NYU के प्रोफेसर Aswath Damodaran ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों का **$26 ट्रिलियन** का मार्केट वैल्यूएशन, भारी उत्पादकता बढ़ाने पर टिका है। इसका मतलब है कि व्हाइट-कॉलर नौकरियों में **50%** तक की कटौती हो सकती है। यह निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि AI ग्रोथ पर दांव लगाना एक ऐसे उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के जोखिम को बढ़ाता है जो शायद AI कंपनियों की सेवाओं को खरीदने में सक्षम न हो।
क्या है मामला?
NYU Stern School of Business के प्रोफेसर और वैल्यूएशन के जाने-माने विशेषज्ञ Aswath Damodaran ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मौजूदा मार्केट के उत्साह पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि AI कंपनियों का मार्केट वैल्यूएशन $26 ट्रिलियन तक पहुंचने के लिए, टेक्नोलॉजी को अभूतपूर्व उत्पादकता वृद्धि (productivity gains) देनी होगी। उनके विश्लेषण के अनुसार, इस स्तर की दक्षता हासिल करने के लिए लगभग आधी व्हाइट-कॉलर नौकरियों को खत्म करना पड़ सकता है। यह चेतावनी इस आर्थिक तर्क पर केंद्रित है कि AI का मूल्य श्रम लागत में भारी कटौती पर निर्भर करता है, जो अनजाने में उस उपभोक्ता आधार को सिकोड़ सकता है जो वैश्विक मांग को बढ़ाता है।
वैल्यूएशन का तर्क
निवेशक अक्सर टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों की ऊंची कीमतों को बेहतर प्रॉफिट मार्जिन की संभावनाओं को देखकर सही ठहराते हैं। AI के संदर्भ में, यह तर्क है कि मशीनें इंसानों की तुलना में तेज़ी से और सस्ते में काम करेंगी। Damodaran का कहना है कि इन कंपनियों के खरबों डॉलर के लायक होने के लिए, यह 'सस्ता' श्रम मॉडल वैश्विक मानक बनना होगा। अगर कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा ऑटोमेशन के कारण अपनी आय खो देता है, तो इसका आर्थिक प्रभाव गंभीर हो सकता है। वह ऐसे बिजनेस मॉडल की स्थिरता पर सवाल उठाते हैं जहां AI कंपनियां सारा मूल्य हासिल करना चाहती हैं, जबकि वे उत्पाद खरीदने वाले कर्मचारी नौकरी बाजार से बाहर हो जाते हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए महत्व
भारतीय बाजारों के लिए यह दृष्टिकोण विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि यहां IT सर्विसेज और बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) सेक्टर का महत्वपूर्ण एक्सपोजर है। ये उद्योग वैश्विक ग्राहकों को व्हाइट-कॉलर श्रम प्रदान करने पर आधारित हैं। यदि AI को अपनाने से एक मौलिक बदलाव आता है जहां कंपनियां एंट्री-लेवल और मिड-लेवल की भूमिकाओं - जो अक्सर यांत्रिक या दोहराव वाली होती हैं - को AI टूल से बदल देती हैं, तो यह इन फर्मों के राजस्व मॉडल में तेजी से बदलाव ला सकता है। भारतीय टेक सेक्टर के निवेशक पहले से ही देख रहे हैं कि ये कंपनियां 'AI-संचालित' सेवाओं की ओर कैसे बढ़ रही हैं, लेकिन Damodaran का दृष्टिकोण इस जोखिम को उजागर करता है कि यह परिवर्तन इकोसिस्टम में शामिल सभी के लिए जीत-जीत की स्थिति नहीं हो सकती है।
स्थायी मार्ग
Damodaran का मानना है कि एक मध्य मार्ग है जो आर्थिक रूप से अधिक स्थिर है, भले ही यह स्टॉक मार्केट सट्टेबाजों के लिए कम रोमांचक हो। इस परिदृश्य में, AI को पूरी तरह से प्रतिस्थापन के बजाय मानव उत्पादकता को बढ़ाने वाले एक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है। इससे सबसे आशावादी अनुमानों की तुलना में AI शेयरों का वैल्यूएशन कम होगा, लेकिन यह उपभोक्ता अर्थव्यवस्था और क्रय शक्ति को बनाए रखेगा। उनका सुझाव है कि लगातार मानव संपर्क और जटिल समस्या-समाधान वाली भूमिकाएं, विशुद्ध रूप से दोहराव वाले प्रशासनिक कार्यों की तुलना में नौकरी से विस्थापन के खिलाफ अधिक लचीली रहने की संभावना है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को केवल घोषणाओं के आसपास के प्रचार पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा AI को वास्तव में कैसे तैनात किया जा रहा है, इस पर ध्यान देना चाहिए। ट्रैक करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मीट्रिक यह है कि क्या AI मौजूदा कार्यबल को केवल खत्म किए बिना, प्रति कर्मचारी वास्तविक 'राजस्व' वृद्धि की ओर ले जाता है। इसके अतिरिक्त, पूंजीगत व्यय (capital spending) में बदलाव की निगरानी करना महत्वपूर्ण है; AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च करने वाली कंपनियों को अंततः यह दिखाना होगा कि यह निवेश टिकाऊ लाभ वृद्धि में तब्दील होता है, न कि केवल कम लागत जो भविष्य की उपभोक्ता खर्च को कम करती है। मुख्य निगरानी यह बनी हुई है कि AI को अपनाना मौजूदा टीमों के पूरक के रूप में कार्य करता है या प्रतिस्थापन के रूप में जो दीर्घकालिक आर्थिक मांग को जोखिम में डालता है।
