॉलर पार, पर ग्लोबल शेयर सिर्फ 5%!

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
BRICS देशों का ट्रेड ₹1.17 ट्रिलियन डॉलर पार, पर ग्लोबल शेयर सिर्फ 5%!
Overview

BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार **$1.17 ट्रिलियन** डॉलर तक पहुँच गया है। हालाँकि, यह वैश्विक वाणिज्य का महज़ **5%** है, जो दर्शाता है कि अभी भी बड़ा अनछुआ (untapped) पोटेंशियल मौजूद है।

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2003 में महज़ $84 अरब से शुरू हुआ BRICS देशों के बीच व्यापार $1.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। यह ग्रोथ ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ से भी तेज़ रही है, लेकिन फिर भी यह दुनिया भर के कुल व्यापार का सिर्फ़ 5% ही है। यूरोपीय यूनियन (European Union) या आसियान (ASEAN) जैसे दूसरे गुटों की तुलना में यह हिस्सा काफी कम है, जहाँ क्षेत्रीय व्यापार उनके कुल व्यापार का बड़ा हिस्सा होता है। यह दिखाता है कि BRICS देशों का आपसी इंटीग्रेशन (integration) उनकी कंबाइंड आर्थिक ताक़त से मेल नहीं खाता, और सुधार की काफ़ी गुंजाइश है।

इस ट्रेड पोटेंशियल को अनलॉक करने के तरीकों पर गांधीनगर में हुई दूसरी BRICS कॉन्टैक्ट ग्रुप ऑन ट्रेड एंड इकोनॉमिक इश्यूज (CGETI) मीटिंग में ज़ोर दिया गया। "Building for Resilience, Cooperation and Sustainability" जैसे थीम के तहत, ग्लोबल ट्रेड सिस्टम को मज़बूत करने, खासकर छोटे और मंझोले उद्योगों (MSMEs) को इंटरनेशनल ट्रेड में मदद करने पर चर्चा हुई। इसका मकसद MSMEs को नए बाज़ारों और सप्लाई चेंस तक पहुँच दिलाकर रोज़गार बढ़ाना है। इसके अलावा, सप्लाई चेंस को मज़बूत और विविध बनाने पर भी ज़ोर दिया गया। BRICS की वर्तमान प्रेसीडेंसी (Chairship) संभाल रहे भारत ने संतुलित व्यापार बढ़ाने और सर्विस सेक्टर में अवसरों का विस्तार करने का एजेंडा पेश किया है।

BRICS देशों के बीच गहरे ट्रेड इंटीग्रेशन में कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। दुनिया भर में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और संरक्षणवाद (protectionism) ट्रेड रूट्स को बाधित कर रहा है और लागत बढ़ा रहा है। कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई (inflation) भी एक बड़ी चिंता है, जिसका असर डिमांड और बिज़नेस इन्वेस्टमेंट पर पड़ रहा है। EU जैसे गुटों के विपरीत, BRICS के सदस्य देशों के बीच अलग-अलग नियमों और ट्रेड प्रैक्टिसेस को एक साथ लाना मुश्किल साबित होता है। MSMEs को ग्लोबल ट्रेड में मदद करने के लिए डिजिटल टूल्स और आसान कस्टम रूल्स में बड़े निवेश की ज़रूरत है।

BRICS के ट्रेड पोटेंशियल को पूरी तरह से खोलने के लिए सिर्फ़ सालाना मीटिंग्स से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल प्लान्स की ज़रूरत है। विश्लेषकों का मानना है कि एग्रीमेंट्स को लागू करने के लिए मज़बूत पॉलिटिकल कमिटमेंट (political commitment) ज़रूरी होगा, खासकर डिजिटल ट्रेड और सर्विसेज के मामले में। यह ग्रुप भू-राजनीतिक मुद्दों को मैनेज करने और एक स्टेबल ट्रेड और इन्वेस्टमेंट विकल्प पेश करने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत की प्रेसीडेंसी एक मौक़ा है, लेकिन लंबी अवधि की सफलता सभी सदस्यों की निरंतर प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.